दंबगई
109 परिवारों के प्लॉट की फर्जी तरीके से हथियाई
एक्सक्लूसिव
इंट्रो:रायसेन जिले के सांची में 109 परिवारों ने घर बसाने के लिए प्लॉट खरीदे, लेकिन भूमाफियाओं ने उनकी गाढ़ी कमाई के रुपए से खरीदे प्लॉटो को हड़प लिया। यह कारनामा किया प्रदेश के वित्तमंत्री राघवजी भाई के भतीजे त्रिलोकजी सावला, बेटे लोकेशजी सावला ने। खास बात ये है कि इन प्लाट स्वामियों ने बाकायदा रजिस्ट्री के बाद नामांतरण भी करवा लिया था, बाबजूद रसूख की दम पर कृषि भूमि बताकर लाखों रुपए एकड़ की जमीन मात्र 3 लाख रुपए में फर्जी तरीके से खरीद ली गई। अब मजबूर प्लॉट मालिक कलेक्टर, एसपी के दरबार में गुहार लगा रहे हैं, लेकिन न्याय मिलने की जगह पुलिस धमका रही है। प्रदेश में राजनीतिक भूमाफियाओं की करतूत और मजबूर 109 परिवारों की दास्तां बताती प्रमोद त्रिवेदी की खास खबर
भूमाफियाओं से सख्ती से निपटने का दावा करने वाली सरकार के वित्तमंत्री राघवजी भाई के सगे रिश्तेदारों पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुष्ट सबूतों और फरियादियों की शिकायत के मुताबिक जिस जमीन पर 109 प्लॉट काटकर रजिस्ट्री करके बेंचे गए उसे भाईजी के बेटे और भतीजे ने चंद रुपयों में फिर से खरीद लिया। यानि भूमि को पहले 109 लोगों को बेचा गया और बाद में उसी भूमि को भाईजी के रिश्तेदारों को। जबकि इन प्लॉटों का बाकायदा नामांतरण भी हो चुका है और जमीन के नामांतरण की प्रति निकाली जाती है तो इसमें असली भू स्वामियों यानि प्लॉट मालिकों का नाम दर्ज है। भूमि मालिक चतरसिंह ने फर्जीबाड़ा किया, लेकिन रसूखदार खरीददारों ने राजनीतिक ताकत के दम पर इस जमीन को चुपचाप खरीद लिया गया। इतना ही नहीं कृषि भूमि बताकर रहवासी जमीन को खरीदने के बाद उसके आस-पास बाउंड्री भी बनवा दी गई। आवेदकों के अनुसार खरीददार यानि भाईजी के रिश्तेदार, ताकत की दम पर प्लॉटों पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं।
दो बार रजिस्ट्री
1992-93 में विभिन्न साइजों में 109 प्लॉट काटकर लोगों को बेच दिए गए। प्लॉट मालिकों ने अपने प्लॉटों पर तार फेंसिंग भी कर ली। इन लोगों ने प्लॉटों पर निर्माण इसलिए नहीं किया, क्योंकि उस समय वहां पानी, लाइट जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं। अचानक 2011 में इनके तार फेंसिंग को हटाकर बाउंड्री का काम शुरु कर दिया गया। इस बारे में प्लॉट मालिकों ने पूछा तो चतर सिंह ने बताया कि नए नियम के मुताबिक वह प्लॉटों के आस-पास बाउंड्री बनवाकर दे रहा है। इन लोगों ने रजिस्ट्रार आफिस में मालूम किया तो इन्हें घपले की जानकारी हुई। 12 मई 1999 को पहले से बिकी हुई जमीन को त्रिलोक और लोकेश ने औने-पौने दाम में खरीद लिया था। जमीन खरीदने के बाद ये लोग शांत रहे और मौके की तलाश में रहे। जैसे ही मौका मिला, लोगों के प्लॉट पर कब्जा करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
00गुण्डे बैठे हैं प्लॉटों पर
प्लॉट मालिकों का कहना है कि हमारे प्लॉटों पर गुण्डे पहरा दे रहे हैं। हमें प्लॉटों पर जाने नहीं दिया जाता और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पुलिस भी हमारी नहीं सुन रही है। ऐसी स्थिति में कोर्ट से ही न्याय मिलने की संभावना है।
00थानाप्रभारी मांग रहे ओरिजनल पेपर
आवेदक सुंदरलाल, रमेश पासी के मुताबिक सांची थाना प्रभारी जांच के नाम पर हमसे सभी उपलब्ध नामांतरण और रजिस्ट्री की ओरिजनल प्रति मांग रहे हैं। हमने कहा कि सत्यापित प्रति देंगे तो दबाब बना रहे हैं कि ओरिजनल पेपर दो। मुझे एसपी साहब ने जांच प्रतिवेदन में ओरिजनल पेपर लगाने को कहा है। आवेदकों के अनुसार ऐसी स्थिति में पुलिस की नियत पर भी शक हो रहा है। हलांकि हमने ओरिजनल पेपर देने से साफ इंकार कर दिया। हम केवल सत्यापित पेपर ही उपलब्ध कराएंगे।
00एसपी अंजान हैं
आवेदकों के आवेदन में स्पष्ट है कि जमीन के खरीददार राघवजी के पुत्र और भतीजे हैं। एसपी का कहना है कि उन्हें ये जानकारी नहीं हैं। इसके अलावा उनका कहना है कि दो पक्षों में झगड़े का अंदेशा है, इसलिए 145 की कार्रवाई की जा रही है। जाहिर है एसपी को दोनों पक्षों का तो पता है, लेकिन वित्तमंत्री के नाम के आगे अंजान बन रहे हैं।
00वित्त विभाग को चूना
इस जमीन की खरीद में वित्तमंत्री के रिश्तेदारों ने राजस्व विभाग को भी चूना लगाया। जिस जमीन को प्लॉट के लिए बेचा गया उसे कृषि भूमि बताकर कैसे खरीदा गया। इसके साथ ही करीबन 50 लाख रुपए एकड़ की जमीन की रजिस्ट्री मात्र डेढ़ लाख रुपए एकड़ दर्शाकर कराई गई। इससे जाहिर है कि रजिस्ट्री स्टाम्प शुल्क में राजस्व विभाग का नुकसान किया गया। इसके साथ ही जमीन खरीदने से पहले सार्वजनिक तौर किसी तरह का इश्तेहार भी नहीं निकाला गया और रजिस्ट्रार ने भी बिना छानबीन के रजिस्ट्री कर दी।
वर्सन
हमने मेहनत की कमाई से प्लाट खरीदे थे, लेकिन मंत्री पुत्रऔर भतीजे ने कब्जा कर लिया। इन लोगों ने प्लॉट की जमीन को कृषि भूमि बताकर गलत तरीके से रजिस्ट्री करवा ली और बाउंड्री बनाकर चौकीदार बिठा दिया है। लाखों रुपए की जमीन को केवल डेढ़ लाख रुपए एकड़ दर्शाकर खरीदने से शासन को रजिस्ट्री शुल्क में भी चूना लगाया। हमने प्रशासन और पुलिस को अपनी शिकायत दी है लेकिन वित्तमंत्री का मामला होने के कारण पुलिस का व्यवहार गलत है। सांची टीआई हमारी ओरिजनल रजिस्ट्री और सारे कागजात मांग रहे हैं। रमेश कुमार पासी, प्लॉट के मालिक।
सांची में दो पक्षों के बीच प्लॉट-जमीन विवाद का आवेदन आया है। उसकी जांच के लिए मैंने एसडीओपी को कहा है। इसके अलावा शिकायत की एक प्रति एसडीएम को भी दी जा रही है। दोनों पक्षों में झगड़ा न हो इसके लिए 145 की कार्रवाई कर रहा हूं। राघवजी भाई के रिश्तेदारों से संबंधित कोई शिकायत मेरे पास नहीं आई है।
एसपी रायसेन
नियमानुसार पहली रजिस्ट्री मान्य होती है। दूसरी रजिस्ट्री को स्वमेव अमान्य करार दिया जाता है। इसके बाद अगर पहले भूमि बेचने की जानकारी के बाद भी खरीदी गई तो खरीददार के विरुद्ध भी मामला बनता है। बेचने वाले के खिलाफ तो धोखाधड़ी का मामला बनना तय है।
सुभाष बोहत, कानूनविद।

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