खुद के बच्चों को डॉक्टर नहीं बना सकी ठग कोमल
अपराध संवाददाता, भोपाल। पूरे देश के लोगों को मेडीकल में एडमीशन दिलाने के लिए दलाली और ठगी करने वाली पूनम खुद के बच्चों को डॉक्टर नहीं बना सकी। कोमल की फितरतों की वजह से वो बच्चों पर ध्यान नहीं दे सकी और वो पढ़ने-लिखने में फिसड्डी हो गए। लिहाजा कोमल ने एक बेटे को एमबीए और दूसरे का बीबीए में एडमीशन करवा दिया। कोमल के दोनों बेटे इंदौर में पढ़ते हैं।
रिमांड के दौरान पूछताछ में भोपाल पुलिस ने कोमल के कई राज पर से पर्दा उठाया। कोमल का जन्म 1970 में सफदरगंज दिल्ली में हुआ। उसके पिता एसके सलवान सेना के रिटायर्ड अफसर हैं। कोमल का छोटा भाई बाबी सलवान फ्रांस में टाटा कंपनी का जोनल सेल्समेन है। उसकी ससुराल भोपाल की गुलमोहर कॉलोनी में है। कोमल की पढ़ाई भोपाल में हुई। उसकी शादी जबलपुर के पंकज पांडे से हुई। कोमल के दो बेटे है। बड़ा अभिनव इंदौर से एमबीए कर रहा है, जबकि छोटा शांतनु बीबीए का छात्र है। कोमल ने 1990 से लेकर वर्ष 2000 तक एनजीओ में काम किया। इसके बाद वह सतना में रहने लगी। इस दौरान वह रेडक्रास में काम करती थी। इसके बाद कोमल 2003 में जबलपुर आ गई, लेकिन वह 2006 से भोपाल समेत कई शहरों के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के गोरखधंधे में लिप्त हो गई। मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीट का सौदा एक से लेकर डेढ़ करोड़ रुपए में किया जाता है। यह भारी-भरकम रकम कॉलेज प्रबंधन अपने दलालों के माध्यम से छात्रों से वसूलते हैं। इस गोरखधंधे में कॉलेज के कर्मचारियों की भी मिलीभगत होती है। यह सिंडिकेट ऐसे छात्रों की तलाश करता है, जो मोटी रकम देकर पीजी करना चाहते हैं। सारा लेन-देन नकद में होता है। निशातपुरा पुलिस के रिमांड पर चल रही कोमल के साथी जावेद की पुलिस को तलाश है। उसकी खोजबीन में पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। कोमल की रिमांड अवधि शनिवार को समाप्त हो रही है। इस बीच कोमल से पिपरिया समेत कुछ स्थानों की पुलिस पूछताछ कर चुकी है। कोमल को पांच सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, जिसका आज रिमांड खत्म होने पर अदालत में पेश किया गया।00सारे कॉलेजों में कोमल की धाक
एसपी अरविंद सक्सेना ने बताया कि कोमल पांडे से की जा रही पूछताछ में उसने बताया कि वह कोई दो दर्जन छात्र-छात्राओं को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिला चुकी हैं। एसपी ने कहा कि कोमल का दावा है कि उसका नेटवर्क चिरायु, पीपुल्स व इंदौर के श्री अरविंदो और उज्जैन के आडीर्गार्डी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में है। अति महत्वाकांक्षी व आत्म विश्वास से लबरेज कोमल पांडे के कई बैंकों में खाते हैं। फिलहाल केनरा, आईडीबीआई, यूको, भोपाल को-आपरेटिव व इंडसुइंड समेत सात बैंकों में उसके खातों की जानकारी मिली है। खुद को भारतीय विप्र समाज की महिला इकाई की प्रदेशाध्यक्ष बताने वाली कोमल पांडे बहुजन समाज पार्टी में भी पदाधिकारी रह चुकी है। उसने बताया कि बसपा में उसका इतना दखल था कि अगर उसके पास पर्याप्त धनराशि होती, तो विधानसभा चुनाव में वह संजीव सक्सेना को बीएसपी से टिकट नहीं लेने देते, बल्कि खुद चुनाव लड़ती। किंतु पैसों की कमी ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया था, इस कारण उसने कमाई का शार्टकट रास्ता अपना लिया। इस कमाई से कोमल ने घर की खूब शान-शौकत ब़ढ़ाई। उसके पास दो नैनों व एक मारुति तथा एक फोर्ड कंपनी की आइकान कार है। कोमल का कहना है कि उसे एक नैनो कार कोलार रोड स्थित स्वर्ण सुख ज्वेलर्स की दुकान से इनाम में मिली है।
00खुद को डॉक्टर बताती थी कोमल
कोमल बेहद शातिर दिमाग की औरत है। उसने पैथालॉजी का डिप्लोमा किया है। इसके बाद नाम के आगे डाक्टर लिखना शुरू कर दिया। उसने कई जगह पर खुद का नाम डॉ. शुभ्रा भी बताया था। कोमल ने मुरैना, सतना, पिपरिया समेत कई शहरों में अपनी पैठ बना ली थी। वह डॉक्टर के रूप में मिलती थी। इस कारण उसकी बातों पर एडमिशन कराने वालों को सहज भरोसा हो जाता था। कोमल ने बताया कि वह मेडिकल पीजी सीट के लिए 1 करोड़ 40 लाख रुपए तक वसूल चुकी है। ऐसी रकम कॉलेज के अलावा एडमिशन रैकेट चलाने वालों के बीच में बंट जाती है।
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