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शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

स्लम फ्री होंगे प्रदेश के शहर


प्रदेश के 16 शहर को केंद्रीय राजीव आवास योजना का लाभ

भोपाल। केंद्र ने स्लम बस्तियों को आवास देने वाली योजना के लिए मध्यप्रदेश के प्रति उदारता दिखाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गौर की भाजपा में भले ही न सुनी जाए, लेकिन कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं से गौर की अच्छी बनती है। उसी का परिणाम है कि गौर को बराय मेहरबानी केंद्र की योजनाओं का लाभ मिल जाता है। केंद्र सरकार ने पहले केवल 10 शहर स्लम फ्री करने के लिए चिन्हित किए थे। अब इन्हें बढ़ाकर 16 कर दिए हैं। हलांकि केंद्र से गौर ने जिन 6 जिलों को स्लम फ्री करने के लिए बढ़वाया है, उनमें स्लम बस्तियां की संख्या न के बराबर है। प्रदेश के केवल 4 महानगरों को ही स्लम फ्री करने की जरूरत है, लेकिन कागजी योजनाएं बताती हैं कि प्रदेश के सभी 50 जिलों में स्लम बस्ती हैं।
शहरी गरीबों के कल्याण के लिये प्रारंभ केन्द्रीय राजीव आवास योजना में प्रदेश के 10 और शहर शामिल किए गए हैं। नगरीय प्रशासन की पहल पर शामिल इन नये शहरों को मिलाकर अब इस योजना में प्रदेश के शहरों की संख्या बढ़कर 16 हो गयी है। योजना में शहरों को स्लम-फ्री बनाने के उद्वेश्य से गरीबों के लिए आवास निर्माण किए जाएंगे।
केन्द्र सरकार द्वारा राजीव आवास योजना में चुने गये नए 10 शहर में 8 नगर पालिक निगम तथा एक लाख से अधिक आबादी वाली 2 नगर पालिका वाले शहर शामिल किए गए हैं। योजना में प्रदेश के बुरहानपुर, देवास, खण्डवा, रतलाम, रीवा, सतना, सिंगरौली एवं मुड़वारा (कटनी) तथा नीमच एवं छिन्दवाड़ा शहर को सम्मिलित किया गया है। इससे पूर्व राजीव आवास योजना में प्रदेश के छह नगर पालिक निगम वाले शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन एवं सागर शामिल थे। योजना में स्लम गरीबों के लिए निर्मित होने वाले आवासों के लिए केन्द्रांश 50 प्रतिशत एवं राज्यांश 20 प्रतिशत रहेगा। संबंधित हितग्राही को 30 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी।