मुख्य संवाददाता, भोपाल। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में जल्दी ही टेली-मेडिसिन सुविधा शुरू होगी। पहले चरण में भोपाल, इन्दौर, ग्वालियर और जबलपुर के मेडिकल कॉलेजों में तथा दूसरे चरण में रीवा, सागर के मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था शुरू होगी। टेली-मेडिसिन के बाद यह मेडिकल कॉलेज रिर्सोस सेंटर के रूप में काम करेंगे और शासकीय चिकित्सालय इनसे संबद्ध रहेंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आज यहाँ की गयी चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा में दी गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया और मुख्य सचिव आर. परशुराम भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने बैठक में कहा कि मेडिकल कॉलेजों में हृदय रोग, कैंसर रोग जैसी गंभीर बीमारियों के ईलाज की विशेषज्ञ सुविधाएं स्थापित की जायें। मेडिकल कॉलेजों में अलग से विभाग बनाये जायें। इन रोगों के लिए प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज में एम्स की तरह हर बीमारी के इलाज की व्यवस्था की जाये तथा अन्य मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग रोगों की सुपर-स्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध करवायी जायें जिससे गरीब लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिल सकेगी। उन्होंने निर्देश दिये कि शासकीय अस्पतालों में मरीजों के लिए जेनेरिक दवाइयाँ खरीदी जाय। साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध करवाने का कार्य समय-सीमा में किया जाए।
बताया गया कि चिकित्सा महाविद्यालयों को नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। चिकित्सा महाविद्यालयों में बीते छह माह में सहायक प्राध्यापकों सहित 150 पद भरे गए हैं। संचालनालय स्तर पर निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग और समीक्षा के लिए प्रोजेक्ट सेल बनाया जाएगा। मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रबंधन के लिए हास्पिटल मैनेजमेंट विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए आॅनलाईन कांउसलिंग की गयी है। बैठक में चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के लिए की गयी कारार्वाई की जानकारी दी गई। बैठक में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा अजय तिर्की और प्रमुख सचिव वित्त अजयनाथ सहित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
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