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शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

सात करोड़ जनता का श्रवणकुमार....हरि दर्शन कराएगा हमारा शिव



बुजुर्गों को तीर्थ कराने वाली दुनिया की पहली शिव सरकार

कोई रामेश्वरम जाएगा तो कोई अजमेर शरीफ

श्रवण कुमार की कहानियां सुनी थीं, लेकिन श्रवण कैसा था ये आज देखने को मिल गया। श्रवण ने तो केवल अपने माता-पिता को तीर्थ दर्शन करवाए थे लेकिन हमारे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने तो प्रदेश के हर घर के माता-पिता को तीर्थ दर्शन कराने का बीड़ा उठा लिया। ऐसी यात्रा जिसमें न तो जात-पात का भेदभाव है और न किसी आयवर्ग और मजहब का। चाहे अमीर हो या गरीब, सबके लिए मुख्यमंत्री तीर्थ कराने का संकल्प ले चुके हैं और उसे पूरा भी कर रहे हैं। पहली यात्रा 3 सितम्बर को जा रही है। बुजुर्ग इस यात्रा को लेकर उत्साहित हैं और बुजुर्गों के परिजन बेफिक्र होकर तीर्थ दर्शन को भेज रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने एक हजार बुजुर्गों की यात्रा की तैयारियों को लेकर एक पल भी चैन से नहीं बैठ रहे। बुजुर्गों की हर सुविधा के लिए बिंदुबार समीक्षा कर रहे हैं और हर अधिकारी को चेता दिया है कि हमारे बुजुर्गों को किसी तरह की तकलीफ न हो जाए। 

प्रमोद त्रिवेदी

प्रदेश के हर बुजुर्ग की आत्मा से बस केवल दुआएं ही निकल रही हैं। जो फर्ज हमारे सगे बेटे नहीं निभा पाते वो हमारा लाड़ला शिवराज सिंह निभा रहा है। शिवराज सरकार का एक ऐसा फैसला जो प्रदेश नहीं दुनिया के लिए मिसाल बन गया। दुनिया की पहली सरकार बन गई जिसने बुजुर्गों को सरकार के खर्च पर तीर्थ कराने की योजना बनाई और तत्काल अमलीजामा भी पहना दिया। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने तीर्थ-दर्शन पर जाने वाले प्रथम जत्थे की तैयारियों की बिन्दुवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि बुजुर्गों की सभी जरूरतों का ख्याल रखा जाय। सुनिश्चित किया जाए कि रास्ते में किसी को यात्रा संबंधी कोई कठिनाई नहीं आने पाए। मध्यप्रदेश सरकार की अनूठी पहल के जरिए 3 सितम्बर को प्रदेश के बुजुर्गों को ससम्मान रामेश्वरम तीर्थ-दर्शन के लिए रवाना किया जाएगा। मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में यह सिलसिला आगे निरंतर जारी रहेगा। शासकीय खर्चे पर हरि-दर्शन की लालसा पूरी करवाने वाला और सभी धर्म एवं मजहब के तीर्थों पर ले जाने वाला मध्यप्रदेश देश का ही नहीं पूरी दुनिया का पहला राज्य है। पहली तीर्थ-यात्रा की सभी तैयारियां पूरी हो गयी हैं।
धर्मस्व एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि तीर्थ-यात्रियों का पहला जत्था भोपाल के हबीबगंज स्टेशन से 3 सितम्बर को शाम 5.30 बजे रवाना होगा। इस अवसर पर तीर्थ-यात्रा में जाने वाले बुजुर्ग यात्रियों के सम्मान में दोपहर 3 बजे रेलवे स्टेशन प्रांगण में समारोह का आयोजन किया जाएगा। समारोह में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा अपनी प्रस्तुति देंगे। यात्री दल के साथ प्रदेश की पुलिस का एक चार का सुरक्षा बल, आवश्यक दवाओं सहित चिकित्सा दल, कैमरामेन, वीडियोग्राफर के साथ ही प्रत्येक बोगी में 69 तीर्थ-यात्री होंगे। तीर्थ-यात्रियों के साथ एक शासकीय और दो रेलवे कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं। इस रेल गाड़ी में 18 कोच होंगे जो सीधे भोपाल से रामेश्वरम् जाएगी। रामेश्वरम से वापिसी के मार्ग में बैतूल, इटारसी और होशंगाबाद स्टेशनों पर रेल गाड़ी रूकेगी।
सारी व्यवस्था सरकार के खर्च पर
रामेश्वरम की इस प्रथम यात्रा के बाद आगे जो भी तीर्थ-यात्रा हो उसमें तीर्थ-यात्रियों को रेल मार्ग पर पड़ने वाले प्रमुख दर्शनीय स्थलों में भी घुमाया जाएगा। इसके लिए मुख्य तीर्थ-स्थल के मार्ग में पड़ने वाले दर्शनीय-स्थलों का पहले से चयन कर लिया गया है और सारी व्यवस्थाएं पहले से कर दी गई हैं। 18 कोच वाली इस गाड़ी में 15 कोच स्लीपर के होंगे। वहीं 1 पेंट्री कार एवं दो एसएलआर कोच होंगे। ट्रेन में यात्रियों को सुबह की चाय, नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम की चाय और रात का खाना आईआरसीटीसी (प्रदेश सरकार से अधिकृत) की तरफ से दिया जाएगा। इसके लिए यात्रियों को कोई शुल्क अदा नहीं करना होगा। रामेश्वरम में होटल में ठहरने के दौरान बिस्तर और भोजन की व्यवस्था की गई है। यात्रियों को किसी भी स्थान पर कोई परेशानी ना हो इसके लिए प्रत्येक कोच में गाइड रहेंगे। एक हजार यात्रियों के आने-जाने की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि रामेश्वरम में एक हजार यात्रियों को एक ही होटल में ठहराना संभव नहीं होगा। इसके लिए अलग-अलग होटल की व्यवस्था है। होटल में यात्रियों के लिए नाश्ता, भोजन और बिस्तर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर घुमाने के लिए बस की व्यवस्था भी सरकार के निर्देश परआईआरसीटीसी ने की है।
अगली यात्रा अजमेर शरीफ
 मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना की दूसरी यात्रा के लिए ट्रेन 13 सितंबर को अजमेर शरीफ के लिए रवाना होगी। जिसमें यात्रा में भोपाल, होशंगाबाद और उज्जैन संभाग के 977 वृद्धजन शामिल होंगे। अजमेर शरीफ यात्रा के लिए आवेदन 3 सितम्बर तक लिए जाएंगे। आवेदन निकटतम तहसील,उप तहसील अथवा कलेक्टर द्वारा निर्धारित अन्य स्थानों पर जमा किए जा सकते हैं। अजमेर शरीफ की तीर्थ-यात्रा में जिला राजगढ़ से 48, विदिशा से 71, भोपाल से 244, सीहोर से 63, रायसेन से 58, बैतूल से 18, हरदा से 16, होशंगाबाद से 25, उज्जैन से 110, शाजापुर से 81, देवास से 78, रतलाम से 72, मंदसौर से 61 और नीमच से 32 यात्री शामिल होंगे।

सोमवार, 20 अगस्त 2012

पूर्वजों की यादों की तरह सहेंजेगे पुरातन स्मारकें- लक्ष्मीकांत शर्मा





  • पुरातन स्मारकें हमारे पूर्वजों की धरोहर की तरह होती हैं। हम इन्हें सहेजने और संरक्षित करने के लिए वचनवद्ध हैं। इस काम में न तो कोताही बरती जाएगी और न ही धन- संसाधनों की कमी आने दी जाएगी। मध्यप्रदेश के पुरातात्विक स्मारकों के संरक्षण के लिए 13 वें वित्त आयोग द्वारा 175 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से प्रदेश के पुरातात्विक स्मारकों एवं धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाएगा। संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने यह बात स्वराज भवन में  'The Grandeur of Granite Shiva-Yogini Temples of Vyas Bhadora'' पुस्तक के विमोचन अवसर पर कही। लेखक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अशोक शाह हैं।                                                                           


प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल

संस्कृति मंत्री ने कहा कि व्यास भदौरा और आशापुरी मंदिर समूह को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि व्यास भदौरा और आशापुरी में मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है। उन मंदिरों के अतिरिक्त अन्य स्मारकों के विकास के लिए डीपीआर ौयार करवाया गया है। श्री शर्मा ने श्री अशोक शाह के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग हमेशा उनका सहयोग लेता रहेगा। श्री शर्मा ने कहा कि व्यास भदौरा के मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता, उनका ग्रेनाइट पत्थरों से निर्माण है।

पुस्तक के लेखक श्री अशोक शाह ने बताया कि ग्राम व्यास भदौरा छतरपुर जिले की चन्दला उप-तहसील में स्थित है। राज्य शासन द्वारा यहाँ के 13 मंदिर समूह में से दो मंदिर को वर्ष 1990 में राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। यहाँ के जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का पुनरूद्धार किया जा रहा है। मंदिरों के शिल्प को देखने के बाद यह ज्ञात हुआ है कि व्यास भदौरा के मंदिर खजुराहो में निर्मित मंदिरों के पूर्व बनाए गये थे। ऊँची जगती पर बने मंदिर क्रमांक एक और दो पूर्वाभिमुख होते हुए शिव को समर्पित है। संभवत: यह पहला मंदिर समूह होगा जो तीन तरफ सोपान योजना से युक्त है। कठोर ग्रेनाईट पत्थरों से निर्मित इन मंदिरों को बनवाने में अधिक श्रम लगा होगा, यही कारण है कि बाद में चन्देलों ने ग्रेनाईट के पत्थरों से मंदिर नहीं बनवाया। संभवत: व्यास भदौरा के मंदिर समूह चन्देलों के मूर्ति एवं मंदिर निर्माण के शिल्प की कहानी के प्रथम सोपान हैं।

पुस्तक में चार अध्याय हैं, जिनमें भूमिका, ऐतिहासिक जानकारी मंदिर स्थापत्य के विकास की गाथा तथा कला एवं प्रतिमा विज्ञान के बारे में सारगर्भित जानकारी उपलब्ध है। पुस्तक में 71 बहुरंगी छायाचित्र भी हैं। कार्यक्रम में संचालक खेल एवं युवा कल्याण डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव और संचालक संस्कृति श्रीराम तिवारी भी उपस्थित थे।