पहली ट्रेन बेंगलुरु एक्सप्रेस
रेल बजट में मध्यप्रदेश को तीन ट्रेनों की सौगात मिली, लेकिन अभी तक एक भी शुरू नहीं हो सकी है। यह घोषणाएं तृणमूल कांगे्रस के कोटे से मंत्री रहे दिनेश त्रिवेदी ने की थी। दिनेश त्रिवेदी ने सामान्य श्रेणी के किराए में कुछ पैसों की बढ़ोतरी की थी, जो जनता को तो रास आई लेकिन तृणमूल की महात्वाकांक्षा को रास नहीं। परिणाम में एक घटिया राजनीतिक घटनाक्रम के चलते रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को हटाकर ममता बनर्जी के पिठ्ठु मुकुल राय को रेल मंत्रालय के पद से नवाजा गया। ये वही मुकुल राय हैं जो एक ट्रेन दुर्घटना का जायजा लेने गए तो ट्रेन से उतरने के लिए जूतों के नीचे कालीन बिछाई गई। एक दुर्घटना के बाद प्रधानमंत्री के कहने पर भी जायजा लेने नहीं गए। ममता बनर्जी और मुकुल राय के पास रेल मंत्रालय से संबंधित न तो कोई योजना थी और न ही कोई सौगात। मुकुल राय ने ममता के आदेश पर सामान्य श्रेणी की बढोतरी रद्द कर बाकी सब पहले की तरह दिनेश त्रिवेदी की घोषणाओं पर अमल किया। इतना ही नहीं तत्काल टिकिट में आम आदमी की परेशानी दूर करने और दलालों का हस्तक्षेप खत्म करने में भी दिनेश त्रिवेदी की कार्ययोजना ही लागू की गई। लेकिन दिनेश त्रिवेदी की घोषणा वाली ट्रेनों को समय पर नहीं चलाया जा सका। इसका कारण है मुकुल राय की अनुभव हीनता और ममता का अडंगा। ऐसे में जो डबल डेकर जुलाई में शुरू होती, वो जनवरी से पहले शुरू नहीं हो सकती। सब जानते हैं कि अफसर भी मंत्री की ताकत और समझ देखकर काम करते हैं। रेल मंत्रालय भी अपवाद नहीं हो सकता। खैर घोषणा के बाद तो केवल इंतजार ही किया जा सकता है। फिलहाल रेल मंत्रालय में भूतझोलकिया के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि रेल बजट में मिली तीन ट्रेनों में से सबसे पहले इंदौर-यशवंतपुर (बेंगलुरू) एक्सप्रेस चलाई जाएगी। इसके बाद इंदौर-भोपाल/हबीबगंज डबल डेकर एसी एक्सप्रेस और इंदौर-रीवा एक्सप्रेस का नंबर आएगा। माना जा रहा है कि यदि कोई अड़ंगा नहीं आया तो अक्टूबर या नवंबर तक यशवंतपुर एक्सप्रेस चला दी जाएगी। रेलवे बोर्ड यशवंतपुर एक्सप्रेस के लिए कोच फैक्टरी कपूरथला को रैक बनाने का आॅर्डर दे चुका है। उच्च पदस्थ अधिकारी के अनुसार सबसे पहले इंदौर को यशवंतपुर एक्सप्रेस ट्रेन मिलने की ज्यादा संभावना है। इसके बाद भोपाल/हबीबगंज डबल डेकर एसी एक्सप्रेस और रीवा एक्सप्रेस मिलेगी। यशवंतपुर एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से चलाया जाना है। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद रेल कोच फैक्टरी में 19 एलएचबी कोच तैयार किए जा रहे हैं। सितंबर अंत तक रैक तैयार हो जाएगा। फिर रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद कभी भी ट्रेन चलाई जा सकती है। एलएचबी रैक तीव्र गति से दौड़ सकता है। आरामदायक और सुंदर होने के साथ इसके डिब्बे दुर्घटना के दौरान एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते।

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