- पारदर्शी शिक्षा के लिए आॅन लाइन प्रवेश प्रक्रिया
प्रमोद त्रिवेदी
मध्यप्रदेश के हर वर्ग के विद्यार्थी को शिक्षा मिले और उसे महाविद्यालयों की मनमानी से जूझना न पड़े। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने विद्यालयीन समय के अनुभवों के आधार पर विद्यार्थियों को ई प्रवेश यानि आॅन लाइन एडमीशन की सौगात देने का बीड़ा उठाया। इस कार्य में उनके उद्देश्य में सहभागी बने उच्चशिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा। नतीजन आज पूरे भारत में मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है जहां एक क्लिक पर 24 घंटे कभी भी छात्र को 9 कॉलेजों में एडमीशन के लिए चयन करने का अधिकार मिल गया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए भटकते विद्यार्थिओं और उनके परिजनों का दर्द बड़े नजदीक से महसूस किया। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों की सुविधा के लिए ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया जो कि पूरे देश के लिए मिशाल बन गया। लम्बी लाइनों में लगने और एडमीशन के लिए कॉलेजों के चक्कर काटने से लेकर सीटों की स्थिति जानने का बेहद जटिल काम पर पूरी तरह विराम लग गया। घर बैठे चौबीसों घंटें कभी भी विद्यार्थी आॅन लाइन आवेदन कर सकता है। उसे प्रवेश के लिए 9 कॉलेजों में से चुनने की सुविधा मिल गई। आॅन लाइन कॉलेजों की सीटों और कोर्स की जानकारी भी मिल रही है। कहीं कोई गड़बड़ नहीं। सब कुछ आंखों के सामने। ऐसी पारदर्शिता कि विद्यार्थियों को स्वर्णिम भविष्य सपना न लगे बल्कि हकीकत में तब्दील होता दिखे। मुख्यमंत्री के इस प्रयास में उच्च शिक्षा विभाग के तमाम अफसरों ने खुद उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की मॉनिटरिंग में कार्य किया और नतीजा आॅन लाइन एडमीशन की सहूलियत के साथ सामने है।
ई प्रवेश ने किया प्रवेश आसान
- विद्यार्थियों की सुविधा और बेहतर पारदर्शिता के लिए 2012-13 में मध्यप्रदेश के महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए आॅनलाइन प्रवेश प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है। इस व्यवस्था को लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है।
- आॅन लाइन से विभिन्न महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो रही है। विद्यार्थिओं और अभिभावकों को अलग-अलग महाविद्यालय में आवेदन करने की परेशानी से मुक्ति मिली है।
- इस प्रक्रिया से सभी को प्रवेश के समान अवसर मिले और प्रवेश प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी हो गई।
- इससे घर बैठे विद्यार्थियों को 24 घंटे प्रवेश की सुविधा मिली।
- केवल 50 रुपए प्रति महाविद्यालय शुल्क पर विद्यार्थियों को 9 महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए चयन करने का अवसर मिला।
पहले उच्च शिक्षा में सेमेस्टर सिस्टम की सौगात
महाविद्यालयीन परीक्षाओं में गड़बड़ी ,अध्ययन के लिए कालेजों में सुविधाओं से जूझते विद्यार्थी। यह सब बीते दिनों की बात हो गई है। अब महाविद्यालय सरकारी हो या निजी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लागू सेमेस्टर पद्धति ने अध्ययन व अध्यापन दोनों की दशा व दिशा में व्यापक बदलाव किया है। दैनिक हाजिरी ,प्रायोगिक शिक्षा पर जोर व साल में दो बार परीक्षा से न केवल महाविद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ी बल्कि उन्हें अध्ययन नोट्स,प्रेक्टिकल फाइल्स तैयार करने के लिए बाध्य होना पड़ा। शैक्षणिक कैलेण्डर के अनुसार तय समय में पाठ्यक्रम पूरा करने की बाध्यता ने महाविद्यालयों में पढ़ाई के प्रति रुझान पैदा किया। बिगड़ी हुई व्यवस्था में सुधार कर इसे नए सांचे में ढालना आसान नहीं है,लेकिन राज्य शासन के मजबूत इरादे से उच्च शिक्षा में यह बदलाव संभव हुआ। इसका श्रेय पूरी तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को जाता है जिन्होंने सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।
हजार करोड़ की नई योजना
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक सुधार के लिए राज्य सरकार अब विश्व बैंक की मदद से नई सुधार योजना लागू करने की तैयारी में है। इस पर एक हजार करोड़ रुपए खर्च होगें। यह पहला मौका है जब उच्च शिक्षा में अधोसंरचना विकास पर इतनी बड़ी राशि व्यय करने का निर्णय लिया गया। बताया जाता है कि विश्व बैंक ने भी इस मामले में अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी। आर्थिक सहायता संबंधी औपचारिकताओं की पूर्ति के लिए दो बार उच्च स्तरीय बैठके भी हुर्इं। इस राशि से प्रस्तावित दस नए महाविद्यालयों समेत सभी 24 भवन विहीन कालेजों के लिए भवन व छात्रावास तैयार किए जाएंगे। यही नहीं चुनिंदा महाविद्यालयों में राष्ट्रीय स्तर का पुस्तकालय व प्रयोगशालाओं की भी स्थापना होगी।
संशोधित अधिनियम यानि नया आयाम
शिक्षा व्यवस्था में और अधिक सुधार के लिए राज्य शासन विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन करने की तैयारी में भी है। नई व्यवस्था के तहत शिक्षा सत्र एक जुलाई से अनिवार्य रूप से शुरू करने, प्राचार्यों के रिक्त पदों की पूर्ति, सेमेस्टर पद्धति को और अधिक मजबूत बनाना, शोध के लिए बजट की अतिरिक्त व्यवस्था, शिक्षा ऋण गारंटी योजना का सरलीकरण, प्रतिभावान व अभावग्रस्त विद्यार्थियों की मदद के लिए पचास करोड़ रुपए की निधि की स्थापना ,जिला स्तर के सभी आईटीआई को आदर्श संस्थान बनाना, आदिवासी बहुल क्षेत्र झाबुआ,शहडोल व नौगांव में नए इंजीनियरिंग कालेजों की स्थापना आदि कार्य शामिल हैं।
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