शनिवार, 15 सितंबर 2012

एफडीआई से किसानों की बल्ले-बल्ले



प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल। भले ही एफडीआई के नाम का तूफान मचा रखा हो, लेकिन हकीकतन एफडीआई देश की तरक्की के लिए मील का पत्थर साबित होगा। खासकर देश के किसानों को बिचौलिए से मुक्ति मिलेगी और उसे उपज का पूरा दाम मिलेगा। वहीं 30 प्रतिशत घरेलू उत्पाद खरीदने की शर्त पर घरेलू उत्पादकों को भी अच्छा खासा लाभ होगा। लेकिन विपक्ष ने अपना काम किया और सरकार की हर नीति की तरह इसका विरोध किया। तृणमूल हमेशा की तरह विरोध करके सरकार को ब्लैकमेल का प्रयास कर रही है, लेकिन सरकार को मुलायम, माया से गुप्त समर्थन मिल चुका है। इसलिए किसी भी हायतौबा से कुछ नहीं होना। शेयर मार्केट की तेजी से जाहिर है कि सरकार हर हाल में स्थिर है। सूत्र बताते हैं कि विदेशी गुप्तचर एजेंसी भी सरकार की स्थिरता पर रिसर्च करके अपने देशों को खबर कर चुकी हैं। भाजपा शासित राज्यों में सांप छछूंदर की स्थिति है। वो एफडीआई को प्रदेश में नहीं आने देंगे तो विकास रुकेगा और आने देंगे तो विरोध करने की दोगुली नीति उजागर होगी।                                                                                                                                          सरकार ने सीसीईए की बैठक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर दो अहम फैसले लिए हैं। एक फैसले में सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी निवेश को मंजूरी दे दी है। हालांकि, केंद्र सरकार ने किराने में विदेशी निवेश को लेकर राज्य सरकार को छूट भी दी है। राज्य सरकार अपने यहां आउटलेट खोलने की इजाजत देने में स्वतंत्र होंगे। वहीं, देसी एयरलाइंस में विदेशी एयरलाइंस के निवेश को भी सरकार ने हरी झंडी दिखा दी है। हालांकि, सरकार के इन फैसलों का तृणमूल पार्टी विरोध कर रही है।

सीसीईए बैठक में लिये गए फैसले में सरकार ने 5 कंपनियों को देशी एयरलाइंस में निवेश की इजाजत दी है। दिलचस्प है कि किसी एक देश की कंपनी द्वारा दूसरे देश में किये जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को एफडीआई कहा जाता है। ऐसे में निवेश में निवेशक को दूसरे देश की कंपनी के मैनेजमेंट में कुछ हिस्सा मिल जाता है। हालांकि, यह हिस्सा 51 फीसदी से कम होता है। आमतौर पर किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए निवेशक को कंपनी में न्यूनतम 10 फीसदी शेयर खरीदने पड़ते हैं।

केंद्र सरकार के इस फैसला के तृणमूल कांग्रेस ने तीखा विरोध किया है। पार्टी के नेता कुणाल घोष ने कहा कि हमारी पार्टी और ममता बनर्जी इस फैसले का पुरजोर विरोध करती हैं। कुणाल ने कहा कि हमारे पास संसद में इतनी संख्या नहीं है कि हम फैसलों को रोक सकें लेकिन हमें खुलकर इसका विरोध तो कर ही सकते हैं। कांग्रेस के पास संख्याबल है और यूपीए में उन्हीं की चलती है। कुणाल घोष ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ऐसी किसी भी पॉलिसी को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं करेगी।

विदेशी निवेश को किस तरह लागू किया जाना है यह राज्य सरकारें तय करेंगी। आर्थिक सुधारों के नाम पर लिए गए केंद्र सरकार के इस फैसले की बीजेपी और सीपीआई ने तीखी आचोलना की है। विपक्ष ने कहा है कि यूपीए अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए गलत फैसले ले रही है।

आम आदमी को होगा ये फायदा


  • देश के कई राज्य एफडीआई के खिलाफ हैं। वहीं, कई संगठन भी इसका विरोध जता रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच आम आदमी को जहां इससे कुछ नुकसान होने के साथ-साथ फायदा भी मिलेगा। इन फायदों में-
  • एफडीआई से अगले तीन साल में रिटेल सेक्टर में एक करोड़ नई नौकरियां मिलेंगी।
  • किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और अपने सामान की सही कीमत भी। कंस्यूमर तक जो चीज 20 रुपये में पहुंचती है, उसकी कीमत उसे पैदा करने वाले किसान को महज 4 रुपये मिल पाती है। बाकी का पैसा आढ़ती और बिचौलियों के पेट में जाता है। अब कंपनियां सीधे किसानों से चीजें खरीदेंगी, जिससे किसानों का फायदा बढ़ेगा और बिचौलियों द्वारा किया जाने वाला शोषण कम होगा। 
  • विदेशी कंपनियां द्वारा सप्लाई चेन सुधारने से खाद्य सामग्री का खराब होना रुकेगा।।
  • सामान कम खराब होने से खाद्य महंगाई सुधरेगी। 
  • विदेशी कंपनियों को न्यूनतम 30 फीसदी सामान घरेलू बाजार से ही लेना होगा। इससे देश में  लोगों की आय बढ़ेगी। इससे औद्योगिक विकास दर भी सुधरेगी।
  • देश की बड़ी कंपनियों को पहले ही रिटेल में आने की इजाजत है। चीन हो या फिर इंडोनेशिया जहां भी रिटेल में एफडीआई को मंजूरी दी गई वहां एग्रो-प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के दिन फिर गए।


शनिवार, 8 सितंबर 2012

सेक्सी ठग कोमल है दो बच्चों की मां....



खुद के बच्चों को डॉक्टर नहीं बना सकी ठग कोमल

अपराध संवाददाता, भोपाल। पूरे देश के लोगों को मेडीकल में एडमीशन दिलाने के लिए दलाली और ठगी करने वाली पूनम खुद के बच्चों को डॉक्टर नहीं बना सकी। कोमल की फितरतों की वजह से वो बच्चों पर ध्यान नहीं दे सकी और वो पढ़ने-लिखने में फिसड्डी हो गए। लिहाजा कोमल ने एक बेटे को एमबीए और दूसरे का बीबीए में एडमीशन करवा दिया। कोमल के दोनों बेटे इंदौर में पढ़ते हैं।

रिमांड के दौरान पूछताछ में भोपाल पुलिस ने कोमल के कई राज पर से पर्दा उठाया। कोमल का जन्म 1970 में सफदरगंज दिल्ली में हुआ। उसके पिता एसके सलवान सेना के रिटायर्ड अफसर हैं। कोमल का छोटा भाई बाबी सलवान फ्रांस में टाटा कंपनी का जोनल सेल्समेन है। उसकी ससुराल भोपाल की गुलमोहर कॉलोनी में है। कोमल की पढ़ाई भोपाल में हुई। उसकी शादी जबलपुर के पंकज पांडे से हुई। कोमल के दो बेटे है। बड़ा अभिनव इंदौर से एमबीए कर रहा है, जबकि छोटा शांतनु बीबीए का छात्र है। कोमल ने 1990 से लेकर वर्ष 2000 तक एनजीओ में काम किया। इसके बाद वह सतना में रहने लगी। इस दौरान वह रेडक्रास में काम करती थी। इसके बाद कोमल 2003 में जबलपुर आ गई, लेकिन वह 2006 से भोपाल समेत कई शहरों के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के गोरखधंधे में लिप्त हो गई। मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीट का सौदा एक से लेकर डेढ़ करोड़ रुपए में किया जाता है। यह भारी-भरकम रकम कॉलेज प्रबंधन अपने दलालों के माध्यम से छात्रों से वसूलते हैं। इस गोरखधंधे में कॉलेज के कर्मचारियों की भी मिलीभगत होती है। यह सिंडिकेट ऐसे छात्रों की तलाश करता है, जो मोटी रकम देकर पीजी करना चाहते हैं। सारा लेन-देन नकद में होता है। निशातपुरा पुलिस के रिमांड पर चल रही कोमल के साथी जावेद की पुलिस को तलाश है। उसकी खोजबीन में पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। कोमल की रिमांड अवधि शनिवार को समाप्त हो रही है। इस बीच कोमल से पिपरिया समेत कुछ स्थानों की पुलिस पूछताछ कर चुकी है। कोमल को पांच सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, जिसका आज रिमांड खत्म होने पर अदालत में पेश किया गया।
00सारे कॉलेजों में कोमल की धाक 
एसपी अरविंद सक्सेना ने बताया कि कोमल पांडे से की जा रही पूछताछ में उसने बताया कि वह कोई दो दर्जन छात्र-छात्राओं को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिला चुकी हैं। एसपी ने कहा कि कोमल का दावा है कि उसका नेटवर्क चिरायु, पीपुल्स व इंदौर के श्री अरविंदो और उज्जैन के आडीर्गार्डी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में है। अति महत्वाकांक्षी व आत्म विश्वास से लबरेज कोमल पांडे के कई बैंकों में खाते हैं। फिलहाल केनरा, आईडीबीआई, यूको, भोपाल को-आपरेटिव व इंडसुइंड समेत सात बैंकों में उसके खातों की जानकारी मिली है। खुद को भारतीय विप्र समाज की महिला इकाई की प्रदेशाध्यक्ष बताने वाली कोमल पांडे बहुजन समाज पार्टी में भी पदाधिकारी रह चुकी है। उसने बताया कि बसपा में उसका इतना दखल था कि अगर उसके पास पर्याप्त धनराशि होती, तो विधानसभा चुनाव में वह संजीव सक्सेना को बीएसपी से टिकट नहीं लेने देते, बल्कि खुद चुनाव लड़ती। किंतु पैसों की कमी ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया था, इस कारण उसने कमाई का शार्टकट रास्ता अपना लिया। इस कमाई से कोमल ने घर की खूब शान-शौकत ब़ढ़ाई। उसके पास दो नैनों व एक मारुति तथा एक फोर्ड कंपनी की आइकान कार है। कोमल का कहना है कि उसे एक नैनो कार कोलार रोड स्थित स्वर्ण सुख ज्वेलर्स की दुकान से इनाम में मिली है।
00खुद को डॉक्टर बताती थी कोमल
कोमल बेहद शातिर दिमाग की औरत है। उसने पैथालॉजी का डिप्लोमा किया है। इसके बाद नाम के आगे डाक्टर लिखना शुरू कर दिया। उसने कई जगह पर खुद का नाम डॉ. शुभ्रा भी बताया था। कोमल ने मुरैना, सतना, पिपरिया समेत कई शहरों में अपनी पैठ बना ली थी। वह डॉक्टर के रूप में मिलती थी। इस कारण उसकी बातों पर एडमिशन कराने वालों को सहज भरोसा हो जाता था। कोमल ने बताया कि वह मेडिकल पीजी सीट के लिए 1 करोड़ 40 लाख रुपए तक वसूल चुकी है। ऐसी रकम कॉलेज के अलावा एडमिशन रैकेट चलाने वालों के बीच में बंट जाती है।


गुरुवार, 6 सितंबर 2012

रईसों को इंदौर का आरामदायक सफर कराएगी वाल्वो


भोपाल। इंदौर-भोपाल के बीच वॉल्वो बस के टिकट सिर्फ आॅनलाइन ही बुक किए जा सकेंगे। इस रूट पर शुरूआत में चार बसें चलेंगी जिनमें से दो बुधवार को इंदौर पहुंच गई। माना जा रहा है कि जल्द ही इनको चलाने की तारीख तय कर दी जाएगी।

बस का संचालन अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) ही करेगा। एक बस में 53 यात्री बैठ सकेंगे और प्रति यात्री किराया लगभग 350 रुपए रहेगा। इंदौर से भोपाल की दूरी यह लगभग 3.30 घंटे में तय करेगी। एआईसीटीएसएल के सीईओ चंद्रमौलि शुक्ला ने बताया बसों के परमिट की प्रक्रिया चल रही है जो इस हफ्ते पूरी हो जाएगी। बची दो बसें एक-दो दिन में आ जाएंगी। इसके बाद लोकार्पण का कार्यक्रम तय कर बसें शुरू कर देंगे। फिलहाल टाइम-टेबल तय नहीं हुआ है।

मनचाही सीट ले सकेंगे

www.charteredbus.in वेबसाइट पर यात्री अपनी मनचाही सीट बुक करा सकेंगे। > इंदौर से यह बस सिटी बस आॅफिस से शिवाजी प्रतिमा-बायपास लिंक रोड होते हुए रिंगरोड के रेडिसन चौराहा, एमआर-10 व बायपास होते हुए भोपाल जाएगी।

- भोपाल में यह बस लालघाटी और जवाहर चौक होते हुए हबीबगंज स्थित इंटरस्टेट बस टर्मिनस तक चलेगी।

ताकतवर इंजन, सुपर लक्जरी सीट

  • - इस आधुनिक बस में 340 बीएचपी का ताकतवर इंजन लगा है जो बस के एसी को भी प्रभावी बनाता है। 
  • > 1.10 करोड़ रुपए प्रति बस की कीमत वाले इस वाहन में मल्टी-एक्सल लगा है जिससे गड्ढों पर चलने के दौरान यात्री को दचके नहीं लगते।

सेक्स और धन के मिश्रण से कोमल बनना चाहती थी नेता


हर फितरत में माहिर थी कोमल

कोमल पाण्डे
 भोपाल। मेडीकल कॉलेज में दाखिला हो या किसी की नौकरी लगना हो, कोमल पांडे हर काम को चुटकियों में करवाने में माहिर थी। ग्राहक को जाल में फंसाने मेकअप में लिपटे चेहरे से ऐसी कातिल मुस्कान फेंकती थी कि लोग उसके विश्वास के दीवाने हो जाते थे। लोगों को ठगने के लिए अलग-अलग नाम और पद का इस्तेमाल बड़ी आसानी से करती थी। उम्र के ढलान पर वो एक बड़ा चुनाव लड़ने के लिए रुपयों का इंतजाम कर रही थी। इन रुपयों के इंतजाम के लिए उसे जो मिला उसे ही ठग लिया। पुलिस की पूछताछ में कोमल पांडे के कई राज उजागर होते जा रहे हैं। राजधानी के अलावा सतना, पिपरिया, जबलपुर सहित करीबन आधा दर्जन जिलों की पुलिस को कोमल की तलाश थी।
मेडीकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर कई छात्रों को लाखों की चपत लगाने वाली कोमल पांडे को पिपरिया पुलिस ने बुधवार को अपनी हिरासत में लिया। हालांकि अभी वह निशातपुरा पुलिस की रिमांड पर है। उसे पिपरिया पुलिस भी रिमांड पर लेने की कार्रवाई कर रही है। इसके बाद दूसरे जिलों की पुलिस भी रिमांड पर लेकर कोमल से ठगी के राज उगलवाएगी। कोमल पांडे के खिलाफ मुरैना, सतना में भी धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए हैं। महिला इतनी शातिर है कि उसने महापौर का चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस कमेटी को पत्र लिखा था। नेतागिरी की आड़ में वह कई लोगों को झांसा दे चुकी है। निशातपुरा थाना प्रभारी एके वाजपेयी ने बताया कि पिपरिया पुलिस ने बुधवार को कोमल पांडे को हिरासत में ले लिया है। पुलिस उसे अदालत से रिमांड पर लेने की कार्रवाई भी कर रही है। इसके अलावा महिला के खिलाफ मुरैना व सतना में भी धोखाधड़ी करने के मामले उजागर हुए हैं। कोमल ने वहां के छात्रों को भी एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर लाखों रुपए की चपत लगाई है। लक्जरी गाड़ियों में सफर करने व शान शौकत से रहने वाली कोमल पांडे के सहयोगियों की तलाश में पुलिस की दो टीमें लगाई हैं। इनमें से एक टीम ग्वालियर के लिए रवाना हो गई है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी महिला ने सतना के डीसी पटेल नामक व्यक्ति से उनके बेटे का एडमीशन कराने के लिए साढ़े 5 लाख रुपए लिए थे। लेकिन जब काम नहीं हुआ, तो उन्हें दो चेक थमा दिए गए थे। किंतु दोनों चेक वाउंस हो गए थे। इस मामले में फरियादी ने अदालत की शरण ली। न्यायालय में भी कोमल के खिलाफ एक धोखाधड़ी का मामला चल रहा है। किंतु उसका पता सही नहीं होने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया था। अब सतना व मुरैना पुलिस भी कोमल से पूछताछ करने जल्दी भोपाल आने वाली है।

सोमवार, 3 सितंबर 2012

ये है ओसामा की मौत की हकीकत...नेवी सील कमांडो का खुलासा...



विशेष संवाददाता, भोपाल।
अमेरिका लाख कहे कि ओसामा मुठभेड़ में मारा गया। जबकि हकीकत ये है कि नेवी सील कमांडो ने जो सामने आया उसे भून दिया। बिना संघर्ष के ही कुख्यात कट्टर आतंकवादी कुत्ते की मौत मारा गया। नेवी सील कमांडो मार्क बाइसोनेट की किताब से अलकायदा सरगना के खात्मे की पूरी कहानी सामने आ गई है। 'नो ईजी डे : द फर्स्ट हैंड अकाउंट आॅफ द मिशन दैट किल्ड ओसामा बिन लादेन' नाम की इस किताब को बाइसोनेट ने मार्क ओवन के नाम से लिखा है। यह किताब 4 सितंबर को लांच होगी, लेकिन आॅपरेशन जेरोनिमो की पूरी कहानी मीडिया में आ चुकी है, तो आइए जानें बाइसोनेट की जुबानी 'आॅपरेशन ओसामा' की कहानी..

अफगानिस्तान के जलालाबाद सैन्य ठिकाने से 24 नेवी सील कमांडो 1 मई 2011 की रात दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों में सवार होकर पाकिस्तान के एबटाबाद की ओर बढ़े। कमांडोज को तीन टीमों में बांटा गया था। हमें मालूम था कि 'वजीरिस्तान हवेली' में लादेन के अलावा उसका बेटा खालिद, संदेशवाहक अहमद अल कुवैती और कुवैती का भाई अबरार भी होंगे। एबटाबाद पहुंचते ही एक ब्लैक हॉक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। खुशकिस्मती से उसमें सवार कमांडोज सुरक्षित थे। दूसरे हेलीकॉप्टर में सवार सभी कमांडोज हवेली की छत पर उतर चुके थे। हमारे पास 'आॅपरेशन जेरानिमो' को अंजाम देने के लिए 30 मिनट थे। मैं और मेरी टीम परिसर में मौजूद गेस्ट हाउस की ओर बढ़ी। हमें बताया गया था कि लादेन का संदेश वाहक अहमद अल कुवैती परिवार के साथ यहीं पर रहता है। इसके बाद कमांडो ने दरवाजे के ऊपर बनी खिड़की को निशाना बनाकर पहला राउंड फायर किया। एक साथी ने अरबी में कुवैती से बाहर आने को कहा। कुछ देर बाद दरवाजा खुला और महिला बाहर आई। उसके हाथों में कुछ था, हमें लगा कि वह बम है, लेकिन उसकी गोद में नवजात था। वह कुवैती की पत्नी मरियम थी। उसके पीछे तीन बच्चे खड़े थे। उसने बताया कि कुवैती मर चुका है, लेकिन मैंने बेडरूम के दरवाजे पर हलचल देखी और कुवैती पर कई गोलियां दागीं। गेस्ट हाउस सुरक्षित करने के बाद टीम परिसर के मुख्य हिस्से की ओर बढ़ी। टीम का नेतृत्व करने वाले 'प्वाइंट मैन' ने खिड़की से किसी को झांकते देखा। उसने बिना देर किए उसे गोली मारी, वह अबरार था। उसकी पत्नी बुशरा उसे बचाने में मारी गई। अब परिसर का 'फर्स्ट लेवल' सुरक्षित था।

सेकेंड लेवल में खालिद और थर्ड में लादेन को उड़ाया

कमाडोज ने कुछ देर में 'सेकेंड लेवल' में घुसने के लिए एक गेट उड़ा दिया। जब मैं सेकेंड लेवल पर पहुंचा तो देखा एक बॉडी लटकी है। वह लादेन का बेटा खालिद था। इसके बाद टीम 'थर्ड लेवल' यानी तीसरी मंजिल की ओर बढ़ी। मैं सीढ़ियों पर था तभी गोली चलने की आवाज सुनाई दी। प्वांइट मैन ने बताया कि खिड़की से कोई झांक रहा था, इसलिए उसने गोली चलाई, लेकिन उसे नहीं पता था गोली लगी या नहीं? वह आदमी एक कमरे की ओर भागा। कुछ देर रुककर हम कमरे की ओर बढ़े और देखा कि दो महिलाएं एक आदमी से लिपटकर रो रही थीं। मैंने और एक अन्य कमांडो ने उसके सीने पर कई राउंड फायर किए। मैंने उसका खून से सना चेहरा साफ किया और कुछ फोटो खींचे। पहचान के लिए हमने वहां मौजूद एक लड़की से पूछा यह कौन है? उसने जवाब दिया ओसामा बिन लादेन।