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शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

एक डॉक्टर से नहीं हो सकेगा परिवार का इलाज


  • प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों का मामला, एमसीआई ने दिया था प्रस्ताव, विशेषज्ञता चिकित्सा को दी जा रही वरीयता
  •  नहीं है फेमिली डॉक्टर का कोर्स 
इंट्रो:
एमसीआई चाहता है कि एक ही डॉक्टर सभी बीमारियों के इलाज में एक्सपर्ट हो यानि डॉक्टर फेमिली मेडीसिन का कोर्स करें, लेकिन प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडीकल कॉलेज में फेमिली मेडीसिन का कोर्स शुरु नहीं किया गया है। ऐसे में विशेषज्ञता कोर्स के चलते मरीजों को हर इलाज के लिए अलग-अलग डॉक्टर को फीस देना होती है। इसके साथ ही कई गंभीर बीमारियों की जानकारी मरीज को बहुत बाद में मिल पाती है और उसका समय पर इलाज नहीं हो पाता। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की चिकित्सा सुविधा में फेमिली मेडीसिन का कोर्स बहुत कारगर साबित हो सकता है।

 प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल।

पुराने समय की बात है कि पहले एक ही डॉक्टर सभी रोगों का इलाज कर लेता था। फेमिली डॉक्टर का चलन था और फेमिली डॉक्टर को हर बीमारी के इलाज में महारत हासिल थी। वह आवश्यकता होने पर ही विशेषज्ञ का सहारा लेता था। लेकिन अब विशेषज्ञ डॉक्टर अधिक हो गए हैं और वे केवल एक ही रोग का इलाज कर पाते हैं। इससे अलग-अलग रोगों के लिए विभिन्न विशेषज्ञों के पास जाना पड़ रहा है। सभी रोगों का इलाज करने वाला डॉक्टर फेमिली डॉक्टर की श्रेणी में आता है। एमसीआई ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए फेमिली मेडिसिन कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके बावजूद अभी तक प्रदेश के किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में फेमिली मेडिसिन कोर्स को शुरू नहीं किया गया।
प्रदेश में फेमिली मेडिसिन कोर्स को तवज्जो नहीं दी जा रही है। जबकि इससे उलट मेडिकल क्षेत्र में विशेषज्ञता कोर्स को ही वरीयता दी जा रही है। इस कारण से अच्छे फिजिशियन लाने की अवधारणा धूमिल होती नजर आ रही है। वर्तमान में यह कोर्स केवल एक निजी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

00गांवों में चिकित्सा सुविधा में मील का पत्थर
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा का अभाव रहता है। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में केवल सरकारी अस्पताल की ही सुविधा है और इन्हीं अस्पतालों के सहारे इन क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था निर्भर है। ऐसे क्षेत्रों के लिए एमबीबीएस के बाद फेमिली मेडीसिन का कोर्स बहुत उपयोगी साबित होगा। ग्रामीण क्षेत्र के डॉक्टर को सभी क्षेत्र की चिकित्सा में महारत हासिल होगी तो वह गांव में रहकर मरीजों का समुचित उपचार कर सकेगा। खासकर गांव के लोगों को बीमारी में ये भी पता नहीं होता कि उन्हें किस डॉक्टर से मिलना चाहिए। पता भी हो तो उनकी हैसियत ऐसी नहीं होती कि वह मोटी फीस देकर इलाज करा सके या डॉक्टर की बताई महंगी जांच करा सकें। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के डॉक्टर का फेमिली मेडीसिन का कोर्स ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

00मृत्यु दर के आंकड़ों में होगी कमी
बीमारी के कारण हुई मौतों में 80 फीसदी का कारण होता है समय पर मरीज को बीमारी की जानकारी न मिल पाना। अगर फेमिली मेडीसिन डॉक्टर होंगे तो मरीज की बीमारी समझ आ सकेगी और समय पर उसका इलाज हो सकेगा। मध्यप्रदेश में 80 फीसदी से ज्यादा जिले ऐसे हैं जिनमें महानगरों तक पहुंचने में काफी वक्त लगता है और काफी खर्च भी वहन करना पड़ता है। इसके अलावा आने-जाने के लिए आसानी से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी नहीं है। खासकर आदिवासी और पिछड़े जिले में ये बहुत बड़ी समस्या है। ऐसे क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर होते भी हैं तो उन्हें सभी बीमारियों के इलाज की जानकारी नहीं होती। ऐसे क्षेत्रों के लिए फेमिली मेडीसिन डॉक्टर होने से स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होगा और लोगों को बेहतर इलाज घर के करीब ही मिल सकेगा।

क्या है फेमिली मेडिसिन

  • एमबीबीएस के बाद दो से तीन साल का कोर्स करने का प्रस्ताव एमसीआई ने रखा था।
  • फेमिली मेडिसिन में सामुदायिक चिकित्सा शिक्षा, शिशु रोग, स्त्री रोग, मेडिसिन चिकित्सा पढ़ाने का प्रावधान है।
  • इस कोर्स को करने के बाद एक ही डॉक्टर विभिन्न रोगों के मरीज एक साथदेख सकता है।
  • मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • एमबीबीएस के बाद इस विशेष कोर्स करने के कारण वह डॉक्टर फेमिली मेडिसिन का विशेषज्ञ कहलाएगा।
  • गांवों में अलग-अलग रोगों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर्स की आवश्यकता नहीं होगी।


अभी यह हो रहा है


  • एमबीबीएस के बाद केवल विशेषज्ञता के पीजी कोर्स को दी जा रही वरीयता।
  • मरीज फिजिशियन की जगह विशेषज्ञ डॉक्टरों से कराने में दिखा रहे उत्सुकता।
  • मरीजों की जेब हो रही ढीली।
  • मरीजों को यह जानकारी नहीं होती कि वे किस रोग के लिए किस विशेषज्ञ डॉक्टरों से मिलें। यह सलाह फेमिली फिजिशियन ही दे सकता है। 




एमसीआई ने फेमिली मेडिसिन कोर्स का प्रस्ताव रखा था लेकिन अभी तक इसे प्रदेश के किसी मेडिकल कॉलेज में शुरू नहीं किया है। इस कोर्स के शुरू होने से विशेषज्ञ डॉक्टर को चार विधा का ज्ञान हो सकेगा और मरीजों को फायदा मिलेगा।
डॉ.प्रदीप कसार अधीक्षक,मेडिकल अस्पताल, जबलपुर

फेमिली मेडिसिन कोर्स शुरू होने के बारे में सुना था। लेकिन यह अभी तक शुरू नहीं किया गया है। इस कोर्स के शुरू होने से चिकित्सा क्षेत्र में बेहतर परिणाम मिलेंगे। कई बीमारियां फेमिली फिजिशियन सेटिल कर सकता है। इस कोर्स के आने से और बेहतर फेमिली फिजिशियन मिलेंगे। जिससे मरीजों को आवश्यकता होने पर ही कंस्टलटेंट के पास जाना पड़ेगा। कई बीमारियों का इलाज फेमिली फिजिशियन खुद ही कर देगा और बेहतर सलाह दे सकेगा।
डॉ.एमसी डॉवर फिजिशियन