प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल। भले ही एफडीआई के नाम का तूफान मचा रखा हो, लेकिन हकीकतन एफडीआई देश की तरक्की के लिए मील का पत्थर साबित होगा। खासकर देश के किसानों को बिचौलिए से मुक्ति मिलेगी और उसे उपज का पूरा दाम मिलेगा। वहीं 30 प्रतिशत घरेलू उत्पाद खरीदने की शर्त पर घरेलू उत्पादकों को भी अच्छा खासा लाभ होगा। लेकिन विपक्ष ने अपना काम किया और सरकार की हर नीति की तरह इसका विरोध किया। तृणमूल हमेशा की तरह विरोध करके सरकार को ब्लैकमेल का प्रयास कर रही है, लेकिन सरकार को मुलायम, माया से गुप्त समर्थन मिल चुका है। इसलिए किसी भी हायतौबा से कुछ नहीं होना। शेयर मार्केट की तेजी से जाहिर है कि सरकार हर हाल में स्थिर है। सूत्र बताते हैं कि विदेशी गुप्तचर एजेंसी भी सरकार की स्थिरता पर रिसर्च करके अपने देशों को खबर कर चुकी हैं। भाजपा शासित राज्यों में सांप छछूंदर की स्थिति है। वो एफडीआई को प्रदेश में नहीं आने देंगे तो विकास रुकेगा और आने देंगे तो विरोध करने की दोगुली नीति उजागर होगी। सरकार ने सीसीईए की बैठक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर दो अहम फैसले लिए हैं। एक फैसले में सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी निवेश को मंजूरी दे दी है। हालांकि, केंद्र सरकार ने किराने में विदेशी निवेश को लेकर राज्य सरकार को छूट भी दी है। राज्य सरकार अपने यहां आउटलेट खोलने की इजाजत देने में स्वतंत्र होंगे। वहीं, देसी एयरलाइंस में विदेशी एयरलाइंस के निवेश को भी सरकार ने हरी झंडी दिखा दी है। हालांकि, सरकार के इन फैसलों का तृणमूल पार्टी विरोध कर रही है।
सीसीईए बैठक में लिये गए फैसले में सरकार ने 5 कंपनियों को देशी एयरलाइंस में निवेश की इजाजत दी है। दिलचस्प है कि किसी एक देश की कंपनी द्वारा दूसरे देश में किये जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को एफडीआई कहा जाता है। ऐसे में निवेश में निवेशक को दूसरे देश की कंपनी के मैनेजमेंट में कुछ हिस्सा मिल जाता है। हालांकि, यह हिस्सा 51 फीसदी से कम होता है। आमतौर पर किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए निवेशक को कंपनी में न्यूनतम 10 फीसदी शेयर खरीदने पड़ते हैं।
केंद्र सरकार के इस फैसला के तृणमूल कांग्रेस ने तीखा विरोध किया है। पार्टी के नेता कुणाल घोष ने कहा कि हमारी पार्टी और ममता बनर्जी इस फैसले का पुरजोर विरोध करती हैं। कुणाल ने कहा कि हमारे पास संसद में इतनी संख्या नहीं है कि हम फैसलों को रोक सकें लेकिन हमें खुलकर इसका विरोध तो कर ही सकते हैं। कांग्रेस के पास संख्याबल है और यूपीए में उन्हीं की चलती है। कुणाल घोष ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ऐसी किसी भी पॉलिसी को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं करेगी।
विदेशी निवेश को किस तरह लागू किया जाना है यह राज्य सरकारें तय करेंगी। आर्थिक सुधारों के नाम पर लिए गए केंद्र सरकार के इस फैसले की बीजेपी और सीपीआई ने तीखी आचोलना की है। विपक्ष ने कहा है कि यूपीए अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए गलत फैसले ले रही है।
आम आदमी को होगा ये फायदा
- देश के कई राज्य एफडीआई के खिलाफ हैं। वहीं, कई संगठन भी इसका विरोध जता रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच आम आदमी को जहां इससे कुछ नुकसान होने के साथ-साथ फायदा भी मिलेगा। इन फायदों में-
- एफडीआई से अगले तीन साल में रिटेल सेक्टर में एक करोड़ नई नौकरियां मिलेंगी।
- किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और अपने सामान की सही कीमत भी। कंस्यूमर तक जो चीज 20 रुपये में पहुंचती है, उसकी कीमत उसे पैदा करने वाले किसान को महज 4 रुपये मिल पाती है। बाकी का पैसा आढ़ती और बिचौलियों के पेट में जाता है। अब कंपनियां सीधे किसानों से चीजें खरीदेंगी, जिससे किसानों का फायदा बढ़ेगा और बिचौलियों द्वारा किया जाने वाला शोषण कम होगा।
- विदेशी कंपनियां द्वारा सप्लाई चेन सुधारने से खाद्य सामग्री का खराब होना रुकेगा।।
- सामान कम खराब होने से खाद्य महंगाई सुधरेगी।
- विदेशी कंपनियों को न्यूनतम 30 फीसदी सामान घरेलू बाजार से ही लेना होगा। इससे देश में लोगों की आय बढ़ेगी। इससे औद्योगिक विकास दर भी सुधरेगी।
- देश की बड़ी कंपनियों को पहले ही रिटेल में आने की इजाजत है। चीन हो या फिर इंडोनेशिया जहां भी रिटेल में एफडीआई को मंजूरी दी गई वहां एग्रो-प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के दिन फिर गए।


