गृहमंत्री ने ट्रेनिंग सेंटर में अधिकारियों से कहा- दो साल रहने पर मनपसंद पोस्टिंग दी जाएगी
प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल। दो साल ट्रेनिंग सेंटर में रहने पर मनपसंद पोस्टिंग का खुला आॅफर। ये किसी शॉपिंग मॉल या लॉटरी सेंटर का नहीं मध्यप्रदेश का गृहमंत्री का पुलिस अधिकारियों को दिया आॅफर है। ये अलग बात है कि इस आॅफर के साल पूरे होने तक चुनाव हो चुकेंगे और शायद बहुत कुछ बदलने के साथ आॅफर भी बदल जाएं। सबसे बड़ी बात ये है कि गृहमंत्री के आॅफर से आईपीएस की सर्विस रूल मेल नहीं खाती है। यानि अफसर की पसंद नहीं होनी चाहिए और न पसंद पर जिला या क्षेत्र मिलना चाहिए। ये सब पक्षपात की श्रेणी में आता है और निष्पक्ष सेवा के लिए ऐसी शर्ताें को लागू नहीं किया जा सकता। बरहाल गृहमंत्री के आॅफस से जाहिर हो गया कि मंत्री की मर्जी से पुलिस विभाग के अफसरों की पोस्टिंग नहीं होती है। मतलब यहां भी नौकरशाही हावी है या फिर डॉयरेक्ट मुखिया के इशारे पर ही काम होते हैं। जाहिर है गृहमंत्री नाम के रह गए हैं।गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ट्रेनिंग मुख्यालय भोपाल में सागर, इंदौर, रीवा, पचमढ़ी, छिंदवाड़ा, तिथरा, उमरिया सहित सभी ट्रेनिंग सेंटर की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पुलिस और एसएएफ की ट्रेनिंग में नैतिक शिक्षा को भी शामिल करने पर जोर दिया। वो भी जानते हैं कि पुलिस नहीं जानती कि नैतिकता किस चिड़िया का नाम है।
00ये भी दिए निर्देश
बकौल गृहमंत्री ट्रेनिंग सेंटर में दो वर्ष कार्य करने के बाद संबंधित अधिकारियों की मनपसंद पोस्टिंग दी जाएगी। उन्होंने ट्रेनिंग सेंटर के रिक्त पदों को भरने के निर्देश भी दिए। गृह मंत्री ने उन्होंने कहा कि सेंटर में प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। श्री गुप्ता ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर दक्षता बढ़ाएं। प्रशिक्षणार्थियों की मूलभूत जरूरतों को हर हाल में पूरी करें। गृह मंत्री ने कहा कि प्रदेश में संचालित सभी ट्रेनिंग सेंटर का मुख्यालय भोपाल में एक ही एडीजी के अधीन रहेगा। अभी एसएएफ और पुलिस बल के लिए संचालित ट्रेनिंग सेंटर का नियंत्रण अलग-अलग अधिकारियों के पास है। गृह मंत्री ने कहा कि ट्रेनिंग ले रहे आरक्षक, उप निरीक्षक और उप पुलिस अधीक्षक को नए पाठ्यक्रम के अनुसार बेहतर प्रशिक्षण दिया जाय। प्रशिक्षक की भी ट्रेनिंग करवाई जाय। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रायवेट डॉक्टर भी बुला सकते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि उपकरणों के मेंटीनेंस के लिए अलग से बजट प्रावधान करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह आईएनएस दाणी, पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशासन सरबजीत सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
00जबकि हकीकत है ये
पुलिस ट्रेनिंग सेंटर को लूप लाइन नहीं माना जा सकता। यहां कमाई के नए जरिया हैं। ट्रेनिंग के दौरान उसी ट्रेनी को अच्छा खाना मिलता है जो अपने वेतन में से अधिकारी को रुपए देता है। इसके अलावा ट्रेनिंग की जगह एक दिन सोने से लेकर मार्केट घूमने तक के रुपए दिए जाते हैं। ट्रेनिंग ले रहे जवानों को ऐसी सब्जी दी जाती है कि जानवर भी खाने से इंकार कर दें। हर जवान अपने साथ नमकीन, टमाटर, मिर्ची और धनिया रखता है। वो सेंटर से मिली सब्जी में मिलाकर खा लेता है और जैसे-तैसे समय निकालता है। सोने के लिए बिस्तर घर से ले जाना पड़ता है। ट्रेनिंग सेंटर के हाल इतने बुरे हैं कि सरकारी नौकरी और थाने में पोस्टिंग के बाद मिलने वाली रिश्वत का लालच न हो तो एक भी जवान न रूके। बीमार होने पर जवान को पेरासिटामोल दी जाती है और अधिक तबीयत खराब होने पर सरकारी अस्पताल में पटक दिया जाता है। इसके लिए भी जवान को रुपए खर्च करना होता है।
ट्रेनिंग के साथ सैरसपाटा
गृह मंत्री ने कहा कि सभी प्रशिक्षणार्थियों को दो माह में एक बार पिकनिक में ले जाए। पिकनिक कार्य दिवस में हो। इस दौरान सभी प्रशिक्षक और प्रशिक्षणार्थी मिल-जुलकर रहें। केन्द्र का प्रमुख मेस का सतत निरीक्षण करें और माह में एक दिन प्रशिक्षणार्थियों के साथ भोजन करें। केन्द्र में खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो।
ट्रेनिंग सेंटर की क्षमता बढ़ेगी
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजेन्द्र कुमार ने बताया कि 13वें वित्त आयोग मद से ट्रेनिंग सेंटर में नए कक्ष बनवाने के साथ ही उपकरण भी उपलब्ध करवाए जाएँगे। उन्होंने बताया कि सेंटर की क्षमता 1500 से बढ़ाकर 4500 करने का लक्ष्य है। सेंटर में रिक्त व्याख्याताओं के पद पर संविदा नियुक्ति की जाएगी।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें