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शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

एक बेवफा, वफा चाहती थी, मिली मौत




भिलाई की सुनीता अपनी मर्जी से जीने वाली आधुनिक ख्याल युवती थी। खुद को आधुनिक और आजाद ख्याल मानने वाली सुनीता ने पढ़ाई के बाद कॉल सेंटर में नौकरी शुरु कर दी और जिनेंद्र से प्यार करते हुए अपनी मर्जी से शादी भी कर ली। लेकिन आजाद ख्याली के चलते शादी के महज 6 माह के भीतर ही उसका दिल पति के दोस्त योगेंद्र पर आ गया और पति को छोड़ योगेंद्र के साथ रातें गुजारने लगी। अवैध संबंधों के चलते सुनीता गर्भवती हुई तो योगेंद्र पर शादी के लिए दबाव बनाया, लेकिन योगेंद्र ने साफ इंकार दिया। योगेंद्र पर ज्यादा दबाव डाला तो योगेंद्र ने सुनीता की हत्या कर दी। ये हकीकत है पिछले हफ्ते भोपाल स्टेशन के पास मृत मिली सुनीता की। ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं जहां प्यार, आधुनिकता और आजाद ख्यालों के नाम पर अवैध संबंध पनपते हैं और उनका परिणाम हत्या जैसे जघन्य अपराध होता है। समाजशास्त्री इसका कारण वासनात्मक प्रवृत्ति और सामाजिक वर्जनाओं का तार-तार होना मानते हैं। हाईप्रोफाइल ही नहीं मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों में भौतिक चकाचौंध में संबंधों के महत्व को खत्म कर दिया है।

प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल


पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का कहा जाता है, लेकिन अब सात फेरों का महत्व और आपसी विश्वास की जगह वासनात्मक प्रवृति ने ले ली है। हाईप्रोफाइल में रिश्तों के महत्व को कमतर आंकने की बात सामने आई, लेकिन करीबन एक दर्जन घटनाएं ऐसी हैं जिनमें मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार तबाह हुए हैं। इनकी तबाही का कारण बने अवैध संबंध। इनमें कहीं अवैध संबंधों के चलते पत्नी ने पति की हत्या कर दी तो कहीं युवक ने अपनी प्रेमिका की। समाज में इस तरह के अपराध होते रहे हैं, लेकिन कुछ सालों में ऐसी घटनाओं में अचानक इजाफा हुआ है। अपराध विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी हत्याएं या अपराध सामाजिक अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे अपराधों को कानून रोक नहीं सकता। इन्हें केवल समाज ही रोक सकती है। आधुनिकता की मनमानी परिभाषा निकालने वाले समाज का एक तबका खुद भी तबाह हो रहा है और सामाजिक मूल्यों को भी खत्म कर रहा है।
छह माह में ही भर गया था पति से दिल
रेलवे स्टेशन के पास 20 अगस्त को बैग में एक युवती की लाश मिली थी। मंगलवारा पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की, तो मृतका की पहचान भिलाई निवासी सुनीता पांडे के रूप में हुई थी। जांच के दौरान पता चला कि वह इंदौर के एक काल सेंटर में काम करती थी। उसका साथ में काम करने वाले झाबुआ निवासी जिनेंद्र तिवारी से प्रेम प्रसंग था। दोनों ने 14 माह पहले मंदिर में शादी कर ली थी। लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन नहीं चल सका और छह माह बाद ही दोनों अलग हो गए। अति महत्वाकांक्षा, खुलापन और शारीरिक संबंधों को महत्व देना इस युवती के लिए जानलेवा साबित हुआ। युवती का दिल शादी के चंद दिन बाद ही पति के दोस्त पर आ गया और उससे भी शारीरिक संबंध बना लिए। सुनीता के जीवन में जिनेंद्र तिवारी का दोस्त योगेंद्र गुप्ता आ गया। उनके बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गए। सुनीता खुले विचारों की तेज तर्रार युवती थी। उसने योगेंद्र पर शादी के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया। बेरोजगार योगेंद्र शादी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। वह आनाकानी कर बात टाल देता था। इस बीच सुनीता गर्भवती हो गई। उसे चार माह का गर्भ था। उसने योगेंद्र को धमकी दी थी कि अगर जल्दी शादी नहीं की, तो वह उसे कहीं का नहीं छोड़ेगी। इससे वह परेशान होकर अपने गांव करैरा शिवपुरी चला गया। सुनीता भी अपने घर चली गई। उसने 15 अगस्त को फोन करके योगेंद्र को महेंद्रा फायनेंस कंपनी में नौकरी लगवाने के नाम पर भोपाल बुलवाया। वह 16 अगस्त को बस स्टैंड पर पंचवटी होटल में ठहर गया। उधर परिजनों को सुनीता यह कह कर भोपाल आ गई कि उसे पीएफ फंड निकालना है। वह 17 अगस्त की सुबह भोपाल आई। इसके बाद वह योगेंद्र को हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास महेंद्रा फायनेंस कंपनी में इंटरव्यू दिलाने भी ले गई। इसके बाद दोनों शहर में सैर सपाटा करते रहे। उन्होंने फिल्म भी देखी। 18 और 19 अगस्त की दरम्यानी रात योगेंद्र ने पंचवटी होटल में सोते समय रजाई से सुनीता का मुंह दबाकर हत्या कर दी। सुबह लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसे रेलवे स्टेशन से एक पिट्टू बैग खरीदा और उसमें शव रखकर आॅटो रिक्शा से हमीद मंजिल के खंडहर में ठिकाने लगा दिया। पुलिस ने आरोपी योगेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है।

मारकर तालाब में फेंका
 निशातपुरा थाने के नबीबाग में रहने वाले रामबाबू की लाश 29 नबम्बर 2010 को दामखेड़ा के सीवेज तालाब में खून से लथपथ मिली। पुलिस की जांच में सामने आया कि अवैध संबंधों के चलते रामबाबू की हत्या उसकी पत्नी ने प्रेमी महेंद्र मीना और रंजीत तोमर के साथ मिलकर कर दी और लाश को फेंक दिया था।

विरोध किया तो गला घोंटा
बैरसिया में रहने वाले तोरण सिंह की पत्नी के अवैध संबंध पड़ोस में रहने वाले प्रतिपाल सिंह से हो गए। तोरण सिंह को पता चला तो उसने विमला को समझाया, लेकिन विमला नहीं मानी। इसके बाद 15 नबम्वर 2009 को विमला ने प्रतिपाल सिंह की मदद से गलाघोंटकर तोरण सिंह की हत्या कर दी। इस मामले में विमला को आजीवन कारावास की सजा हुई है।

आजाद रहना चाहती थी पत्नी
विश्वकर्मा नगर में रहने वाले मांगीलाल की हत्या भी उसकी पत्नी ने की। मांगीलाल की पत्नी ममता गिरी के अवैध संबंध मांगीलाल के दोस्त जयप्रकाश से बन गए। मांगीलाल को अवैध संबंधों का पता नहीं था, लेकिन ममता गिरी ने मांगीलाल को रास्ते से हटाकर आजाद जिंदगी जीने का सपना देखा। ममता ने जयप्रकाश से फोन करवाकर मांगीलाल को बुलवाया और प्रेमी की मदद से गलारेत कर हत्या कर दी।

हवस ने करवाई हत्या
कोहेफिजा में रहने वाली रेखा का उसका पति राहुल बहुत चाहता था। रेखा के कहने पर ही राहुल भोपाल आया और सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा। लेकिन वासना की भूखी रेखा के राहुल के दोस्त अटल और सुरेंद्र सिंह से संबंध हो गए। रेखा ने 21 अप्रैल 2012 को अटल और सुरेंद्र के साथ मिलकर राहुल की हत्या कर दी।

कुल्हाड़ी से काटा
शिवनगर में रहने वाले देवीसिंह की 26 अप्रेल 2012 को कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि देवी सिंह की हत्या रजनी और उसके भाई गोकुल ने की है। पुलिस के अनुसार रजनी के संबंधों का पता देवीसिंह को चला तो रजनी ने देवी सिंह की हत्या कर दी।

बेटे के सामने पति को मारा
बैरसिया निवासी धनवीर की 4 अगस्त 2012 की रात अज्ञात हत्यारों ने हत्या कर दी। पुलिस ने मामले की जांच की तो सामने आया कि धनवीर की पत्नी बनारसी के सोनू सक्सेना नाम के युवक से अवैध संबंध हैं। इसके बाद धनवीर के बेटे ने बताया कि रात के समय सोनू और बनारसी ने मिलकर धनवीर को मौत के घाट उतार दिया। धनवीर को बनारसी के अवैध संबंधों की जानकारी नहीं थी, लेकिन बनारसी आजादी से सोनू सक्सेना के साथ रहना चाहती थी।

शराब मिलाकर कर दी हत्या
करोद के पीपल चौक पर रहने वाले आॅटो चालक की लाश पीपुल्स हास्पिटल भानपुरा पर मिली। पुलिस ने मामले की तफ्शीश की तो सामने आया कि अवैध संबंधों के चलते आटो चालक की पत्नी निधि ने ही अपने प्रेमी राजेश और भूपेंद्र के साथ मिलकर आटो चालक की हत्या की है। आरोपियों ने आटो चालक को शराब पिलाई और गलाघोंटकर हत्या कर दी।
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समाज में बदलाव आता है। लोग आधुनिक ख्यालों में जीना चाहते हैं, लेकिन आधुनिकता का मतलब ये कतई नहीं है कि सामाजिक मर्यादाओं को तोड़ा जाए। आधुनिक ख्यालों में समाज की उन्नति की बात होती है। हर वर्ग को समान अधिकार और महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात होती है। लेकिन कोई भी आधुनिक समाज अश्लीलता और अवैध संबंधों को बढ़ावा देने की वकालात नहीं करता। युवा पीढ़ि भटकती जा रही है। वो आधुनिकता और आजादी का मतलब हवस, वासना और मनमानी मान रही है। यही समाज को विपरीत दिशा में ले जाने के लिए जिम्मेदार है। खासकर अभिभावकों का सम्मान खत्म हो रहा है। लोग अपने बुजुर्गों की बात नहीं मानते और मनमर्जी से शारीरिक आकर्षण के चलते शादी कर लेते हैं। इसके बाद आकर्षण खत्म होता है तो इस तरह के अपराध होते हैं। इसमें सबसे चिंताजनक है मध्यमवर्ग और निम्न वर्ग में इस तरह के अपराधों की बढ़ोतरी। शिक्षा के अभाव और आर्थिक विषमताओं के कारण भी समाज में इस तरह के अपराध होते हैं। चैनलों पर भी हिंसक और समाज का लज्जित करने वाले धारावाहिक और फिल्में आ रही हैं। ये लोगों को सही रास्ता दिखाने की जगह भटकाने का काम कर रहीं हैं।
डॉ. आरके शर्मा, समाजशास्त्री