शनिवार, 15 सितंबर 2012

एफडीआई से किसानों की बल्ले-बल्ले



प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल। भले ही एफडीआई के नाम का तूफान मचा रखा हो, लेकिन हकीकतन एफडीआई देश की तरक्की के लिए मील का पत्थर साबित होगा। खासकर देश के किसानों को बिचौलिए से मुक्ति मिलेगी और उसे उपज का पूरा दाम मिलेगा। वहीं 30 प्रतिशत घरेलू उत्पाद खरीदने की शर्त पर घरेलू उत्पादकों को भी अच्छा खासा लाभ होगा। लेकिन विपक्ष ने अपना काम किया और सरकार की हर नीति की तरह इसका विरोध किया। तृणमूल हमेशा की तरह विरोध करके सरकार को ब्लैकमेल का प्रयास कर रही है, लेकिन सरकार को मुलायम, माया से गुप्त समर्थन मिल चुका है। इसलिए किसी भी हायतौबा से कुछ नहीं होना। शेयर मार्केट की तेजी से जाहिर है कि सरकार हर हाल में स्थिर है। सूत्र बताते हैं कि विदेशी गुप्तचर एजेंसी भी सरकार की स्थिरता पर रिसर्च करके अपने देशों को खबर कर चुकी हैं। भाजपा शासित राज्यों में सांप छछूंदर की स्थिति है। वो एफडीआई को प्रदेश में नहीं आने देंगे तो विकास रुकेगा और आने देंगे तो विरोध करने की दोगुली नीति उजागर होगी।                                                                                                                                          सरकार ने सीसीईए की बैठक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर दो अहम फैसले लिए हैं। एक फैसले में सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी निवेश को मंजूरी दे दी है। हालांकि, केंद्र सरकार ने किराने में विदेशी निवेश को लेकर राज्य सरकार को छूट भी दी है। राज्य सरकार अपने यहां आउटलेट खोलने की इजाजत देने में स्वतंत्र होंगे। वहीं, देसी एयरलाइंस में विदेशी एयरलाइंस के निवेश को भी सरकार ने हरी झंडी दिखा दी है। हालांकि, सरकार के इन फैसलों का तृणमूल पार्टी विरोध कर रही है।

सीसीईए बैठक में लिये गए फैसले में सरकार ने 5 कंपनियों को देशी एयरलाइंस में निवेश की इजाजत दी है। दिलचस्प है कि किसी एक देश की कंपनी द्वारा दूसरे देश में किये जाने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को एफडीआई कहा जाता है। ऐसे में निवेश में निवेशक को दूसरे देश की कंपनी के मैनेजमेंट में कुछ हिस्सा मिल जाता है। हालांकि, यह हिस्सा 51 फीसदी से कम होता है। आमतौर पर किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए निवेशक को कंपनी में न्यूनतम 10 फीसदी शेयर खरीदने पड़ते हैं।

केंद्र सरकार के इस फैसला के तृणमूल कांग्रेस ने तीखा विरोध किया है। पार्टी के नेता कुणाल घोष ने कहा कि हमारी पार्टी और ममता बनर्जी इस फैसले का पुरजोर विरोध करती हैं। कुणाल ने कहा कि हमारे पास संसद में इतनी संख्या नहीं है कि हम फैसलों को रोक सकें लेकिन हमें खुलकर इसका विरोध तो कर ही सकते हैं। कांग्रेस के पास संख्याबल है और यूपीए में उन्हीं की चलती है। कुणाल घोष ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ऐसी किसी भी पॉलिसी को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं करेगी।

विदेशी निवेश को किस तरह लागू किया जाना है यह राज्य सरकारें तय करेंगी। आर्थिक सुधारों के नाम पर लिए गए केंद्र सरकार के इस फैसले की बीजेपी और सीपीआई ने तीखी आचोलना की है। विपक्ष ने कहा है कि यूपीए अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए गलत फैसले ले रही है।

आम आदमी को होगा ये फायदा


  • देश के कई राज्य एफडीआई के खिलाफ हैं। वहीं, कई संगठन भी इसका विरोध जता रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच आम आदमी को जहां इससे कुछ नुकसान होने के साथ-साथ फायदा भी मिलेगा। इन फायदों में-
  • एफडीआई से अगले तीन साल में रिटेल सेक्टर में एक करोड़ नई नौकरियां मिलेंगी।
  • किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और अपने सामान की सही कीमत भी। कंस्यूमर तक जो चीज 20 रुपये में पहुंचती है, उसकी कीमत उसे पैदा करने वाले किसान को महज 4 रुपये मिल पाती है। बाकी का पैसा आढ़ती और बिचौलियों के पेट में जाता है। अब कंपनियां सीधे किसानों से चीजें खरीदेंगी, जिससे किसानों का फायदा बढ़ेगा और बिचौलियों द्वारा किया जाने वाला शोषण कम होगा। 
  • विदेशी कंपनियां द्वारा सप्लाई चेन सुधारने से खाद्य सामग्री का खराब होना रुकेगा।।
  • सामान कम खराब होने से खाद्य महंगाई सुधरेगी। 
  • विदेशी कंपनियों को न्यूनतम 30 फीसदी सामान घरेलू बाजार से ही लेना होगा। इससे देश में  लोगों की आय बढ़ेगी। इससे औद्योगिक विकास दर भी सुधरेगी।
  • देश की बड़ी कंपनियों को पहले ही रिटेल में आने की इजाजत है। चीन हो या फिर इंडोनेशिया जहां भी रिटेल में एफडीआई को मंजूरी दी गई वहां एग्रो-प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के दिन फिर गए।


शनिवार, 8 सितंबर 2012

सेक्सी ठग कोमल है दो बच्चों की मां....



खुद के बच्चों को डॉक्टर नहीं बना सकी ठग कोमल

अपराध संवाददाता, भोपाल। पूरे देश के लोगों को मेडीकल में एडमीशन दिलाने के लिए दलाली और ठगी करने वाली पूनम खुद के बच्चों को डॉक्टर नहीं बना सकी। कोमल की फितरतों की वजह से वो बच्चों पर ध्यान नहीं दे सकी और वो पढ़ने-लिखने में फिसड्डी हो गए। लिहाजा कोमल ने एक बेटे को एमबीए और दूसरे का बीबीए में एडमीशन करवा दिया। कोमल के दोनों बेटे इंदौर में पढ़ते हैं।

रिमांड के दौरान पूछताछ में भोपाल पुलिस ने कोमल के कई राज पर से पर्दा उठाया। कोमल का जन्म 1970 में सफदरगंज दिल्ली में हुआ। उसके पिता एसके सलवान सेना के रिटायर्ड अफसर हैं। कोमल का छोटा भाई बाबी सलवान फ्रांस में टाटा कंपनी का जोनल सेल्समेन है। उसकी ससुराल भोपाल की गुलमोहर कॉलोनी में है। कोमल की पढ़ाई भोपाल में हुई। उसकी शादी जबलपुर के पंकज पांडे से हुई। कोमल के दो बेटे है। बड़ा अभिनव इंदौर से एमबीए कर रहा है, जबकि छोटा शांतनु बीबीए का छात्र है। कोमल ने 1990 से लेकर वर्ष 2000 तक एनजीओ में काम किया। इसके बाद वह सतना में रहने लगी। इस दौरान वह रेडक्रास में काम करती थी। इसके बाद कोमल 2003 में जबलपुर आ गई, लेकिन वह 2006 से भोपाल समेत कई शहरों के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के गोरखधंधे में लिप्त हो गई। मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीट का सौदा एक से लेकर डेढ़ करोड़ रुपए में किया जाता है। यह भारी-भरकम रकम कॉलेज प्रबंधन अपने दलालों के माध्यम से छात्रों से वसूलते हैं। इस गोरखधंधे में कॉलेज के कर्मचारियों की भी मिलीभगत होती है। यह सिंडिकेट ऐसे छात्रों की तलाश करता है, जो मोटी रकम देकर पीजी करना चाहते हैं। सारा लेन-देन नकद में होता है। निशातपुरा पुलिस के रिमांड पर चल रही कोमल के साथी जावेद की पुलिस को तलाश है। उसकी खोजबीन में पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। कोमल की रिमांड अवधि शनिवार को समाप्त हो रही है। इस बीच कोमल से पिपरिया समेत कुछ स्थानों की पुलिस पूछताछ कर चुकी है। कोमल को पांच सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, जिसका आज रिमांड खत्म होने पर अदालत में पेश किया गया।
00सारे कॉलेजों में कोमल की धाक 
एसपी अरविंद सक्सेना ने बताया कि कोमल पांडे से की जा रही पूछताछ में उसने बताया कि वह कोई दो दर्जन छात्र-छात्राओं को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिला चुकी हैं। एसपी ने कहा कि कोमल का दावा है कि उसका नेटवर्क चिरायु, पीपुल्स व इंदौर के श्री अरविंदो और उज्जैन के आडीर्गार्डी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में है। अति महत्वाकांक्षी व आत्म विश्वास से लबरेज कोमल पांडे के कई बैंकों में खाते हैं। फिलहाल केनरा, आईडीबीआई, यूको, भोपाल को-आपरेटिव व इंडसुइंड समेत सात बैंकों में उसके खातों की जानकारी मिली है। खुद को भारतीय विप्र समाज की महिला इकाई की प्रदेशाध्यक्ष बताने वाली कोमल पांडे बहुजन समाज पार्टी में भी पदाधिकारी रह चुकी है। उसने बताया कि बसपा में उसका इतना दखल था कि अगर उसके पास पर्याप्त धनराशि होती, तो विधानसभा चुनाव में वह संजीव सक्सेना को बीएसपी से टिकट नहीं लेने देते, बल्कि खुद चुनाव लड़ती। किंतु पैसों की कमी ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया था, इस कारण उसने कमाई का शार्टकट रास्ता अपना लिया। इस कमाई से कोमल ने घर की खूब शान-शौकत ब़ढ़ाई। उसके पास दो नैनों व एक मारुति तथा एक फोर्ड कंपनी की आइकान कार है। कोमल का कहना है कि उसे एक नैनो कार कोलार रोड स्थित स्वर्ण सुख ज्वेलर्स की दुकान से इनाम में मिली है।
00खुद को डॉक्टर बताती थी कोमल
कोमल बेहद शातिर दिमाग की औरत है। उसने पैथालॉजी का डिप्लोमा किया है। इसके बाद नाम के आगे डाक्टर लिखना शुरू कर दिया। उसने कई जगह पर खुद का नाम डॉ. शुभ्रा भी बताया था। कोमल ने मुरैना, सतना, पिपरिया समेत कई शहरों में अपनी पैठ बना ली थी। वह डॉक्टर के रूप में मिलती थी। इस कारण उसकी बातों पर एडमिशन कराने वालों को सहज भरोसा हो जाता था। कोमल ने बताया कि वह मेडिकल पीजी सीट के लिए 1 करोड़ 40 लाख रुपए तक वसूल चुकी है। ऐसी रकम कॉलेज के अलावा एडमिशन रैकेट चलाने वालों के बीच में बंट जाती है।


गुरुवार, 6 सितंबर 2012

रईसों को इंदौर का आरामदायक सफर कराएगी वाल्वो


भोपाल। इंदौर-भोपाल के बीच वॉल्वो बस के टिकट सिर्फ आॅनलाइन ही बुक किए जा सकेंगे। इस रूट पर शुरूआत में चार बसें चलेंगी जिनमें से दो बुधवार को इंदौर पहुंच गई। माना जा रहा है कि जल्द ही इनको चलाने की तारीख तय कर दी जाएगी।

बस का संचालन अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) ही करेगा। एक बस में 53 यात्री बैठ सकेंगे और प्रति यात्री किराया लगभग 350 रुपए रहेगा। इंदौर से भोपाल की दूरी यह लगभग 3.30 घंटे में तय करेगी। एआईसीटीएसएल के सीईओ चंद्रमौलि शुक्ला ने बताया बसों के परमिट की प्रक्रिया चल रही है जो इस हफ्ते पूरी हो जाएगी। बची दो बसें एक-दो दिन में आ जाएंगी। इसके बाद लोकार्पण का कार्यक्रम तय कर बसें शुरू कर देंगे। फिलहाल टाइम-टेबल तय नहीं हुआ है।

मनचाही सीट ले सकेंगे

www.charteredbus.in वेबसाइट पर यात्री अपनी मनचाही सीट बुक करा सकेंगे। > इंदौर से यह बस सिटी बस आॅफिस से शिवाजी प्रतिमा-बायपास लिंक रोड होते हुए रिंगरोड के रेडिसन चौराहा, एमआर-10 व बायपास होते हुए भोपाल जाएगी।

- भोपाल में यह बस लालघाटी और जवाहर चौक होते हुए हबीबगंज स्थित इंटरस्टेट बस टर्मिनस तक चलेगी।

ताकतवर इंजन, सुपर लक्जरी सीट

  • - इस आधुनिक बस में 340 बीएचपी का ताकतवर इंजन लगा है जो बस के एसी को भी प्रभावी बनाता है। 
  • > 1.10 करोड़ रुपए प्रति बस की कीमत वाले इस वाहन में मल्टी-एक्सल लगा है जिससे गड्ढों पर चलने के दौरान यात्री को दचके नहीं लगते।

सेक्स और धन के मिश्रण से कोमल बनना चाहती थी नेता


हर फितरत में माहिर थी कोमल

कोमल पाण्डे
 भोपाल। मेडीकल कॉलेज में दाखिला हो या किसी की नौकरी लगना हो, कोमल पांडे हर काम को चुटकियों में करवाने में माहिर थी। ग्राहक को जाल में फंसाने मेकअप में लिपटे चेहरे से ऐसी कातिल मुस्कान फेंकती थी कि लोग उसके विश्वास के दीवाने हो जाते थे। लोगों को ठगने के लिए अलग-अलग नाम और पद का इस्तेमाल बड़ी आसानी से करती थी। उम्र के ढलान पर वो एक बड़ा चुनाव लड़ने के लिए रुपयों का इंतजाम कर रही थी। इन रुपयों के इंतजाम के लिए उसे जो मिला उसे ही ठग लिया। पुलिस की पूछताछ में कोमल पांडे के कई राज उजागर होते जा रहे हैं। राजधानी के अलावा सतना, पिपरिया, जबलपुर सहित करीबन आधा दर्जन जिलों की पुलिस को कोमल की तलाश थी।
मेडीकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर कई छात्रों को लाखों की चपत लगाने वाली कोमल पांडे को पिपरिया पुलिस ने बुधवार को अपनी हिरासत में लिया। हालांकि अभी वह निशातपुरा पुलिस की रिमांड पर है। उसे पिपरिया पुलिस भी रिमांड पर लेने की कार्रवाई कर रही है। इसके बाद दूसरे जिलों की पुलिस भी रिमांड पर लेकर कोमल से ठगी के राज उगलवाएगी। कोमल पांडे के खिलाफ मुरैना, सतना में भी धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए हैं। महिला इतनी शातिर है कि उसने महापौर का चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस कमेटी को पत्र लिखा था। नेतागिरी की आड़ में वह कई लोगों को झांसा दे चुकी है। निशातपुरा थाना प्रभारी एके वाजपेयी ने बताया कि पिपरिया पुलिस ने बुधवार को कोमल पांडे को हिरासत में ले लिया है। पुलिस उसे अदालत से रिमांड पर लेने की कार्रवाई भी कर रही है। इसके अलावा महिला के खिलाफ मुरैना व सतना में भी धोखाधड़ी करने के मामले उजागर हुए हैं। कोमल ने वहां के छात्रों को भी एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर लाखों रुपए की चपत लगाई है। लक्जरी गाड़ियों में सफर करने व शान शौकत से रहने वाली कोमल पांडे के सहयोगियों की तलाश में पुलिस की दो टीमें लगाई हैं। इनमें से एक टीम ग्वालियर के लिए रवाना हो गई है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी महिला ने सतना के डीसी पटेल नामक व्यक्ति से उनके बेटे का एडमीशन कराने के लिए साढ़े 5 लाख रुपए लिए थे। लेकिन जब काम नहीं हुआ, तो उन्हें दो चेक थमा दिए गए थे। किंतु दोनों चेक वाउंस हो गए थे। इस मामले में फरियादी ने अदालत की शरण ली। न्यायालय में भी कोमल के खिलाफ एक धोखाधड़ी का मामला चल रहा है। किंतु उसका पता सही नहीं होने के कारण नोटिस सर्व नहीं हो पाया था। अब सतना व मुरैना पुलिस भी कोमल से पूछताछ करने जल्दी भोपाल आने वाली है।

सोमवार, 3 सितंबर 2012

ये है ओसामा की मौत की हकीकत...नेवी सील कमांडो का खुलासा...



विशेष संवाददाता, भोपाल।
अमेरिका लाख कहे कि ओसामा मुठभेड़ में मारा गया। जबकि हकीकत ये है कि नेवी सील कमांडो ने जो सामने आया उसे भून दिया। बिना संघर्ष के ही कुख्यात कट्टर आतंकवादी कुत्ते की मौत मारा गया। नेवी सील कमांडो मार्क बाइसोनेट की किताब से अलकायदा सरगना के खात्मे की पूरी कहानी सामने आ गई है। 'नो ईजी डे : द फर्स्ट हैंड अकाउंट आॅफ द मिशन दैट किल्ड ओसामा बिन लादेन' नाम की इस किताब को बाइसोनेट ने मार्क ओवन के नाम से लिखा है। यह किताब 4 सितंबर को लांच होगी, लेकिन आॅपरेशन जेरोनिमो की पूरी कहानी मीडिया में आ चुकी है, तो आइए जानें बाइसोनेट की जुबानी 'आॅपरेशन ओसामा' की कहानी..

अफगानिस्तान के जलालाबाद सैन्य ठिकाने से 24 नेवी सील कमांडो 1 मई 2011 की रात दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों में सवार होकर पाकिस्तान के एबटाबाद की ओर बढ़े। कमांडोज को तीन टीमों में बांटा गया था। हमें मालूम था कि 'वजीरिस्तान हवेली' में लादेन के अलावा उसका बेटा खालिद, संदेशवाहक अहमद अल कुवैती और कुवैती का भाई अबरार भी होंगे। एबटाबाद पहुंचते ही एक ब्लैक हॉक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। खुशकिस्मती से उसमें सवार कमांडोज सुरक्षित थे। दूसरे हेलीकॉप्टर में सवार सभी कमांडोज हवेली की छत पर उतर चुके थे। हमारे पास 'आॅपरेशन जेरानिमो' को अंजाम देने के लिए 30 मिनट थे। मैं और मेरी टीम परिसर में मौजूद गेस्ट हाउस की ओर बढ़ी। हमें बताया गया था कि लादेन का संदेश वाहक अहमद अल कुवैती परिवार के साथ यहीं पर रहता है। इसके बाद कमांडो ने दरवाजे के ऊपर बनी खिड़की को निशाना बनाकर पहला राउंड फायर किया। एक साथी ने अरबी में कुवैती से बाहर आने को कहा। कुछ देर बाद दरवाजा खुला और महिला बाहर आई। उसके हाथों में कुछ था, हमें लगा कि वह बम है, लेकिन उसकी गोद में नवजात था। वह कुवैती की पत्नी मरियम थी। उसके पीछे तीन बच्चे खड़े थे। उसने बताया कि कुवैती मर चुका है, लेकिन मैंने बेडरूम के दरवाजे पर हलचल देखी और कुवैती पर कई गोलियां दागीं। गेस्ट हाउस सुरक्षित करने के बाद टीम परिसर के मुख्य हिस्से की ओर बढ़ी। टीम का नेतृत्व करने वाले 'प्वाइंट मैन' ने खिड़की से किसी को झांकते देखा। उसने बिना देर किए उसे गोली मारी, वह अबरार था। उसकी पत्नी बुशरा उसे बचाने में मारी गई। अब परिसर का 'फर्स्ट लेवल' सुरक्षित था।

सेकेंड लेवल में खालिद और थर्ड में लादेन को उड़ाया

कमाडोज ने कुछ देर में 'सेकेंड लेवल' में घुसने के लिए एक गेट उड़ा दिया। जब मैं सेकेंड लेवल पर पहुंचा तो देखा एक बॉडी लटकी है। वह लादेन का बेटा खालिद था। इसके बाद टीम 'थर्ड लेवल' यानी तीसरी मंजिल की ओर बढ़ी। मैं सीढ़ियों पर था तभी गोली चलने की आवाज सुनाई दी। प्वांइट मैन ने बताया कि खिड़की से कोई झांक रहा था, इसलिए उसने गोली चलाई, लेकिन उसे नहीं पता था गोली लगी या नहीं? वह आदमी एक कमरे की ओर भागा। कुछ देर रुककर हम कमरे की ओर बढ़े और देखा कि दो महिलाएं एक आदमी से लिपटकर रो रही थीं। मैंने और एक अन्य कमांडो ने उसके सीने पर कई राउंड फायर किए। मैंने उसका खून से सना चेहरा साफ किया और कुछ फोटो खींचे। पहचान के लिए हमने वहां मौजूद एक लड़की से पूछा यह कौन है? उसने जवाब दिया ओसामा बिन लादेन।

शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

50 रुपए में 8 लाख का इलाज.... मध्यप्रदेश स्थापना दिवस से पुलिसकर्मियों को मिलेगी सौगात


प्रमोद त्रिवेदी


भोपाल। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 2012 से पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों का प्रदेश सहित देश के बड़े अस्पतालों में किसी भी गंभीर बीमारी पर मुफ्त में इलाज हो सकेगा। इसके लिए प्रत्येक पुलिसकर्मी के वेतन से 50 रुपए मासिक काटे जाएंगें। यानि साल में 600 रुपए कटवाने पर एक साल में 8 लाख तक इलाज मिल सकेगा। इस योजना से सभी पुलिसकर्मियों को लाभ मिलेगा। खासकर सिपाही से लेकर एएसआई स्तर तक के कम वेतन वाले पुलिसकर्मियों के लिए ये योजना जीवनदायिनी साबित होगी।
प्रदेश के पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों का समय पर इलाज कराने और मेडिकल रिएम्बर्समेंट की परेशानियों से निजात दिलाने के मकसद से कर्नाटक और आंध्रप्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू की जाएगी। गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने योजना का प्रारूप शीघ्र बनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए प्रस्तावित योजना उनका मनोबल ब़ढ़ाने में सहायक होगी। गृहमंत्री ने कहा कि सभी प्रक्रियाएँ समय पर पूरी करें, जिससे एक नवम्बर से मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर योजना प्रारंभ की जा सके। योजना के क्रियान्वयन के लिए एक ट्रस्ट गठित किया जाएगा। ट्रस्ट की प्रबंध समिति के अध्यक्ष पुलिस महानिदेशक होंगे। समिति में एक उपाध्यक्ष, सचिव और 12 सदस्य होंगे।अंशदानयोजना में प्रत्येक पुलिस कर्मचारी को 50 रुपए प्रतिमाह अंशदान देना होगा। प्रदेश पुलिस में लगभग 80 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। योजना में प्रत्येक सदस्य, उसकी पत्नी और बच्चों को एक वित्तीय वर्ष में 8 लाख रुपए तक के इलाज की पात्रता रहेगी। शासन के नियमानुसार चिकित्सा प्रतिपूर्ति शासन सीधे ट्रस्ट को करेगी। प्रदेश के भीतर 30  तथा बाहर के 31 अस्पतालों में उनका इलाज हो सकेगा।

प्रदेश के बड़े अस्पताल
 इंदौर का बाम्बे हॉस्पिटल, सिनर्जी हॉस्पिटल एवं हार्डिया नेत्र चिकित्सालय, भोपाल का चिरायु, पीपुल्स, भोपाल मेमोरियल, जवाहर लाल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, जबलपुर का भण्डारी, जामदार, जबलपुर हॉस्पिटल, नेशनल हॉस्पिटल, ग्वालियर का सहारा हॉस्पिटल, बि़ड़ला हॉस्पिटल एवं कैंसर हॉस्पिटल, उज्जैन का आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज एवं बिरला हॉस्पिटल और एपेक्स हॉस्पिटल देवास, सीएचएल जैन दिवाकर हॉस्पिटल रतलाम, शारदा हॉस्पिटल खरगोन, कमला जैन हॉस्पिटल मंदसौर, गोमाबाई हॉस्पिटल नीमच, प्रकाश हॉस्पिटल खण्डवा, अरिहंत हॉस्पिटल इटारसी, नाहर नर्सिंग होम छिन्दवा़ड़ा, मिशन हॉस्पिटल पाढर बैतूल और बिरला हॉस्पिटल सतना शामिल हैं।

देश के नामचीन अस्पताल
नई दिल्ली के एम्स, जेपी पंत, एस्कार्ट एवं अपोलो, मुम्बई का जसलोक, टाटा मेमोरियल, नानावटी, बाम्बे एवं लीलावती, चेन्नाई का अपोलो, पनाडालिया कार्डियो फाउण्डेशन एवं शंकर नेत्रालय, हैदराबाद का निजाम इंस्टीट्यूट, मेडिसिन केयर एशियन इंस्टीट्यूट, लखनऊ का पीजीआई, हैदराबाद का अपोलो, ब़ड़ौदा का भाईलाल अमीन, अहमदाबाद का साल, गुड़गांव का मेदान्ता, जयपुर का महावीर और नागपुर का अनरेजा हॉस्पिटल, योकार्ड, अरिज, महात्मा आई, फरीदाबाद का फोर्टिस, मदुरई का अरविंद आई केयर और बैंगलुरू का जिमहेंस, नारायण एवं कोलम्बिया हॉस्पिटल शामिल है।

करीबन 5 करोड़ तो पुलिसकर्मियों से हो जाएगा इकट्ठा
पुलिसकर्मियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में हर साल प्रत्येक पुलिसकर्मी से 600 रुपए साल के मान से प्रदश्ो के 80 हजार पुलिसकर्मियों से 4 करोड़ 80 लाख रुपए इकट्ठा हो जाएगा। इस राशि का ब्याज मिलकर पुलिस विभाग के पास तकरीबन 6 करोड़ रुपए इकट्ठा हो जाएगा। प्रत्येक पुलिसकर्मी को एक वित्तीय वर्ष में 8 लाख रुपए के इलाज तक की पात्रता रहेगी। ऐसे में पुलिसकर्मियों को मिलने वाले मेडीकल क्लेम में कटौती होगी। इससे पुलिस विभाग को रुपए की बचत होगी और जो पुलिसकर्मियों से राशि इकत्रित होगी उसी से सालाना इलाज हो सकेगा। पुलिस विभाग एक बीमा कम्पनी से भी इस बारे में बात कर रही है। ऐसे में अंशदान, बीमाकम्पनी को देकर पुलिस विभाग वेफिक्र हो जाएगा। अंशदान की राशि से ज्यादा का इलाज होने पर बीमा कम्पनी भुगतान करेगी और इलाज कम को होगा तो बीमा कम्पनी को लाभ मिलेगा। बीमा कम्पनी इस रुपए को इन्वेस्ट करके अन्य स्त्रोतों से कमाई भी कर सकेगी।

एक बेवफा, वफा चाहती थी, मिली मौत




भिलाई की सुनीता अपनी मर्जी से जीने वाली आधुनिक ख्याल युवती थी। खुद को आधुनिक और आजाद ख्याल मानने वाली सुनीता ने पढ़ाई के बाद कॉल सेंटर में नौकरी शुरु कर दी और जिनेंद्र से प्यार करते हुए अपनी मर्जी से शादी भी कर ली। लेकिन आजाद ख्याली के चलते शादी के महज 6 माह के भीतर ही उसका दिल पति के दोस्त योगेंद्र पर आ गया और पति को छोड़ योगेंद्र के साथ रातें गुजारने लगी। अवैध संबंधों के चलते सुनीता गर्भवती हुई तो योगेंद्र पर शादी के लिए दबाव बनाया, लेकिन योगेंद्र ने साफ इंकार दिया। योगेंद्र पर ज्यादा दबाव डाला तो योगेंद्र ने सुनीता की हत्या कर दी। ये हकीकत है पिछले हफ्ते भोपाल स्टेशन के पास मृत मिली सुनीता की। ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं जहां प्यार, आधुनिकता और आजाद ख्यालों के नाम पर अवैध संबंध पनपते हैं और उनका परिणाम हत्या जैसे जघन्य अपराध होता है। समाजशास्त्री इसका कारण वासनात्मक प्रवृत्ति और सामाजिक वर्जनाओं का तार-तार होना मानते हैं। हाईप्रोफाइल ही नहीं मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों में भौतिक चकाचौंध में संबंधों के महत्व को खत्म कर दिया है।

प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल


पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का कहा जाता है, लेकिन अब सात फेरों का महत्व और आपसी विश्वास की जगह वासनात्मक प्रवृति ने ले ली है। हाईप्रोफाइल में रिश्तों के महत्व को कमतर आंकने की बात सामने आई, लेकिन करीबन एक दर्जन घटनाएं ऐसी हैं जिनमें मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवार तबाह हुए हैं। इनकी तबाही का कारण बने अवैध संबंध। इनमें कहीं अवैध संबंधों के चलते पत्नी ने पति की हत्या कर दी तो कहीं युवक ने अपनी प्रेमिका की। समाज में इस तरह के अपराध होते रहे हैं, लेकिन कुछ सालों में ऐसी घटनाओं में अचानक इजाफा हुआ है। अपराध विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी हत्याएं या अपराध सामाजिक अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे अपराधों को कानून रोक नहीं सकता। इन्हें केवल समाज ही रोक सकती है। आधुनिकता की मनमानी परिभाषा निकालने वाले समाज का एक तबका खुद भी तबाह हो रहा है और सामाजिक मूल्यों को भी खत्म कर रहा है।
छह माह में ही भर गया था पति से दिल
रेलवे स्टेशन के पास 20 अगस्त को बैग में एक युवती की लाश मिली थी। मंगलवारा पुलिस ने हत्या का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की, तो मृतका की पहचान भिलाई निवासी सुनीता पांडे के रूप में हुई थी। जांच के दौरान पता चला कि वह इंदौर के एक काल सेंटर में काम करती थी। उसका साथ में काम करने वाले झाबुआ निवासी जिनेंद्र तिवारी से प्रेम प्रसंग था। दोनों ने 14 माह पहले मंदिर में शादी कर ली थी। लेकिन यह संबंध ज्यादा दिन नहीं चल सका और छह माह बाद ही दोनों अलग हो गए। अति महत्वाकांक्षा, खुलापन और शारीरिक संबंधों को महत्व देना इस युवती के लिए जानलेवा साबित हुआ। युवती का दिल शादी के चंद दिन बाद ही पति के दोस्त पर आ गया और उससे भी शारीरिक संबंध बना लिए। सुनीता के जीवन में जिनेंद्र तिवारी का दोस्त योगेंद्र गुप्ता आ गया। उनके बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गए। सुनीता खुले विचारों की तेज तर्रार युवती थी। उसने योगेंद्र पर शादी के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया। बेरोजगार योगेंद्र शादी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। वह आनाकानी कर बात टाल देता था। इस बीच सुनीता गर्भवती हो गई। उसे चार माह का गर्भ था। उसने योगेंद्र को धमकी दी थी कि अगर जल्दी शादी नहीं की, तो वह उसे कहीं का नहीं छोड़ेगी। इससे वह परेशान होकर अपने गांव करैरा शिवपुरी चला गया। सुनीता भी अपने घर चली गई। उसने 15 अगस्त को फोन करके योगेंद्र को महेंद्रा फायनेंस कंपनी में नौकरी लगवाने के नाम पर भोपाल बुलवाया। वह 16 अगस्त को बस स्टैंड पर पंचवटी होटल में ठहर गया। उधर परिजनों को सुनीता यह कह कर भोपाल आ गई कि उसे पीएफ फंड निकालना है। वह 17 अगस्त की सुबह भोपाल आई। इसके बाद वह योगेंद्र को हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास महेंद्रा फायनेंस कंपनी में इंटरव्यू दिलाने भी ले गई। इसके बाद दोनों शहर में सैर सपाटा करते रहे। उन्होंने फिल्म भी देखी। 18 और 19 अगस्त की दरम्यानी रात योगेंद्र ने पंचवटी होटल में सोते समय रजाई से सुनीता का मुंह दबाकर हत्या कर दी। सुबह लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसे रेलवे स्टेशन से एक पिट्टू बैग खरीदा और उसमें शव रखकर आॅटो रिक्शा से हमीद मंजिल के खंडहर में ठिकाने लगा दिया। पुलिस ने आरोपी योगेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है।

मारकर तालाब में फेंका
 निशातपुरा थाने के नबीबाग में रहने वाले रामबाबू की लाश 29 नबम्बर 2010 को दामखेड़ा के सीवेज तालाब में खून से लथपथ मिली। पुलिस की जांच में सामने आया कि अवैध संबंधों के चलते रामबाबू की हत्या उसकी पत्नी ने प्रेमी महेंद्र मीना और रंजीत तोमर के साथ मिलकर कर दी और लाश को फेंक दिया था।

विरोध किया तो गला घोंटा
बैरसिया में रहने वाले तोरण सिंह की पत्नी के अवैध संबंध पड़ोस में रहने वाले प्रतिपाल सिंह से हो गए। तोरण सिंह को पता चला तो उसने विमला को समझाया, लेकिन विमला नहीं मानी। इसके बाद 15 नबम्वर 2009 को विमला ने प्रतिपाल सिंह की मदद से गलाघोंटकर तोरण सिंह की हत्या कर दी। इस मामले में विमला को आजीवन कारावास की सजा हुई है।

आजाद रहना चाहती थी पत्नी
विश्वकर्मा नगर में रहने वाले मांगीलाल की हत्या भी उसकी पत्नी ने की। मांगीलाल की पत्नी ममता गिरी के अवैध संबंध मांगीलाल के दोस्त जयप्रकाश से बन गए। मांगीलाल को अवैध संबंधों का पता नहीं था, लेकिन ममता गिरी ने मांगीलाल को रास्ते से हटाकर आजाद जिंदगी जीने का सपना देखा। ममता ने जयप्रकाश से फोन करवाकर मांगीलाल को बुलवाया और प्रेमी की मदद से गलारेत कर हत्या कर दी।

हवस ने करवाई हत्या
कोहेफिजा में रहने वाली रेखा का उसका पति राहुल बहुत चाहता था। रेखा के कहने पर ही राहुल भोपाल आया और सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा। लेकिन वासना की भूखी रेखा के राहुल के दोस्त अटल और सुरेंद्र सिंह से संबंध हो गए। रेखा ने 21 अप्रैल 2012 को अटल और सुरेंद्र के साथ मिलकर राहुल की हत्या कर दी।

कुल्हाड़ी से काटा
शिवनगर में रहने वाले देवीसिंह की 26 अप्रेल 2012 को कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि देवी सिंह की हत्या रजनी और उसके भाई गोकुल ने की है। पुलिस के अनुसार रजनी के संबंधों का पता देवीसिंह को चला तो रजनी ने देवी सिंह की हत्या कर दी।

बेटे के सामने पति को मारा
बैरसिया निवासी धनवीर की 4 अगस्त 2012 की रात अज्ञात हत्यारों ने हत्या कर दी। पुलिस ने मामले की जांच की तो सामने आया कि धनवीर की पत्नी बनारसी के सोनू सक्सेना नाम के युवक से अवैध संबंध हैं। इसके बाद धनवीर के बेटे ने बताया कि रात के समय सोनू और बनारसी ने मिलकर धनवीर को मौत के घाट उतार दिया। धनवीर को बनारसी के अवैध संबंधों की जानकारी नहीं थी, लेकिन बनारसी आजादी से सोनू सक्सेना के साथ रहना चाहती थी।

शराब मिलाकर कर दी हत्या
करोद के पीपल चौक पर रहने वाले आॅटो चालक की लाश पीपुल्स हास्पिटल भानपुरा पर मिली। पुलिस ने मामले की तफ्शीश की तो सामने आया कि अवैध संबंधों के चलते आटो चालक की पत्नी निधि ने ही अपने प्रेमी राजेश और भूपेंद्र के साथ मिलकर आटो चालक की हत्या की है। आरोपियों ने आटो चालक को शराब पिलाई और गलाघोंटकर हत्या कर दी।
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समाज में बदलाव आता है। लोग आधुनिक ख्यालों में जीना चाहते हैं, लेकिन आधुनिकता का मतलब ये कतई नहीं है कि सामाजिक मर्यादाओं को तोड़ा जाए। आधुनिक ख्यालों में समाज की उन्नति की बात होती है। हर वर्ग को समान अधिकार और महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात होती है। लेकिन कोई भी आधुनिक समाज अश्लीलता और अवैध संबंधों को बढ़ावा देने की वकालात नहीं करता। युवा पीढ़ि भटकती जा रही है। वो आधुनिकता और आजादी का मतलब हवस, वासना और मनमानी मान रही है। यही समाज को विपरीत दिशा में ले जाने के लिए जिम्मेदार है। खासकर अभिभावकों का सम्मान खत्म हो रहा है। लोग अपने बुजुर्गों की बात नहीं मानते और मनमर्जी से शारीरिक आकर्षण के चलते शादी कर लेते हैं। इसके बाद आकर्षण खत्म होता है तो इस तरह के अपराध होते हैं। इसमें सबसे चिंताजनक है मध्यमवर्ग और निम्न वर्ग में इस तरह के अपराधों की बढ़ोतरी। शिक्षा के अभाव और आर्थिक विषमताओं के कारण भी समाज में इस तरह के अपराध होते हैं। चैनलों पर भी हिंसक और समाज का लज्जित करने वाले धारावाहिक और फिल्में आ रही हैं। ये लोगों को सही रास्ता दिखाने की जगह भटकाने का काम कर रहीं हैं।
डॉ. आरके शर्मा, समाजशास्त्री

सात करोड़ जनता का श्रवणकुमार....हरि दर्शन कराएगा हमारा शिव



बुजुर्गों को तीर्थ कराने वाली दुनिया की पहली शिव सरकार

कोई रामेश्वरम जाएगा तो कोई अजमेर शरीफ

श्रवण कुमार की कहानियां सुनी थीं, लेकिन श्रवण कैसा था ये आज देखने को मिल गया। श्रवण ने तो केवल अपने माता-पिता को तीर्थ दर्शन करवाए थे लेकिन हमारे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने तो प्रदेश के हर घर के माता-पिता को तीर्थ दर्शन कराने का बीड़ा उठा लिया। ऐसी यात्रा जिसमें न तो जात-पात का भेदभाव है और न किसी आयवर्ग और मजहब का। चाहे अमीर हो या गरीब, सबके लिए मुख्यमंत्री तीर्थ कराने का संकल्प ले चुके हैं और उसे पूरा भी कर रहे हैं। पहली यात्रा 3 सितम्बर को जा रही है। बुजुर्ग इस यात्रा को लेकर उत्साहित हैं और बुजुर्गों के परिजन बेफिक्र होकर तीर्थ दर्शन को भेज रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने एक हजार बुजुर्गों की यात्रा की तैयारियों को लेकर एक पल भी चैन से नहीं बैठ रहे। बुजुर्गों की हर सुविधा के लिए बिंदुबार समीक्षा कर रहे हैं और हर अधिकारी को चेता दिया है कि हमारे बुजुर्गों को किसी तरह की तकलीफ न हो जाए। 

प्रमोद त्रिवेदी

प्रदेश के हर बुजुर्ग की आत्मा से बस केवल दुआएं ही निकल रही हैं। जो फर्ज हमारे सगे बेटे नहीं निभा पाते वो हमारा लाड़ला शिवराज सिंह निभा रहा है। शिवराज सरकार का एक ऐसा फैसला जो प्रदेश नहीं दुनिया के लिए मिसाल बन गया। दुनिया की पहली सरकार बन गई जिसने बुजुर्गों को सरकार के खर्च पर तीर्थ कराने की योजना बनाई और तत्काल अमलीजामा भी पहना दिया। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने तीर्थ-दर्शन पर जाने वाले प्रथम जत्थे की तैयारियों की बिन्दुवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि बुजुर्गों की सभी जरूरतों का ख्याल रखा जाय। सुनिश्चित किया जाए कि रास्ते में किसी को यात्रा संबंधी कोई कठिनाई नहीं आने पाए। मध्यप्रदेश सरकार की अनूठी पहल के जरिए 3 सितम्बर को प्रदेश के बुजुर्गों को ससम्मान रामेश्वरम तीर्थ-दर्शन के लिए रवाना किया जाएगा। मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में यह सिलसिला आगे निरंतर जारी रहेगा। शासकीय खर्चे पर हरि-दर्शन की लालसा पूरी करवाने वाला और सभी धर्म एवं मजहब के तीर्थों पर ले जाने वाला मध्यप्रदेश देश का ही नहीं पूरी दुनिया का पहला राज्य है। पहली तीर्थ-यात्रा की सभी तैयारियां पूरी हो गयी हैं।
धर्मस्व एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि तीर्थ-यात्रियों का पहला जत्था भोपाल के हबीबगंज स्टेशन से 3 सितम्बर को शाम 5.30 बजे रवाना होगा। इस अवसर पर तीर्थ-यात्रा में जाने वाले बुजुर्ग यात्रियों के सम्मान में दोपहर 3 बजे रेलवे स्टेशन प्रांगण में समारोह का आयोजन किया जाएगा। समारोह में प्रसिद्ध भजन गायक अनूप जलोटा अपनी प्रस्तुति देंगे। यात्री दल के साथ प्रदेश की पुलिस का एक चार का सुरक्षा बल, आवश्यक दवाओं सहित चिकित्सा दल, कैमरामेन, वीडियोग्राफर के साथ ही प्रत्येक बोगी में 69 तीर्थ-यात्री होंगे। तीर्थ-यात्रियों के साथ एक शासकीय और दो रेलवे कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं। इस रेल गाड़ी में 18 कोच होंगे जो सीधे भोपाल से रामेश्वरम् जाएगी। रामेश्वरम से वापिसी के मार्ग में बैतूल, इटारसी और होशंगाबाद स्टेशनों पर रेल गाड़ी रूकेगी।
सारी व्यवस्था सरकार के खर्च पर
रामेश्वरम की इस प्रथम यात्रा के बाद आगे जो भी तीर्थ-यात्रा हो उसमें तीर्थ-यात्रियों को रेल मार्ग पर पड़ने वाले प्रमुख दर्शनीय स्थलों में भी घुमाया जाएगा। इसके लिए मुख्य तीर्थ-स्थल के मार्ग में पड़ने वाले दर्शनीय-स्थलों का पहले से चयन कर लिया गया है और सारी व्यवस्थाएं पहले से कर दी गई हैं। 18 कोच वाली इस गाड़ी में 15 कोच स्लीपर के होंगे। वहीं 1 पेंट्री कार एवं दो एसएलआर कोच होंगे। ट्रेन में यात्रियों को सुबह की चाय, नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम की चाय और रात का खाना आईआरसीटीसी (प्रदेश सरकार से अधिकृत) की तरफ से दिया जाएगा। इसके लिए यात्रियों को कोई शुल्क अदा नहीं करना होगा। रामेश्वरम में होटल में ठहरने के दौरान बिस्तर और भोजन की व्यवस्था की गई है। यात्रियों को किसी भी स्थान पर कोई परेशानी ना हो इसके लिए प्रत्येक कोच में गाइड रहेंगे। एक हजार यात्रियों के आने-जाने की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि रामेश्वरम में एक हजार यात्रियों को एक ही होटल में ठहराना संभव नहीं होगा। इसके लिए अलग-अलग होटल की व्यवस्था है। होटल में यात्रियों के लिए नाश्ता, भोजन और बिस्तर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर घुमाने के लिए बस की व्यवस्था भी सरकार के निर्देश परआईआरसीटीसी ने की है।
अगली यात्रा अजमेर शरीफ
 मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना की दूसरी यात्रा के लिए ट्रेन 13 सितंबर को अजमेर शरीफ के लिए रवाना होगी। जिसमें यात्रा में भोपाल, होशंगाबाद और उज्जैन संभाग के 977 वृद्धजन शामिल होंगे। अजमेर शरीफ यात्रा के लिए आवेदन 3 सितम्बर तक लिए जाएंगे। आवेदन निकटतम तहसील,उप तहसील अथवा कलेक्टर द्वारा निर्धारित अन्य स्थानों पर जमा किए जा सकते हैं। अजमेर शरीफ की तीर्थ-यात्रा में जिला राजगढ़ से 48, विदिशा से 71, भोपाल से 244, सीहोर से 63, रायसेन से 58, बैतूल से 18, हरदा से 16, होशंगाबाद से 25, उज्जैन से 110, शाजापुर से 81, देवास से 78, रतलाम से 72, मंदसौर से 61 और नीमच से 32 यात्री शामिल होंगे।

पुलिस अधिकारियों के आगे झुकी सरकार,..: दो साल रुको फिर खाओ मलाई


 चाहते हैं सिर्फ कमाऊ पोस्टिंग


केवल दो साल निकाल लो, फिर जहां चाहोगे पोस्टिंग दे दूंगा। आप लोगों का तबादला ट्रेनिंग सेंटर जैसी जगहों पर कर दो तो जुगाड़ लगाकर केंसिल करवा लेते हो। ये कहना पड़ा प्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता को। दरअसल, ट्रेनिंग सेंटर और सीआईडी जैसी करीबन आधा दर्जन पुलिस की शाखाओं को अधिकारी लूप लाइन समझते हैं, क्योंकि इनमें कमाई नहीं होती। जाहिर है कि जिले में और पुलिस विभाग की अन्य शाखाओं में पुलिस अधिकारी जमकर अवैध कमाई करते हैं। इतना ही नहीं वकौल गृहमंत्री सरकार के चाहने पर भी अपनी मर्जी के खिलाफ तबादला नहीं लेते। पुलिस अधिकारियों की मनमानी से परेशान गृहमंत्री के अच्छी पोस्टिंग के लालच में भी कोई पुलिस अधिकारी नहीं फंस रहा। इसका कारण है दो साल पूरे होने से पहले चुनाव हो जाएंगे और नए गृहमंत्री के हाथ में भविष्य का फैसला होगा। आईपीएस के आग सरकार की मजबूरी, मलाईदार पदों पर जुगाड़ लगाने के कारण बिगड़ती कानून व्यवस्था और हावी नौकरशाही पर फोकस करती

 प्रमोद त्रिवेदी की स्टोरी....

 भोपाल। 
जनप्रतिनिधि नेतागिरी करें तो बात समझ आती है, लेकिन वर्तमान में प्रदेश के अफसर नेतागिरी पर उतारू हो गए हैं। ये अफसर बाकायदा सत्तापक्ष के मंत्रियों के साथ लॉबिंग करके अपने हित साधते हैं। सरकार पर नौकरशाही हावी होने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन सत्तापक्ष हमेशा इन आरोपों को नकार देता है। लेकिन पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों की समीक्षा बैठक में गृहमंत्री के वक्तव्य से जाहिर हो गया कि सरकार आईएएस से ही नहीं आईपीएस से भी परेशान है। इसमें खास बात ये है कि मलाईदार पदों की लालसा रखने वाले अधिकारी सरकार को झुका लेते हैं। यानि सरकार जानती है कि अधिकारी, कमाई के लिए कुछ पदों पर जाना चाहते हैं। फिर भी सरकार इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर रोटेशन में तबादले भी नहीं कर पाती। गृहमंत्री ने खुद कहा कि तबादला करो तो ये लोग केंसिल करा लेते हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि प्रदेश सरकार पर नौकरशाही जनता के लिए खुद के भले के लिए पूरी तरह हावी है। यहीं कारण रहा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर जैसे पद खाली रह जाते हैं और अन्य पदों के लिए मारा-मारी रहती है। सबसे बड़ा उदाहरण राजधानी में सामने आया। यहां तीन एसपी सिस्टम करने पर डायरेक्ट आईपीएस अफसर ने भोपाल में पदस्थापना लेने से इंकार कर दिया। इसके पहले भी एसएसपी सिस्टम में भी भोपाल पदस्थापना के लिए आईपीएस अधिकारियों के मना करने पर अन्यत्र तबादले की बात सामने आ चुकी है।
दो साल बाद का किसने देखा
गृहमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को लालच दिया कि दो साल ट्रेनिंग सेंटर में बिताने पर मनमाफिक पदस्थापना दी जाएगी। लेकिन कई अधिकारियों का कहना है कि दो साल बीतने से पहले चुनाव हो चुकेंगे। ऐसे में दो साल बाद की स्थिति क्या होगी? इस तरह के मौखिक वादे कई बार हुए और नई सरकार और नए मंत्रियों ने उन्हें खारिज कर दिया। ऐसे में मनमाफिक पोस्टिंग के लिए मर्जी से तो दो साल लूप लाइन में रहने का बलिदान नहीं दिया जा सकता। दूसरी बात जब मलाईदारों पदों के लिए अभी भी अधिकारी सरकार को झुका लेते हैं तो बाद में ऐसा नहीं होगा, इसकी क्या गारंटी है। ऐसे में लूप लाइन वाले तो लूप में ही रह जाएंगें।
मेन्यूअल के खिलाफ
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आईपीएस हो या राज्य सेवा का अधिकारी, कोई भी मनमानी पोस्टिंग के लिए दावा नहीं कर सकता। गृहमंत्री ने भले ही कह दिया हो, लेकिन नियमानुसार ऐसा कोई लिखित रोटेशन नहीं है और न सेवा शर्तों में शामिल है। कई बार अधिकारियों को कोर्ट से बार-बार तबादलों के खिलाफ स्टे लेना पड़ा है। सरकार खुद के बनाए नियमों से कभी भी मुकर जाती है। तबादला पद्धति इसीलिए लागू की गई कि अधिकारी एक ही जगह पर रहकर निजी लाभ के कार्य न कर सके। अधिकारी हो या कर्मचारी, शासन के नियमानुसार किसी विशेष जगह पर पदस्थ रहने के लिए दबाव नहीं बना सकता।
राजधानी में प्रमोटी से चला रहे काम
पुलिस विभाग में आईपीएस का दबाव इस कदर रहता है कि अधिकारी तबादला होने के बाद मनमानी पोस्टिंग न मिलने पर जाने से इंकार कर देते हैं। राजधानी में एसपी पोस्टिंग को लेकर कई बार इस तरह की मनमर्जी सरकार को झेलनी पड़ी है। एसएसपी सिस्टम के समय एक आईपीएस ने भोपाल पोस्टिंग लेने से साफ इंकार कर दिया था। उस आईपीएस का कहना था कि वह एसएसपी के अंडर काम नहीं करेगा। आईपीएस ने मुरैना पोस्टिंग के दौरान मुरैना क्षेत्र के एक कद्दावर सत्तापक्ष के मंत्री से दबाब डलवाकर अपना तबादला मध्यप्रदेश के दूसरे महानगर में करवा लिया था। यही हाल एसएसपी सिस्टम खत्म होने के बाद तीन एसपी सिस्टम में देखने मिला। राज्य सरकार की मर्जी पर कोई भी डायरेक्ट आईपीएस राजधानी में पदस्थ होने को तैयार नहीं हुआ तो सरकार को प्रमोटी आईपीएस को पदस्थ करना पड़ा।
हर अफसर की लॉबिंग
ऐसे कम ही अफसर होंगे जो नेताओं की तरह लॉबिंग न करते हों। कई अफसर तो दावा करते हैं कि उनकी फलां जगह पोस्टिंग होगी और फलां जगह भेजने की किसी में ताकत नहीं हैं। ऐसे कई अफसर हैं जिनके सत्तापक्ष के मंत्रियों से यारी रहती है और पोस्टिंग और तबादले रुकवाने में इन्हीं मंत्रियों की मदद से सरकार पर दबाव डलवाते हैं। कांग्रेस सरकार रहे या भाजपा, इनकी सेहत पर कोई असर नहीं होता। यानि अफसरी करते हुए भी फुल नेतागिरी करने वाले अफसरों की प्रदेश में भरमार है।

इन शाखाओं को समझते हैं लूप लाइन


  • -पुलिस ट्रेनिंग सेंटर
  • -सीआईडी
  • -स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो
  • -विशेष शाखा
  • -लोकायुक्त 
  • -ईओडब्लू
  • -फायर
  • -मुख्यालय में एआईजी


पावर और पैसे की चाहत
अफसरों की लॉबिंग होती है पावर और पैसे के लिए। लूप लाइन समझे जाने वाली शाखाओं में न तो अफसरों को ज्यादा सुविधा होती है और न रुतबा रहता है। ये अलग बात है कि हर शाखा का अपना महत्व है और हर शाखा में काम की कोई कमी नहीं रहती है। सीआईडी के एडीजी एमआर कृष्णा कहते हैं कि भले ही लोग सीआईडी को लूप लाइन कहें, लेकिन इस शाखा का महत्व भी कम नहीं आंका जा सकता। ये अलग बात है कि यहां स्टाफ और संसाधनों की कमी है, लेकिन काम की कोई कमी नहीं है। अफसरों को मन लगाकर काम करना चाहिए तो हर शाखा की उपयोगिता साबित हो सकती है। एक अन्य सीआईडी के वरिष्ठ अफसर कहते हैं कि फील्ड में काम करने वाले अफसरों की जमकर कमाई होती है। उन्हें सुविधाओं भी बहुत मिलती हैं और रुतबा भी रहता है। जिले में रहने वाले एसपी पर दो से तीन वाहन रहते हैं और क्षेत्र में रुतबा भी रहता है। साथ ही सत्तापक्ष से काम पड़ने पर नेता मदद भी करते हैं। वहीं सीआईडी, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर जैसी शाखाओं में सुविधाएं बहुत कम हैं। न तो आॅफिस ढंग के हैं और न ही संसाधन। डीआईजी स्तर के अधिकारी के पास भी केवल एक वाहन की सुविधा होती है। सरकारी काम से अन्य जिले में जाने पर जिले के एसपी से वाहन और गार्ड के लिए गुहार लगानी पड़ती है। यहीं कारण है कि फील्ड में और मलाईदार पदों पर रहने वाला अफसर हमेशा इन्हीं पदों पर रहता है और लूप लाइन में पहुंच चुके अफसर की नौकरी ही लूपलाइन में निकल जाती है।

शेहला मसूद हत्याकांड....गवाहों को पुलिस करेगी कोर्ट में हाजिर



भोपाल। गुरुवार को शेहला मसूद हत्याकांड में ट्रायल के दौरान शेहला के पिता और एक अन्य रिश्तेदार की गवाही थी, लेकिन दोनों हाजिर नहीं हुए। इन लोगों ने कोर्ट में आवेदन भी नहीं लगाया। सीबीआई और जाहिदा के वकील के अनुरोध पर दोनों गवाहों के खिलाफ कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किया है। जमानती वारंट पर भी गवाह हाजिर नहीं हुए तो कोर्ट गिरफ्तारी वारंट जारी करेगा और शेहला के पिता को पुलिस कोर्ट में हाजिर करेगी।
शहला मसूद हत्याकांड में सीबीआई विशेष न्यायालय में ट्रायल शुरू नहीं हो सकी। सीबीआई द्वारा प्रस्तुत ट्रायल प्रोग्राम के मुताबिक गुरुवार को मृतका शहला के पिता सुल्तान मसूद व एक अन्य रिश्तेदार गवाही के लिए नहीं पहुंचे। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए दोनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। शुक्रवार को दो अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। सीबीआई विशेष कोर्ट में न्यायाधीश अनुपम श्रीवास्तव के समक्ष गुरुवार को शहला हत्याकांड की दो दिनी सुनवाई प्रारंभ हुई। पहले दिन सीबीआई द्वारा प्रस्तुत दो गवाहों के बयान दर्ज किए जाने थे। इनमें शहला के पिता सुल्तान मसूद व दूसरे परिजन सैय्यद साहिल हुसैन के बयान होने थे। पाँचों आरोपियों जाहिदा परवेज, सबा फारुखी, ताबिश, इरफान व शाकिब डेंजर को भी पेश किया गया था। कोर्ट द्वारा दोपहर तक गवाहों का इंतजार किया गया। इसके बाद सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक हेमंत शुक्ला से दोनों के उपस्थित होने की संभावाओं पर पूछा गया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के लिए गवाहों को कोर्ट में उपस्थित कराने की जिम्मेदारी सीबीआई की है। यह सुनिश्चित किया जाए कि गवाह समय पर कोर्ट में मौजूद रहें। इसी बीच आरोपियों की ओर से मौजूद अभिभाषक परवेज आलम व सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि आरोपी जेल में बंद हैं। ट्रायल के लिए नियत तिथि पर गवाह उपस्थित नहीं होंगे तो प्रकरण की सुनवाई में देरी होगी। उन्होंने दोनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने की मांग की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किए। सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी। इस दिन एमआर उईके व अन्य गवाहों के बयान होंगे। क्षेत्राधिकार का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण से जुड़े सभी पक्ष सुनवाई भोपाल में चाहते हैं। इसके लिए कोर्ट में आवेदन भी लगाए गए थे, जिन्हें खारिज किया जा चुका है। हाल ही में दो आरोपियों द्वारा क्षेत्राधिकार को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिस पर सुनवाई होना है।

गुरुवार, 30 अगस्त 2012

कभी भी हैक हो जाएगा हमारा देश


भोपाल।भारत की संवेदनशील सरकारी और निजी वेबसाइटों पर हैकिंग का खतरा मंडरा रहा है। साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने इस संबंध में इंटरनेट उपभोक्ताओं और आॅपरेटरों के लिए अलर्ट भी जारी किया है। डिस्ट्रीब्यूटिड डिनायल आॅफ सर्विस [डीडीओएस] के माध्यम से होने वाले इन साइबर हमलों से बचने के लिए इंटरनेट उपभोक्ताओं को कंप्यूटर सुरक्षा प्रणाली व फायरवाल को और दुरुस्त करने की सलाह दी गई है।
कंप्यूटर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं से निपटने वाली संस्था इंडियन इमरजेंसी रेस्पांस टीम [सीईआरटी-आइएन] द्वारा जारी चेतावनी में कहा गया है, 'हैकर समूहों द्वारा डीडीओएस के जरिये महत्वपूर्ण सरकारी और निजी संगठनों की वेबसाइटों पर साइबर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसे देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा उपाय अपनाना आवश्यक है।' डीडीओएस साइबर हमले से प्रभावित कंप्यूटरों पर मुहैया की जा रही सेवाएं बाधित हो जाती हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक हैकरों के इस हमले से विशेष साइबर सुरक्षा टूल को नियमित रूप से अपडेट कर बचा जा सकता है।
देश की महत्वपूर्ण वेबसाइटों पर लगातार हो रहे साइबर हमले की घटनाओं पर बजट सत्र के दौरान सरकार ने एक रिपोर्ट भी पेश की थी। इसके अनुसार 2011 में 13 हजार और 2009 में करीब आठ हजार साइबर हमले की घटनाएं सामने आईं। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में संचार व सूचना तकनीक राज्य मंत्री सचिन पायलट ने सीईआरटी-आइएन की रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि पिछले साल साइबर हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

एके 47 से भी बेहतरीन थे क्रांतिकारियों के हथियार



तोंपे और फूट डालने की नीति न होती तो देश बहुत पहले होता आजाद

विशेष संवाददाता, भूतझोलकिया, भोपाल।

भले ही नब्बे के दशक में एके 47 और एके 56 रायफल जैसे स्वचालित हथियार देश की सेना व पुलिस बेड़े में शामिल हुए हों मगर यह भी सच है दो सौ साल पहले ही अपने देश के क्रांतिकारियों ने ऐसे स्वचालित असलहे बना लिए थे जो तकनीकी तौर पर आज भी उन्नत माने जाते हैं। भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी में ऐसे कई अनोखे हथियार मौजूद हैं।
1902 में स्थापित पुलिस अकादमी का संग्रहालय खुद में तमाम ऐतिहासिक घटनाओं को समेटे हुए है। यह संग्रहालय ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1902 के पहले इलाहाबाद के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में था। 1857 की क्रांति में जिन हथियारों को अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों के पास से बरामद किया उनमें अनूठे असलहों को इलाहाबाद के संग्रहालय में रखा। वहां से यह मुरादाबाद की पुलिस अकादमी में आ गए।
पुलिस अकादमी के एडीजी एके जैन कहते हैं कि संग्रहालय में 1857 से भी पहले के हथियार हैं। इनमें स्टिक गन, पेंसिल गन, 0.22 की स्वचालित पिस्टल, 0.25 की स्वचालित पिस्टल, बारह बोर और 315 बोर का रिवाल्वर, 303 बोर की अत्याधुनिक रायफल और बंदूकें अनूठी हैं। पिस्टल तो ऐसे हैं कि आप जेब में रखकर चल सकें और किसी को पता भी नहीं चल पाए। संग्रहालय में जो सबसे छोटी पिस्टल रखी है उसकी लंबाई एक उंगली के बराबर है। बारह बोर का रिवाल्वर देखकर तो आप चौंक जाएंगे। आज अपराधियों के पास से ऐसे असलहे बहुत कम ही बरामद होते हैं जिनसे कई गुना अच्छे असलहे दो सौ साल पहले ही यहां बन गए थे। स्टिक गन भी इतनी छोटी है, कि देखकर लगता ही नहीं कि पीतल का यह रूल है या कारतूस उगलने वाला शस्त्र।
एडीजी ने बताया कि खास तौर पर तीन सेंटीमीटर का कारतूस भरने वाली मशीन तो और भी चौंकाने वाली है जो हैंडपंप के आकार में बनी हुई है। एडीजी का मानना है कि अगर अंग्रेजों के पास अत्यधिक संख्या में तोपें नहीं होतीं और फूट डालने की रणनीति में वे कामयाब नहीं होते तो भारतीय सरजमीं पर क्रांतिकारियों द्वारा बिना आधुनिक मशीनों के तैयार गए इन शस्त्रों की बदौलत युद्ध शैली व मोचेबंर्दी से उन्हें और पहले देश से भागने को मजबूर किया जा सकता था।







शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

पीडब्लूडी की निगरानी करेगा जीपीएस सॉफ्टवेयर


मुख्य संवाददाता, भोपाल। प्रदेश में लोक निर्माण विभाग में ई-मेजरमेंट व्यवस्था लागू होगी। इसके लिए रियल टाइम जीपीएस आधारित साफ्टवेयर विकसित किया गया है। पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में भोपाल डिवीजन क्रमांक दो में यह व्यवस्था लागू होगी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इसे पूरे प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश में शुरू की जा रही है। लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्षा के दौरान खराब हुई सड़कों को ठीक करने का काम तुरंत शुरू किया जाए। बैठक में मुख्य सचिव श्री आर.परशुराम भी मौजूद थे।
श्री चौहान ने बैठक में सड़क निर्माण संबंधी कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों में जहाँ सड़कों पर जल-जमाव के कारण सड़कें हमेशा क्षतिग्रस्त होती है वहाँ सीमेंट-कांक्रीट की सड़कें बनाए तथा ड्रेनेज की समुचित व्यवस्था करें। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और कार्य पूर्ण होते ही भुगतान का होना सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण के कार्य समयबद्ध योजना बनाकर पूरे करने को कहा। उन्होंने शासकीय सर्किट हाउस तथा रेस्ट हाउस के मैटेनेंस की पर्याप्त व्यवस्थाओं पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सड़के निर्माण के कार्यों में तेजी के साथ गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए कार्य करें। मुख्य सचिव परशुराम ने कहा कि सिंहस्थ के मद्देनजर देवास, उज्जैन, बड़नगर और उज्जैन-मक्सी मार्ग को फोर लेन करने की योजना बनायी जाए।
बैठक में बताया गया कि लोक निर्माण विभाग चालू माली साल में कुल 2,950 किलोमीटर लम्बाई की सड़कें बनाएगा तथा 4,474 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण करेगा। केंद्रीय सड़क निधि के तहत देश में सबसे ज्यादा कार्य मध्यप्रदेश में हुए हैं। केंद्रीय सड़क निधि के कार्य में स्टेट फंड से भी राशि लगायी गई है। संभाग के सभी जिलों को टू लेन सड़कों से जोड़ने के कार्य 48 जिलों में पूरे हो गए हैं तथा 2 जिलों में निमार्णाधीन है। इसी तरह जिले के सभी विकास खण्ड को जिला मुख्यालय से पक्की सड़कों से जोड़ने का कार्य पूरा हो गया है। विभाग में अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बैठक प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग केके सिंह, प्रमुख सचिव वित्त अजयनाथ, मुख्यमंत्री के सचिव हरिरंजनराव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

टेली मेडिसिन से लैस होंगे प्रदेश के मेडीकल कॉलेज



मुख्य संवाददाता, भोपाल। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में जल्दी ही टेली-मेडिसिन सुविधा शुरू होगी। पहले चरण में भोपाल, इन्दौर, ग्वालियर और जबलपुर के मेडिकल कॉलेजों में तथा दूसरे चरण में रीवा, सागर के मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था शुरू होगी। टेली-मेडिसिन के बाद यह मेडिकल कॉलेज रिर्सोस सेंटर के रूप में काम करेंगे और शासकीय चिकित्सालय इनसे संबद्ध रहेंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा आज यहाँ की गयी चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा में दी गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री  महेन्द्र हार्डिया और मुख्य सचिव  आर. परशुराम भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने बैठक में कहा कि मेडिकल कॉलेजों में हृदय रोग, कैंसर रोग जैसी गंभीर बीमारियों के ईलाज की विशेषज्ञ सुविधाएं स्थापित की जायें। मेडिकल कॉलेजों में अलग से विभाग बनाये जायें। इन रोगों के लिए प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज में एम्स की तरह हर बीमारी के इलाज की व्यवस्था की जाये तथा अन्य मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग रोगों की सुपर-स्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध करवायी जायें जिससे गरीब लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिल सकेगी। उन्होंने निर्देश दिये कि शासकीय अस्पतालों में मरीजों के लिए जेनेरिक दवाइयाँ खरीदी जाय। साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध करवाने का कार्य समय-सीमा में किया जाए।
बताया गया कि चिकित्सा महाविद्यालयों को नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। चिकित्सा महाविद्यालयों में बीते छह माह में सहायक प्राध्यापकों सहित 150 पद भरे गए हैं। संचालनालय स्तर पर निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग और समीक्षा के लिए प्रोजेक्ट सेल बनाया जाएगा। मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रबंधन के लिए हास्पिटल मैनेजमेंट विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए आॅनलाईन कांउसलिंग की गयी है। बैठक में चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के लिए की गयी कारार्वाई की जानकारी दी गई। बैठक में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा  अजय तिर्की और प्रमुख सचिव वित्त  अजयनाथ सहित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

पटवारी की पहचान बस्ता नहीं लैपटॉप होगी



भोपाल। प्रदेश में जल्दी ही भू-प्रबंधन मिशन लागू होगा। मिशन की रूपरेखा बनाई जा रही है। इसके बाद भू-अभिलेख के काम में तेजी आएगी। भूमि संबंधी आंकड़ों, भूमि मापन और रिकार्ड में शुद्धता के लिए सभी पटवारियों को लैपटाप दिए जाएंगे। इसमें भूमि संबंधी प्रविष्टियों में गलतियां होने की संभावना कम हो जाएगी। यह जानकारी आज यहाँ मंत्रालय में राजस्व विभाग की समीक्षा में दी गई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विभाग की वर्तमान योजनाओं और भविष्य की कार्य योजनाओं की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नई पुनर्वास नीति का प्रारूप शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने खसरे और बी-1 दस्तावेज की इलेक्ट्रानिक प्रतियाँ उपलब्ध करवाने के निर्देश देते हुए कहा कि राजस्व सेवा को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय भू-अभिलेख प्रबंधन कार्यक्रम में नक्शों के डिजिटाईजेशन के काम में तेजी लाना जरूरी है। बैठक में बताया गया कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पदों की भर्ती प्रक्रिया जल्दी शुरू होगी। अशासकीय संस्थाओं के लिए भूमि आवंटन की नीति बनाई जा रही है। लोक सेवा प्रदाय व्यवस्था के जरिए राजस्व सेवाओं का बेहतर प्रदाय किया जा रहा है।
बैठक में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव आर परशुराम, प्रमुख सचिव राजस्व बीपी सिंह, राजस्व आयुक्त एचएल त्रिवेदी, राजस्व सचिव अजीत केसरी, आयुक्त भू-अभिलेख राजीव रंजन एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

स्लम फ्री होंगे प्रदेश के शहर


प्रदेश के 16 शहर को केंद्रीय राजीव आवास योजना का लाभ

भोपाल। केंद्र ने स्लम बस्तियों को आवास देने वाली योजना के लिए मध्यप्रदेश के प्रति उदारता दिखाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गौर की भाजपा में भले ही न सुनी जाए, लेकिन कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं से गौर की अच्छी बनती है। उसी का परिणाम है कि गौर को बराय मेहरबानी केंद्र की योजनाओं का लाभ मिल जाता है। केंद्र सरकार ने पहले केवल 10 शहर स्लम फ्री करने के लिए चिन्हित किए थे। अब इन्हें बढ़ाकर 16 कर दिए हैं। हलांकि केंद्र से गौर ने जिन 6 जिलों को स्लम फ्री करने के लिए बढ़वाया है, उनमें स्लम बस्तियां की संख्या न के बराबर है। प्रदेश के केवल 4 महानगरों को ही स्लम फ्री करने की जरूरत है, लेकिन कागजी योजनाएं बताती हैं कि प्रदेश के सभी 50 जिलों में स्लम बस्ती हैं।
शहरी गरीबों के कल्याण के लिये प्रारंभ केन्द्रीय राजीव आवास योजना में प्रदेश के 10 और शहर शामिल किए गए हैं। नगरीय प्रशासन की पहल पर शामिल इन नये शहरों को मिलाकर अब इस योजना में प्रदेश के शहरों की संख्या बढ़कर 16 हो गयी है। योजना में शहरों को स्लम-फ्री बनाने के उद्वेश्य से गरीबों के लिए आवास निर्माण किए जाएंगे।
केन्द्र सरकार द्वारा राजीव आवास योजना में चुने गये नए 10 शहर में 8 नगर पालिक निगम तथा एक लाख से अधिक आबादी वाली 2 नगर पालिका वाले शहर शामिल किए गए हैं। योजना में प्रदेश के बुरहानपुर, देवास, खण्डवा, रतलाम, रीवा, सतना, सिंगरौली एवं मुड़वारा (कटनी) तथा नीमच एवं छिन्दवाड़ा शहर को सम्मिलित किया गया है। इससे पूर्व राजीव आवास योजना में प्रदेश के छह नगर पालिक निगम वाले शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन एवं सागर शामिल थे। योजना में स्लम गरीबों के लिए निर्मित होने वाले आवासों के लिए केन्द्रांश 50 प्रतिशत एवं राज्यांश 20 प्रतिशत रहेगा। संबंधित हितग्राही को 30 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी।

दो साल के फाके, फिर खाओ मलाई


गृहमंत्री ने ट्रेनिंग सेंटर में अधिकारियों से कहा- दो साल रहने पर मनपसंद पोस्टिंग दी जाएगी

प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल। दो साल ट्रेनिंग सेंटर में रहने पर मनपसंद पोस्टिंग का खुला आॅफर। ये किसी शॉपिंग मॉल या लॉटरी सेंटर का नहीं मध्यप्रदेश का गृहमंत्री का पुलिस अधिकारियों को दिया आॅफर है। ये अलग बात है कि इस आॅफर के साल पूरे होने तक चुनाव हो चुकेंगे और शायद बहुत कुछ बदलने के साथ आॅफर भी बदल जाएं। सबसे बड़ी बात ये है कि गृहमंत्री के आॅफर से आईपीएस की सर्विस रूल मेल नहीं खाती है। यानि अफसर की पसंद नहीं होनी चाहिए और न पसंद पर जिला या क्षेत्र मिलना चाहिए। ये सब पक्षपात की श्रेणी में आता है और निष्पक्ष सेवा के लिए ऐसी शर्ताें को लागू नहीं किया जा सकता। बरहाल गृहमंत्री के आॅफस से जाहिर हो गया कि मंत्री की मर्जी से पुलिस विभाग के अफसरों की पोस्टिंग नहीं होती है। मतलब यहां भी नौकरशाही हावी है या फिर डॉयरेक्ट मुखिया के  इशारे पर ही काम होते हैं। जाहिर है गृहमंत्री नाम के रह गए हैं।
गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ट्रेनिंग मुख्यालय भोपाल में सागर, इंदौर, रीवा, पचमढ़ी, छिंदवाड़ा, तिथरा, उमरिया सहित सभी ट्रेनिंग सेंटर की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पुलिस और एसएएफ की ट्रेनिंग में नैतिक शिक्षा को भी शामिल करने पर जोर दिया। वो भी जानते हैं कि पुलिस नहीं जानती कि नैतिकता किस चिड़िया का नाम है।
00ये भी दिए निर्देश
बकौल गृहमंत्री ट्रेनिंग सेंटर में दो वर्ष कार्य करने के बाद संबंधित अधिकारियों की मनपसंद पोस्टिंग दी जाएगी। उन्होंने ट्रेनिंग सेंटर के रिक्त पदों को भरने के निर्देश भी दिए। गृह मंत्री ने उन्होंने कहा कि सेंटर में प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। श्री गुप्ता ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर दक्षता बढ़ाएं। प्रशिक्षणार्थियों की मूलभूत जरूरतों को हर हाल में पूरी करें। गृह मंत्री ने कहा कि प्रदेश में संचालित सभी ट्रेनिंग सेंटर का मुख्यालय भोपाल में एक ही एडीजी के अधीन रहेगा। अभी एसएएफ और पुलिस बल के लिए संचालित ट्रेनिंग सेंटर का नियंत्रण अलग-अलग अधिकारियों के पास है। गृह मंत्री ने कहा कि ट्रेनिंग ले रहे आरक्षक, उप निरीक्षक और उप पुलिस अधीक्षक को नए पाठ्यक्रम के अनुसार बेहतर प्रशिक्षण दिया जाय। प्रशिक्षक की भी ट्रेनिंग करवाई जाय। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रायवेट डॉक्टर भी बुला सकते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि उपकरणों के मेंटीनेंस के लिए अलग से बजट प्रावधान करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह आईएनएस दाणी, पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशासन सरबजीत सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
00जबकि हकीकत है ये
पुलिस ट्रेनिंग सेंटर को लूप लाइन नहीं माना जा सकता। यहां कमाई के नए जरिया हैं। ट्रेनिंग के दौरान उसी ट्रेनी को अच्छा खाना मिलता है जो अपने वेतन में से अधिकारी को रुपए देता है। इसके अलावा ट्रेनिंग की जगह एक दिन सोने से लेकर मार्केट घूमने तक के रुपए दिए जाते हैं। ट्रेनिंग ले रहे जवानों को ऐसी सब्जी दी जाती है कि जानवर भी खाने से इंकार कर दें। हर जवान अपने साथ नमकीन, टमाटर, मिर्ची और धनिया रखता है। वो सेंटर से मिली सब्जी में मिलाकर खा लेता है और जैसे-तैसे समय निकालता है। सोने के लिए बिस्तर घर से ले जाना पड़ता है। ट्रेनिंग सेंटर के हाल इतने बुरे हैं कि सरकारी नौकरी और थाने में पोस्टिंग के बाद मिलने वाली रिश्वत का लालच न हो तो एक भी जवान न रूके। बीमार होने पर जवान को पेरासिटामोल दी जाती है और अधिक तबीयत खराब होने पर सरकारी अस्पताल में पटक दिया जाता है। इसके लिए भी जवान को रुपए खर्च करना होता है।

ट्रेनिंग के साथ सैरसपाटा 
गृह मंत्री ने कहा कि सभी प्रशिक्षणार्थियों को दो माह में एक बार पिकनिक में ले जाए। पिकनिक कार्य दिवस में हो। इस दौरान सभी प्रशिक्षक और प्रशिक्षणार्थी मिल-जुलकर रहें। केन्द्र का प्रमुख मेस का सतत निरीक्षण करें और माह में एक दिन प्रशिक्षणार्थियों के साथ भोजन करें। केन्द्र में खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो।
ट्रेनिंग सेंटर की क्षमता बढ़ेगी
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजेन्द्र कुमार ने बताया कि 13वें वित्त आयोग मद से ट्रेनिंग सेंटर में नए कक्ष बनवाने के साथ ही उपकरण भी उपलब्ध करवाए जाएँगे। उन्होंने बताया कि सेंटर की क्षमता 1500 से बढ़ाकर 4500 करने का लक्ष्य है। सेंटर में रिक्त व्याख्याताओं के पद पर संविदा नियुक्ति की जाएगी।

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

विकास के प्रतीक बनेंगे गांव.....ग्रामीण विकास की अनूठी पहल


किसी भी किसान को सुख-सुविधा, काम-धंधे, बच्चों की पढ़ाई, रोजगार के लिए शहर की ओर नहीं आना पढ़ेगा। मध्यप्रदेश का हर गांव ऐसा होगा कि जापान-अमेरिका के दल आकर हमारे गांवों की समृद्धि का अध्ययन करेंगे। मेरा किसान इतना समृद्ध और सक्षम होगा कि पूरे देश ही नहीं दुनिया में मध्यप्रदेश के किसान का उदाहरण पेश किया जाएगा। इस सपने को साकार करने प्रतिबद्ध हैं प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान। वो हर गांव को रोजगार, उद्योग-धंधों और इंटरनेट से ऐसा समृद्ध कर देंगे कि गांव और शहरों की खाई पट जाएगी। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में आधी से ज्यादा दूरी तय कर ली है और जल्दी ही गांवों में खुशहाली की बयारें बहेंगी।

प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल

मध्यप्रदेश में ग्रामीण अंचलों के सर्वांगीण विकास के लिये कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की शुरूआत की गई है, जिससे ग्रामीणों के आर्थिक उत्थान के साथ-साथ गांवों की नई तस्वीर बन रही है। पंच-परमेश्वर योजना के अंतर्गत सभी 23 हजार 12 ग्राम-पंचायतों में पक्के आंतरिक मार्गों और नालियों का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम-सड़क और मुख्यमंत्री ग्राम-सड़क योजना के तहत बारहमासी पक्की सड़कों के जरिये सुदूर अंचलों तक सम्पर्क सुविधाएं सुलभ कराई जा रही हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के जरिये मेढ़-बंधान और ग्रामीणों के खेतों के सुधार तथा निकास के गंदे पानी का फलोद्यान विकास के लिये उपयोग कर ग्राम-वासियों के आर्थिक विकास को मजबूत बनाया जा रहा है। इसके अलावा आजीविका के विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये ग्रामीण महिलाओं के स्व-सहायता समूहों की महिला सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास हो रहे हैं। इन समूहों के द्वारा निर्मित सामग्री के विक्रय के लिये उत्पादक कम्पनियों और फेडरेशनों का गठन कर सामग्री का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने के संगठित प्रयास हो रहे हैं।
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ऐसे बन रहा है सपनों का प्रदेश


  • -महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के तहत प्रदेश में भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ ही हरियालीमय प्रदेश बनाने के कार्य व्यापक पैमाने पर कराए जा रहे हैं। इससे प्रदेश की 17.14 लाख हेक्टेयर भूमि में सुधार हुआ है और 65 लाख फलदार पौधे नंदन फलोद्यान उप योजना के तहत रोपे गये हैं। कपिलधारा और जलाभिषेक अभियान में भी मध्यप्रदेश की धरती को हराभरा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • -पंचायत, ग्रामीण विकास मंत्री श्री भार्गव ने बताया कि पृथ्वी की प्राकृतिक समृद्धि को संरक्षित करने के लिये शासन पूर्णत: सजग है। इसके लिये ग्रामीण विकास की योजनाओं को अवसर के रूप में लेते हुए ऐसे कार्य कराए जा रहे हैं ताकि हमारी प्राकृतिक संपदा संरक्षित हो साथ ही सरल भी हो।
  • - महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम-म.प्र. के अंतर्गत आने वाली गतिविधियां भूमि सुधार-संरक्षण को समर्पित हैं। इससे प्रदेश की पड़त भूमि भी लगातार संवर रही है। भूमि की उत्पादकता बढ़ रही है। इन कार्यों से निश्चित ही भविष्य में सुखद परिणाम आएंगे। भूमि और जल संरक्षण के कार्यों से खेती समृद्ध होगी और खाद्य की सुरक्षा भी बढ़ेगी।


  • - प्रदेश में नंदन फलोद्यान उपयोजना के अंतर्गत 23578 हेक्टेयर क्षेत्र में 65 लाख से ज्यादा फलदार पौधों का रोपण किया गया है। जल संरक्षण के कार्यों के अंतर्गत तालाबों और स्टॉपडेम का निर्माण किया गया है ताकि भूजल के स्तर में सुधार आये। निजी और शासकीय भूमि पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया गया है।
  • -कपिलधारा योजना के अंतर्गत सिंचाई के माध्यम से धरती की नमी बचाने का कार्य जारी है। इससे एक लाख 43 हजार से ज्यादा परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ हुआ है साथ ही उनकी भूमि की हरियाली भी सुनिश्चित हुई है।
  • -जलाभिषेक अभियान के अंतर्गत जलसंरचनाओं के निर्माण, जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने की गतिविधियां संचालित है। धरती का सौंदर्य बढाने वाली नदियों को दोबारा जीवित करने का अभियान शुरू किया गया है। हाल ही में पन्ना जिले की मिढ़ासन नदी और रतलाम जिले की जामढ़ नदी को जीवन देने की शुरूआत हुई है।


  • -महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम-म.प्र. की उपयोजनाओं से भूमि का श्रृंगार हो रहा है। कपिलधारा से सिंचाई, नंदन फलोद्यान उपयोजना से फलदार पौधों का रोपण, भूमि-शिल्प उपयोजना से पड़त भूमि को खेती योग्य बनाने का कार्य, शैल पर्ण उपयोजना में पहाड़ियों और टीलों का उपचार, सहस्त्र धारा उपयोजना में खेतों को पानी देने के कार्य जारी है। इसके अलावा नदी-नालों पर श्रृंखलाबद्ध जल सरंचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।


रोजगार गारंटी में प्रदेश शीर्ष पर
मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव कहते हैं कि मध्य प्रदेश में ग्रामीण विकास की प्रगति देश के अधिकांश राज्यों से बेहतर होने के कारण ही केन्द्र सरकार केन्द्रीय राशि में इजाफा कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना तथा राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम में मध्य प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में शीर्ष स्थान पर रहा है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार स्वर्ण जयंती ग्राम रोजगार योजना में वर्ष 2003-04 में कुल उपलब्ध राशि का 98 प्रतिशत उपयोग किया गया था। जबकि वर्ष 2007-08 में उपयोगिता प्रतिशत 99.15 प्रतिशत रहा है। इस योजना के अन्तर्गत वर्ष 2003-04 में 145 करोड रुपए के क्रेडिट मोबेलाइजेशन के विरूद्ध वर्ष 2007-08 में 263 करोड रुपए के लक्ष्य की पूर्ति की गई है । इसी योजना में वर्ष 2003-04 में 2 लाख 23 हजार स्व-सहायता समूह के विरूद्ध 2007-08 में 3 लाख 11 हजार समूह लाभान्वित हुए है । इंदिरा सागर योजना के अन्तर्गत वर्ष 2007-08 में केन्द्राशं से रुपए 108.90 का पूर्ण व्यय हुआ है तथा 60222 पात्र आवासहीनों को इस योजना से लाभान्वित किया गया है।

हर गांव से हर पल साझा होगी जानकारी
ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत सूचना के प्रभावकारी प्रभाव को सुनिश्चित करने की दृष्टि से एवं विभागीय कार्य को सुव्यवस्थित प्रकार से चलाने के लिये विभाग के अंतर्गत कम्प्युटरीकरण का कार्य किया गया है -

  • जिला पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण - भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रवर्त्तित योजना के अंतर्गत जिला पंचायतों ने लेन आधारित कम्प्यूटरीकरण हेतू प्रदाय की गई थी। 38 जिला पंचायतों में एक पेंटियम सर्वर तथा चार पेंटियम क्लाईंट कम्प्यूटर प्रदाय किये जाकर लेन सहित स्थापित किये जा चुके हैं । यह कार्य भारत सरकार के राष्टीय सूचना विज्ञान केंद्र से संबध्द निक्सी द्वारा संपादित करवाया गया है ।
  • -नवनर्मित सात जिलों के लिये लेन आधारित कम्प्यूटरीकरण करने के लिये प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है । जिसपर स्वीकृति प्राप्त हो चुकि है एवं संबंधित जिला पंचायत द्वारा कम्प्यूटरीकरण की कार्यवाही की जा रही है ।
  • जनपर पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण- जिला पंचायतों के कम्प्यूटरीकरण कार्य के साथ साथ विभाग ने प्रस्तावित किया था कि अविभाजित मध्यप्रदेश के सभी ४५९ जनपद पंचायत के कम्प्यूटरीकरण कार्य हेतु भारत सरकार केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत स्वीकृति दे । विभाजित मध्यप्रदेश के सभी 313 जनपद पंचायतों में कम्प्यूटर लगाने के लिये भारत सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदाय की गई है । कम्प्यूटर क्रय एवं स्थापना की कार्यवाही संबंधित जिला पंचायतों द्वारा की जा रही है ।
  • ग्रामीण विकास सूचना नेटवर्क का विकास - भारत सरकार को यह प्रस्तावित किया गया था कि सभी जिलों एवं विकास आयुक्त मुख्यालय में कम्प्यूटरीकरण के साथ साथ प्रत्येक जिला पंचायत को सीधे दूरसंचार नेटवर्क से जोडृने के लिये व्ही सेट उपकरण की स्वीकृति दी जाये । भारत सरकार द्वारा प्रथम चरण मे विकास आयुक्त मुख्यालय, नरसिंहपुर, रायसेन तथा होशंगाबाद जिले हेतु व्ही सेट लगाये जाने की स्वीकृति दी गई थी । व्ही सेट लगाये जाने का कार्य राष्टÑीय सूचना विज्ञान केद्र नई दिल्ली द्वारा संपादित किया गया है ।
  • ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अंतर्गत कम्प्यूटरीकरण - ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अंतर्गत शासन द्वारा 51 स्थानों पर कम्प्यूटर प्रदाय करने हेतु स्वीकृति दी है । इन स्थानों पर कम्प्यूटरीकरण का कार्य पूर्ण किया गया है ।
  • एप्लीकेशन साफटवेयर का विकास - केन्द्र प्रवर्तित ग्रामीण विकास योजनाओं के मानिटरिंग तथा जानकारी के आदान प्रदान के लिये भारत सरकार द्वारा एप्लीकेशन साफटवेयर का विकास राष्टीय सूचना विज्ञान केंद्र दिल्ली द्वारा किया गया है । यह साफटवेयर तीन जिला पंचायतों को परीक्षण के तौर पर डाटा प्रविष्टिकरण हेतु उपलब्ध हुआ है । इस साफटवेयर पर जिला पंचायतों के कर्मचारियों का प्रशिक्षण किया जाकर डाटा प्रविष्टीकरण का कार्य किया जा रहा है।

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बुधवार, 22 अगस्त 2012

21 सितम्बर को रखी जाएगी देश के पहले बौद्ध विश्वविद्यालय की नींव


भाजपा के राष्ट्रीय नेता मुरलीमनोहर जोशी भी वक्ताओं में होंगे शामिल

मुख्य संवाददाता, भोपाल। देश में अपनी तरह के पहले बौद्घ विश्वविद्यालय का भूमिपूजन सांची में 21 सितंबर को होगा। इस मौके पर देश और विदेश के बौद्घ धर्म को मानने और जानने वाले चिंतक मौजूद रहेंगे। वहीं, भोपाल में 22 तारीख से विश्व का पहला दो दिवसीय धर्म-धम्म सम्मेलन होगा।
इसमें थाईलैण्ड की राजकुमारी महाचक्री शिरिन्धौरा सहित चालीस देशों को 120 से ज्यादा चिंतक शिरकत करेंगे।संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने पत्रकारवार्ता में बताया कि सरकार इस विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देना चाहती थी। इसके लिए केन्द्र सरकार से पत्राचार भी किया गया लेकिन किन्हीं वजहों से यह संभव नहीं हो सका। अब इसे विशेष विश्वविद्यालय के तौर पर बनाया जा रहा है। इसके लिए सांची में भूमिपूजन 21 सितम्बर को होगा। इसके लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति को भी आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही भोपाल में धर्म-धम्म सम्मेलन किया जाएगा। इसके लिए विदेश मंत्रालय सहित श्रीलंका की महाबोधि समिति और सेंटर फॉर द स्टडी आॅफ रिलीजन एण्ड सोसायटी (सीएसएसआर) सहयोग कर रही है। सम्मेलन के साथ एक सप्ताह की कला कार्यशाला तथा बौऋमत पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
सीएसएसआर के संचालक डॉ.विनय सहस्त्रबुद्घे ने बताया कि सांझी विरासत को बल देने के उद्देश्य से सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन के लिए दलाई लामा को भी आमंत्रित किया गया है। उद्घाटन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थाईलैण्ड की राजकुमारी महाचक्री शिरिन्धौरा होंगी। जबकि, अमेरिका से प्रोफेसर आनंद गुरूगे और डॉ.डेविड फ्रॉले, श्रीलंका से पूज्य बनागला उपतिस्सा नायक थेरो, भारत से डॉ.प्रकाश अम्बेडकर और डॉ.मुरली मनोहर जोशी वक्ताओं के तौर पर भाग लेंगे।

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

एसएमएस से मिलेगी ट्रेन की एक्जेक्ट लोकेशन


मुख्य संवाददाता, भोपाल। राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों के बाद अब रेलवे 2013 के अंत तक सभी सुपर फास्ट और मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की जानकारी यात्रियों को उनके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए उपलब्ध कराएगा। इसमें ट्रेन कितनी देरी चल रही है और कितने समय में स्टेशन पर पहुंचेगी इसकी जानकारी मिल जाएगी। रेलवे और आईआईटी कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम ने द रीयल टाइम ट्रेन रनिंग इंफार्मेशन सिस्टम तकनीक विकसित की है, जिसमें एसएसएम के जरिए ट्रेन की जानकारी देने की तकनीक विकसित की गई है। वर्तमान में राजधानी, दूरंतो एवं शताब्दी जैसी गाड़ियों के लिए यह सिस्टम लगा हुआ है।

पूछताछ नम्बर की झंझट से छुटकारा
मौजूदा स्थिति में रेलवे 139 पूछताछ नंबर पर यात्रियों को ट्रेन की जानकारी उपलब्ध कराता है। नंबर लगाने के बाद भी सही जानकारी न मिलने से यात्री अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं और रेलवे को अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए रेलवे सभी ट्रेनों में जीपीएस सिस्टम लगाने जा रहा है। इससे ट्रेन की जानकारी हासिल करने के लिए यात्रियों को ट्रेन नंबर लिखकर 09415139139 अथवा 09664139139 पर एसएमएस करना होगा और कुछ ही समय के बाद यात्री को ट्रेन की जानकारी मिल जाएगी।

एक ट्रेन में 50 हजार का खर्चा
रेलवे की यात्रियों को 2013 के अंत तक सभी ट्रेनों की जानकारी एसएमएस के जरिए उपलब्ध कराए जाने की योजना है। रेलवे को प्रत्येक ट्रेन में द रीयल टाइम ट्रेन रनिंग इंफार्मेशन सिस्टम लगाने में करीब 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे। एसएमएस से ट्रेन की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए डाटा प्राप्त करने दिल्ली में कलेक्शन सेंटर स्थापित किया जाएगा। 2013 के अंत तक सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद प्रत्येक गा़ड़ी की जानकारी एसएमएस से मिल सकेगी।

ट्रेन की स्पीड भी पता चलेगी
उक्त दोनों नंबरों में किसी एक नंबर पर एसएमएस करने पर ट्रेन का नाम, समय, किस स्टेशन से कितनी दूरी एवं कितनी लेट है किस स्थान पर कितनी गति से चल रही है के साथ ही देरी से चलने की सूचना भी मिलेगी।

एमबीए कॉलेजों में एडमीशन तिथि बढ़ी


 भोपाल। प्रदेश के निजी और सरकारी कॉलेजों में संचालित एमबीए और एमसीए पाठ्यक्रमों में प्रवेश की तिथि बढ़ा दी गई है। स्टूडेंट्स अब आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन 22 अगस्त तक करा सकेंगे जबकि आवंटित सीटों पर 28 अगस्त तक प्रवेश ले सकेंगे। यह पात्रता केवल प्रथम चरण की काउंसलिंग में शामिल होने वाले उन स्टूडेंट्स के लिए होगी जिन्हें सीट या कॉलेज आवंटित हो चुका है। छात्रों को २२ अगस्त के पहले अपग्रेडेशन का विकल्प चुनना होगा। इसके बाद 24 और 28 अगस्त के बीच प्रवेश लेना होगा। छात्रों का कहना है कि आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन की तारीख एक हफ्ते के लिए और बढ़ा देना चाहिए ताकि अधिक संख्या में छात्र इसमें हिस्सा ले सकें।

आ गए सरकार के महंगें प्लॉट....बीडीए के मिसरोद प्लाटों की बुकिंग शुरू


मुख्य संवाददाता, भोपाल। भोपाल विकास प्राधिकरण की सरदार वल्लभ भाई पटेल आवासीय योजना (मिसरोद फेज-2) के तहत 495 प्लॉट्स की बुकिंग आज से शुरु हो गई है। जो आॅनलाइन और आॅफलाइन दोनों तरीकों से हो रही है। बुकिंग की अंतिम तिथी 5 सितम्बर रखी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस योजना में प्लॉट्स की कीमत 1550 रुपए प्रति वर्ग फीट तय की गई है। प्लॉट की कीमत की 10 फीसदी राशि जमा कर बुकिंग कराई जा सकती है। इस योजना के साथ ही पहली बार आॅनलाइन सुविधा शुरू की जा रही है। बुकिंग राशि भी एक दर्जन से अधिक बैंकों के क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से आॅनलाइन जमा कर बुकिंग कराई जा सकती है। बीडीए की वेबसाइट बीडीए. ओआरजी. इन पर आॅनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। 230 एकड़ जमीन पर विकसित की गई इस योजना में करीब 3 हजार 668 प्लॉट निकले हैं। लेकिन अभी केवल 495 के लिए ही बुकिंग की जा रही है। योजना में 645.6 वर्ग फीट के 95 प्लॉट, 968.4 वर्ग फीट के 200 और 1452.6 वर्ग फीट के 200 प्लॉट बुकिंग के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।





सोमवार, 20 अगस्त 2012

पूर्वजों की यादों की तरह सहेंजेगे पुरातन स्मारकें- लक्ष्मीकांत शर्मा





  • पुरातन स्मारकें हमारे पूर्वजों की धरोहर की तरह होती हैं। हम इन्हें सहेजने और संरक्षित करने के लिए वचनवद्ध हैं। इस काम में न तो कोताही बरती जाएगी और न ही धन- संसाधनों की कमी आने दी जाएगी। मध्यप्रदेश के पुरातात्विक स्मारकों के संरक्षण के लिए 13 वें वित्त आयोग द्वारा 175 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से प्रदेश के पुरातात्विक स्मारकों एवं धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाएगा। संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने यह बात स्वराज भवन में  'The Grandeur of Granite Shiva-Yogini Temples of Vyas Bhadora'' पुस्तक के विमोचन अवसर पर कही। लेखक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अशोक शाह हैं।                                                                           


प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल

संस्कृति मंत्री ने कहा कि व्यास भदौरा और आशापुरी मंदिर समूह को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि व्यास भदौरा और आशापुरी में मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है। उन मंदिरों के अतिरिक्त अन्य स्मारकों के विकास के लिए डीपीआर ौयार करवाया गया है। श्री शर्मा ने श्री अशोक शाह के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग हमेशा उनका सहयोग लेता रहेगा। श्री शर्मा ने कहा कि व्यास भदौरा के मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता, उनका ग्रेनाइट पत्थरों से निर्माण है।

पुस्तक के लेखक श्री अशोक शाह ने बताया कि ग्राम व्यास भदौरा छतरपुर जिले की चन्दला उप-तहसील में स्थित है। राज्य शासन द्वारा यहाँ के 13 मंदिर समूह में से दो मंदिर को वर्ष 1990 में राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। यहाँ के जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का पुनरूद्धार किया जा रहा है। मंदिरों के शिल्प को देखने के बाद यह ज्ञात हुआ है कि व्यास भदौरा के मंदिर खजुराहो में निर्मित मंदिरों के पूर्व बनाए गये थे। ऊँची जगती पर बने मंदिर क्रमांक एक और दो पूर्वाभिमुख होते हुए शिव को समर्पित है। संभवत: यह पहला मंदिर समूह होगा जो तीन तरफ सोपान योजना से युक्त है। कठोर ग्रेनाईट पत्थरों से निर्मित इन मंदिरों को बनवाने में अधिक श्रम लगा होगा, यही कारण है कि बाद में चन्देलों ने ग्रेनाईट के पत्थरों से मंदिर नहीं बनवाया। संभवत: व्यास भदौरा के मंदिर समूह चन्देलों के मूर्ति एवं मंदिर निर्माण के शिल्प की कहानी के प्रथम सोपान हैं।

पुस्तक में चार अध्याय हैं, जिनमें भूमिका, ऐतिहासिक जानकारी मंदिर स्थापत्य के विकास की गाथा तथा कला एवं प्रतिमा विज्ञान के बारे में सारगर्भित जानकारी उपलब्ध है। पुस्तक में 71 बहुरंगी छायाचित्र भी हैं। कार्यक्रम में संचालक खेल एवं युवा कल्याण डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव और संचालक संस्कृति श्रीराम तिवारी भी उपस्थित थे। 

शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

शर्म करो....तुम्हारी मां कैसे घर में सुरक्षित है


मजाक बनी शिक्षिका
भोपाल। हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में मंगलवार को एक शिक्षिका के साथ हुई शर्मनाक घटना को कॉलेज प्रबंधन ने मजाक में लिया है। गुरुवार को हुई कॉलेज की अनुशासन समिति व शिकायत निवारण समिति ने इस मामले को लेकर बैठक हुई। ऐसे बिगड़े छात्र के रसूख के आगे कॉलेज की समितियां नतमस्तक नजर आ रहीं हैं। छात्र को एक राजपत्रित अधिकारी का ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। घटना स्पष्ट होने के बाद भी छात्र को बकायदा नोटिस दिया जा रहा है। समिति ने छात्र को नोटिस जारी कर उससे एक सप्ताह में जवाब मांगा है। बताया जाता है कि समिति ने आरोपी छात्र  के खिलाफ उचित कार्रवाई की अनुशंसा की है। अगर जवाब से प्रबंधन संतुष्ट नहीं हुआ तो छात्र को निष्कासित किया जा सकता है। अंतिम फैसला एक सप्ताह बाद ही लिया जाएगा। गौरतलब है कि मंगलवार 14 अगस्त को कॉलेज में छात्र ने शिक्षिका को टॉयलेट में बंद कर दिया था।

गुरुवार, 16 अगस्त 2012

बाबा! ऐसी सरकार ढूंढों.....रामदेव आंदोलन से शर्मशार देश


-प्रमोद त्रिवेदी

हम सरकार के खिलाफ हैं या कहीं अन्याय हो रहा तो अनशन-आंदोलन-धरना करना विरोध का तरीका होता रहा है और आगे भी विरोध का सशक्त तरीका रहेगा। लेकिन बाबा रामदेव ने नई पीढ़ी में एक अलग ही तरह के ‘फिक्स’ धरना-आंदोलन की नींव रखी दी। बाकायदा मंच से घोषणा करके और प्रेस कांफ्रेस बुलाकर कहा कि अब जब तक लोकसभा चुनाव नहीं हो जाते वे आंदोलन-धरना नहीं करेंगे। आंदोलन खत्म करना है या स्थगित करना है, ये फैसला तो रामदेव को लेना था। लेकिन इतने महीनों या दिनों तक बताना यानि टाइम फिक्स आंदोलन की नींव डालने का प्रयास तो धरना-आंदोलन जैसे शांतिपूर्ण हथियार को कुंठित करने का प्रयास था। निज स्वार्थ के लिए जन भावना से खेलना की पराकाष्ठा ही कहेंगे कि दूसरी बार के आंदोलन को भी नौटंकी साबित कर दिया। किसी ने नहीं कहा था कि बाबा अब अनशन करो या आगे इतने दिनों तक मत करो। बाबा का फैसला था कि धरना देना है तो दिया और आगे बढ़ाना था तो बढ़ाया और फिर खत्म करना तो खत्म किया। हम बाबा रामदेव के विरोधी नहीं बल्कि उनकी मांगों के पुरजोर समर्थक हैं। लेकिन अजीबों-गरीब घोषणा कि अब चुनाव तक आंदोलन नहीं होगा, बाबा की नियत पर कई सवाल खड़े करता है। इस बार बाबा महिलाओं के कपड़े पहनकर नहीं भागे, बल्कि आंदोलन और आंदोलनों की दम पर देश को आजाद कराने वाले लोगों की इज्जत तार-तार करके कूच कर गए। ऐसे बाबा स्वच्छ सरकार, भ्रष्टाचार का विरोध, कालाधन की वापिसी जैसी बातें करते हैं तो लगता है कि बाबा को फिल्मों में होना चाहिए। हर बार एक नया अभिनय। इस बार होटल में सरकार के साथ फिक्सिंग कि जनता आ गई है इसलिए एक दिन आंदोलन की नौटंकी होगी। इसके बाद जन सैलाब को देखकर सरकार से किए गए वादे से मुकरना। फिर महिला के कपड़े साथ में रखकर आंदोलन करने बैठना (तभी तो लाठी पड़ते ही महिला के कपड़े पहनकर भाग सके, वरना इतने जल्दी महिला के कपड़ों का इंतजाम कैसे होता?)। फिर आंदोलन करना और अचानक आंदोलन स्थगित करते हुए चुनाव तक यानि 2014 तक कोई भी आंदोलन न करना की घोषणा।

हो सकता है कि व्यक्तिगत तौर पर कोई अन्ना या रामदेव को पसंद न करे, लेकिन ये लोग देश का भविष्य बदलने का मद्दा रखते हैं। इनकी एक भी मांग ऐसी नहीं है, जिसे हर हिंदुस्तानी जायज करार न दे या समर्थन न दे। लेकिन मांगों के साथ जब राजनीति होती है तो जनता का मन भी दो धड़ों में बंट जाता है। फिर इतिहास गवाह है कि जनता का मन भटक जाए तो किसी भी आंदोलन या अभियान को सफल नहीं बनाया जा सकता।
अन्ना एण्ड कम्पनी ने भी पहले आंदोलन के समय एक गलती के बीज बोए जो उनके दूसरे आंदोलन की असफलता के सूत्रधार बने। पहले आंदोलन में

अन्ना टीम ने केंद्र सरकार को कम, कांग्रेस को ज्यादा टारगेट किया। भ्रष्टाचार को भूल केवल सरकार को झुकाने का प्रयास किया। मंच पर कांग्रेस के अलावा बाकि दलों के भ्रष्ट नेता आए तो अन्ना टीम ने स्वागत किया। मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के नेताओं के भ्रष्टाचार को जानबूझकर नजरअंदाज किया। जनलोकपाल के लिए केवल कांग्रेस पर दबाब बनाया और भाजपा सहित अन्य दलों के खिलाफ मुंह नहीं खोला। इसके साथ ही अंदरूनी तौर पर साम्प्रदायिक दल आरएसएस का समर्थन लिया। यहीं से अन्ना के आंदोलन की नींव में कमजोर पत्थर पड़ गए। परिणाम में दूसरे आंदोलन जन समर्थन नहीं मिला। इसके बाद समझ में आया कि जनलोकपाल बिल पास न होने के लिए कांग्रेस ही नहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी जिम्मेदार है। संसद में कोई भी राजनीतिक पार्टी नहीं चाहती कि जनलोकपाल बिल आए या पास हो। लेकिन जब तक अन्ना समझ सके, बहुत देर हो चुकी थी। लोगों को लगने लगा कि कहीं टीम अन्ना पक्षपात करके हमें गुमराह तो नहीं कर रही। यहीं बात दूसरे आंदोलन के लिए बल्कि देश को नई दिशा देने वाले आंदोलन के लिए विष साबित हुई। दूसरे आंदोलन में टीम अन्ना ने गला फाड़कर कांग्रेस, भाजपा सहित सभी पार्टियों के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अनशन पर बैठे तो लगा था कि पूरा देश साथ हो जाएगा, लेकिन न तो सरकार को कोई असर पड़ा और न ही विपक्षी दल ने गर्दन को जुम्बिश दी। परिणाम आंदोलन टांय-टांय फिस्स। फिर नई रणनीति और घातक साबित हुई। अन्ना आंदोलन के विरोधी नेताओं को मौका मिला कि आंदोलन की दम पर अन्ना टीम सत्ता हथियाने के सपने देख रही है। इसीलिए जब दाल नहीं गली तो राजनीति में उतरने का एलान कर दिया।
खैर, लोगों को लगा था कि अन्ना हजारे के बाद शायद रामदेव जनभावना को समझते हुए लोकपाल के लिए अड़ेंगे। बाबा के साथ अच्छी बात ये है कि वे खुद की दम पर चलते हैं और धन-दौलत की भी कमी नहीं है। अन्ना की सारी रणनीति ही टीम की ताकत और समझ पर निर्भर रहती है। रामदेव कभी कालाधन वापिस लाने की बात करते हंै, तो कभी सरकार से लिखित समझौता कर लेते हैं। महिलाओं के वस्त्र पहनकर धरना स्थल से भागते हैं तो कभी अनशन न करने की ‘डेट फिक्स’ कर देते हैं। ऐसे में रामदेव का अन्दोलन कहीं से भी जन आंदोलन नहीं रहा, बल्कि रामदेव कम्पनी का एक प्रॉडक्ट रह गया।
कुछ बुजुर्गों से सुना है कि महात्मा गांधी के अनशन से इंग्लैण्ड में बैठे गोरे थर्राते थे। ढेर सारी किताबों में भी ऐसे ही सच्चे किस्से छप चुके हैं और छपते भी रहते हैं। गुलाम मुल्क के किस्सों के बाद पाकिस्तान की मांग को लेकर भी अनशन, धरने और बाद में दंगे हुए। बन गया एक और मुल्क पाकिस्तान। लेकिन बाबा रामदेव के आंदोलन के बाद की गई घोषणा ने सरकार को अभय कर दिया और आंदोलन के महत्व को शून्य। अन्ना के पीछे हटने के बाद दूसरा झटका बाबा रामदेव की आंदोलन न करने की घोषणा, शांतिपूर्ण आंदोलनों के महत्व को धूमिल कर रहीं हैं। जन आवाज उठाने का शांतिपूर्ण हथियार इस तरह कुंठित होता गया तो एक दिन लोकतंत्र के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।

सोमवार, 13 अगस्त 2012

भाईजी के रिश्तेदारों की भाईगीरी


दंबगई


109 परिवारों के प्लॉट की फर्जी तरीके से हथियाई

एक्सक्लूसिव

इंट्रो:
रायसेन जिले के सांची में 109 परिवारों ने घर बसाने के लिए प्लॉट खरीदे, लेकिन भूमाफियाओं ने उनकी गाढ़ी कमाई के रुपए से खरीदे प्लॉटो को हड़प लिया। यह कारनामा किया प्रदेश के वित्तमंत्री राघवजी भाई के भतीजे त्रिलोकजी सावला, बेटे लोकेशजी सावला ने। खास बात ये है कि इन प्लाट स्वामियों ने बाकायदा रजिस्ट्री के बाद नामांतरण भी करवा लिया था, बाबजूद रसूख की दम पर कृषि भूमि बताकर लाखों रुपए एकड़ की जमीन मात्र 3 लाख रुपए में फर्जी तरीके से खरीद ली गई। अब मजबूर प्लॉट मालिक कलेक्टर, एसपी के दरबार में गुहार लगा रहे हैं, लेकिन न्याय मिलने की जगह पुलिस धमका रही है। प्रदेश में राजनीतिक भूमाफियाओं की करतूत और मजबूर 109 परिवारों की दास्तां बताती प्रमोद त्रिवेदी की खास खबर

भूमाफियाओं से सख्ती से निपटने का दावा करने वाली सरकार के वित्तमंत्री राघवजी भाई के सगे रिश्तेदारों पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुष्ट सबूतों और फरियादियों की शिकायत के मुताबिक जिस जमीन पर 109 प्लॉट काटकर रजिस्ट्री करके बेंचे गए उसे भाईजी के बेटे और भतीजे ने चंद रुपयों में फिर से खरीद लिया। यानि भूमि को पहले 109 लोगों को बेचा गया और बाद में उसी भूमि को भाईजी के रिश्तेदारों को। जबकि इन प्लॉटों का बाकायदा नामांतरण भी हो चुका है और जमीन के नामांतरण की प्रति निकाली जाती है तो इसमें असली भू स्वामियों यानि प्लॉट मालिकों का नाम दर्ज है। भूमि मालिक चतरसिंह ने फर्जीबाड़ा किया, लेकिन रसूखदार खरीददारों ने राजनीतिक ताकत के दम पर इस जमीन को चुपचाप खरीद लिया गया। इतना ही नहीं कृषि भूमि बताकर रहवासी जमीन को खरीदने के बाद उसके आस-पास बाउंड्री भी बनवा दी गई। आवेदकों के अनुसार खरीददार यानि भाईजी के रिश्तेदार, ताकत की दम पर प्लॉटों पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं।
दो बार रजिस्ट्री
1992-93 में विभिन्न साइजों में 109 प्लॉट काटकर लोगों को बेच दिए गए। प्लॉट मालिकों ने अपने प्लॉटों पर तार फेंसिंग भी कर ली। इन लोगों ने प्लॉटों पर निर्माण इसलिए नहीं किया, क्योंकि उस समय वहां पानी, लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं। अचानक 2011 में इनके तार फेंसिंग को हटाकर बाउंड्री का काम शुरु कर दिया गया। इस बारे में प्लॉट मालिकों ने पूछा तो चतर सिंह ने बताया कि नए नियम के मुताबिक वह प्लॉटों के आस-पास बाउंड्री बनवाकर दे रहा है। इन लोगों ने रजिस्ट्रार आफिस में मालूम किया तो इन्हें घपले की जानकारी हुई। 12 मई 1999 को पहले से बिकी हुई जमीन को त्रिलोक और लोकेश ने औने-पौने दाम में खरीद लिया था। जमीन खरीदने के बाद ये लोग शांत रहे और मौके की तलाश में रहे। जैसे ही मौका मिला, लोगों के प्लॉट पर कब्जा करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
00गुण्डे बैठे हैं प्लॉटों पर
प्लॉट मालिकों का कहना है कि हमारे प्लॉटों पर गुण्डे पहरा दे रहे हैं। हमें प्लॉटों पर जाने नहीं दिया जाता और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पुलिस भी हमारी नहीं सुन रही है। ऐसी स्थिति में कोर्ट से ही न्याय मिलने की संभावना है।
00थानाप्रभारी मांग रहे ओरिजनल पेपर
आवेदक सुंदरलाल, रमेश पासी के मुताबिक सांची थाना प्रभारी जांच के नाम पर हमसे सभी उपलब्ध नामांतरण और रजिस्ट्री की ओरिजनल प्रति मांग रहे हैं। हमने कहा कि सत्यापित प्रति देंगे तो दबाब बना रहे हैं कि ओरिजनल पेपर दो। मुझे एसपी साहब ने जांच प्रतिवेदन में ओरिजनल पेपर लगाने को कहा है। आवेदकों के अनुसार ऐसी स्थिति में पुलिस की नियत पर भी शक हो रहा है। हलांकि हमने ओरिजनल पेपर देने से साफ इंकार कर दिया। हम केवल सत्यापित पेपर ही उपलब्ध कराएंगे।
00एसपी अंजान हैं
आवेदकों के आवेदन में स्पष्ट है कि जमीन के खरीददार राघवजी के पुत्र और भतीजे हैं। एसपी का कहना है कि उन्हें ये जानकारी नहीं हैं। इसके अलावा उनका कहना है कि दो पक्षों में झगड़े का अंदेशा है, इसलिए 145 की कार्रवाई की जा रही है। जाहिर है एसपी को दोनों पक्षों का तो पता है, लेकिन वित्तमंत्री के नाम के आगे अंजान बन रहे हैं।
00वित्त विभाग को चूना
इस जमीन की खरीद में वित्तमंत्री के रिश्तेदारों ने राजस्व विभाग को भी चूना लगाया। जिस जमीन को प्लॉट के लिए बेचा गया उसे कृषि भूमि बताकर कैसे खरीदा गया। इसके साथ ही करीबन 50 लाख रुपए एकड़ की जमीन की रजिस्ट्री मात्र डेढ़ लाख रुपए एकड़ दर्शाकर कराई गई। इससे जाहिर है कि रजिस्ट्री स्टाम्प शुल्क में राजस्व विभाग का नुकसान किया गया। इसके साथ ही जमीन खरीदने से पहले सार्वजनिक तौर किसी तरह का इश्तेहार भी नहीं निकाला गया और रजिस्ट्रार ने भी बिना छानबीन के रजिस्ट्री कर दी।
वर्सन
हमने मेहनत की कमाई से प्लाट खरीदे थे, लेकिन मंत्री पुत्रऔर भतीजे ने कब्जा कर लिया। इन लोगों ने प्लॉट की जमीन को कृषि भूमि बताकर गलत तरीके से रजिस्ट्री करवा ली और बाउंड्री बनाकर चौकीदार बिठा दिया है। लाखों रुपए की जमीन को केवल डेढ़ लाख रुपए एकड़ दर्शाकर खरीदने से शासन को रजिस्ट्री शुल्क में भी चूना लगाया। हमने प्रशासन और पुलिस को अपनी शिकायत दी है लेकिन वित्तमंत्री का मामला होने के कारण पुलिस का व्यवहार गलत है। सांची टीआई हमारी ओरिजनल रजिस्ट्री और सारे कागजात मांग रहे हैं। रमेश कुमार पासी, प्लॉट के मालिक।

सांची में दो पक्षों के बीच प्लॉट-जमीन विवाद का आवेदन आया है। उसकी जांच के लिए मैंने एसडीओपी को कहा है। इसके अलावा शिकायत की एक प्रति एसडीएम को भी दी जा रही है। दोनों पक्षों में झगड़ा न हो इसके लिए 145 की कार्रवाई कर रहा हूं। राघवजी भाई के रिश्तेदारों से संबंधित कोई शिकायत मेरे पास नहीं आई है।
 एसपी रायसेन
नियमानुसार पहली रजिस्ट्री मान्य होती है। दूसरी रजिस्ट्री को स्वमेव अमान्य करार दिया जाता है। इसके बाद अगर पहले भूमि बेचने की जानकारी के बाद भी खरीदी गई तो खरीददार के विरुद्ध भी मामला बनता है। बेचने वाले के खिलाफ तो धोखाधड़ी का मामला बनना तय है।
सुभाष बोहत, कानूनविद।

दुर्भाग्य...घोषणा की पहली ट्रेन भी 8 माह बाद चलेगी



 पहली ट्रेन बेंगलुरु एक्सप्रेस
रेल बजट में मध्यप्रदेश को तीन ट्रेनों की सौगात मिली, लेकिन अभी तक एक भी शुरू नहीं हो सकी है। यह घोषणाएं तृणमूल कांगे्रस के कोटे से मंत्री रहे दिनेश त्रिवेदी ने की थी। दिनेश त्रिवेदी ने सामान्य श्रेणी के किराए में कुछ पैसों की बढ़ोतरी की थी, जो जनता को तो रास आई लेकिन तृणमूल की महात्वाकांक्षा को रास नहीं। परिणाम में एक घटिया राजनीतिक घटनाक्रम के चलते रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को हटाकर ममता बनर्जी के पिठ्ठु मुकुल राय को रेल मंत्रालय के पद से नवाजा गया। ये वही मुकुल राय हैं जो एक ट्रेन दुर्घटना का जायजा लेने गए तो ट्रेन से उतरने के लिए जूतों के नीचे कालीन बिछाई गई। एक दुर्घटना के बाद प्रधानमंत्री के कहने पर भी जायजा लेने नहीं गए। ममता बनर्जी और मुकुल राय के पास रेल मंत्रालय से संबंधित न तो कोई योजना थी और न ही कोई सौगात। मुकुल राय ने ममता के आदेश पर सामान्य श्रेणी की बढोतरी रद्द कर बाकी सब पहले की तरह दिनेश त्रिवेदी की घोषणाओं पर अमल किया। इतना ही नहीं तत्काल टिकिट में आम आदमी की परेशानी दूर करने और दलालों का हस्तक्षेप खत्म करने में भी दिनेश त्रिवेदी की कार्ययोजना ही लागू की गई। लेकिन दिनेश त्रिवेदी की घोषणा वाली ट्रेनों को समय पर नहीं चलाया जा सका। इसका कारण है मुकुल राय की अनुभव हीनता और ममता का अडंगा। ऐसे में जो डबल डेकर जुलाई में शुरू होती, वो जनवरी से पहले शुरू नहीं हो सकती। सब जानते हैं कि अफसर भी मंत्री की ताकत और समझ देखकर काम करते हैं। रेल मंत्रालय भी अपवाद नहीं हो सकता। खैर घोषणा के बाद तो केवल इंतजार ही किया जा सकता है। फिलहाल रेल मंत्रालय में भूतझोलकिया के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि  रेल बजट में मिली तीन ट्रेनों में से सबसे पहले इंदौर-यशवंतपुर (बेंगलुरू) एक्सप्रेस चलाई जाएगी। इसके बाद इंदौर-भोपाल/हबीबगंज डबल डेकर एसी एक्सप्रेस और इंदौर-रीवा एक्सप्रेस का नंबर आएगा। माना जा रहा है कि यदि कोई अड़ंगा नहीं आया तो अक्टूबर या नवंबर तक यशवंतपुर एक्सप्रेस चला दी जाएगी। रेलवे बोर्ड यशवंतपुर एक्सप्रेस के लिए कोच फैक्टरी कपूरथला को रैक बनाने का आॅर्डर दे चुका है। उच्च पदस्थ अधिकारी के अनुसार सबसे पहले इंदौर को यशवंतपुर एक्सप्रेस ट्रेन मिलने की ज्यादा संभावना है। इसके बाद भोपाल/हबीबगंज डबल डेकर एसी एक्सप्रेस और रीवा एक्सप्रेस मिलेगी। यशवंतपुर एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से चलाया जाना है। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद रेल कोच फैक्टरी में 19 एलएचबी कोच तैयार किए जा रहे हैं। सितंबर अंत तक रैक तैयार हो जाएगा। फिर रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद कभी भी ट्रेन चलाई जा सकती है। एलएचबी रैक तीव्र गति से दौड़ सकता है। आरामदायक और सुंदर होने के साथ इसके डिब्बे दुर्घटना के दौरान एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते।