शनिवार, 11 अगस्त 2012

स्टाफ खोजते रहोगे सीआईडी में


तीन दशक पहले स्वीकृत स्टाफ से चल रहा काम 
इंट्रो:
संसाधनों के अभाव और उपेक्षा के चलते अपराध अनुसंधान विभाग यानि सीआईडी अस्तित्वहीन होता जा रहा है। सीआईडी की शुरुआत से लेकर इसकी शाखाओं को अलग किया गया, लेकिन बल और संसाधनों में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि सीआईडी से अलग हुई शाखाएं स्वतंत्र रूप से बल और संसाधनों में सीआईडी से कई गुना आगे निकल गर्इं। सीआईडी में पदस्थ आला अफसरों ने भी अपनी पदस्थापना को लूप लाइन मानकर किसी तरह के बदलाव का प्रयास नहीं किया और ये विभाग केवल विधानसभा के लिए आंकड़ें इकत्रित करने तक सीमित हो गया। फिलहाल सीआईडी के आला अधिकारियों ने सीआईडी को सुदृढ़ बनाने के लिए 1500 कर्मचारियों का बल और वाहन आदि तमाम तरह के संसाधनों की योजना बनाकर शासन को सौंपी है। गृह मंत्रालय ने भी सीआईडी की उपयोगिता को बढ़ाने और मजबूती के लिए हरी झंडी दे दी है। 
प्रमोद त्रिवेदी, भोपाल
तीन दशक पहले अपराधों का ग्राफ कम था और उस ग्राफ के मुकाबले सीआईडी के पास पर्याप्त अमला था। लेकिन समय के साथ अपराधों का ग्राफ बढ़ता गया, लेकिन सीआईडी की उपयोगिता को कम कर दिया गया। अजाक विभाग, एसटीएफ, साइबर क्राइम विभाग, स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो को सीआईडी से अलग कर स्वतंत्र विभाग बना दिए गए। इन स्वतंत्र बनाए गए विभागों को हर तरह की सुविधा और अमला दिया गया, लेकिन सीआईडी तीन दशक पुराने अमले से ही काम चला रहा है। पिछले दो दशक से सीआईडी का काम केवल विधानसभा सत्र के लिए जानकारी उपलब्ध कराना और कुछ राजनीतिक मामलों की जांच करना सीमित हो गया है। संसाधनों के अभाव में अफसर भी सीआईडी में पदस्थापना को लूप लाइन समझने लगे और विभाग की दशा सुधारने में रुचि नहीं ली। परिणाम में सीआईडी का स्तर दिनों-दिन गिरता गया। सीआईडी के हालत इतने बदतर हैं कि किसी इंवेस्टीगेशन के लिए इंस्पेक्टर स्तर तक के कर्मचारियों पर कोई वाहन नहीं हैं। वहीं एसपी, डीआईजी को भी घटिया स्तर के वाहन दिए गए हैं। परिणाम में सीआईडी का नेटवर्क भी खत्म होता गया और कई आपराधिक घटनाओं के मामले में अन्य प्रदेशों के खुफिया विभाग को जानकारी हो गई, लेकिन प्रदेश में सीआईडी को कानों-कान खबर नहीं हुई। बरहहाल अब अधिकारियों ने सीआईडी के स्वरूप बदलने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। सीआईडी की उपयोगिता को समझते हुए गृह विभाग ने भी सीआईडी की योजना को अमली जामा पहनाने के लिए स्वीकृति देने का मन बना लिया है।
00समय निकाला और चले गए
करीबन तीन दशकों से भी ज्यादा समय से संसाधनों और अमले के लिए जूझ रहे सीआईडी की दशा सुधारने की किसी ने कोशिश नहीं की। जो भी अधिकारी आए, वो लूपलाइन समझकर नौकरी करते रहे और चले गए। समझा जा सकता है कि तीन दशक में पहली बार एडीजी ने सीआईडी को मजबूत करने के लिए योजना बनाई। ऐसी स्थिति के चलते सीआईडी से अलग हुर्इं एसटीएफ जैसी सेल तो मजबूत होती गर्इं, लेकिन सीआईडी कमजोर। शाखाआें ने स्वतंत्र रूप से अपना अस्तित्व बनाया, लेकिन सीआईडी केवल आंकड़े एकट्ठा करने वाली विंग बनकर रह गई। यही कारण है कि पिछले कई सालों में सीआईडी के नाम कोई उपलब्धि नहीं है, जिसमें किसी भी मामले में सीआईडी ने सराहनीय कार्य किया हो। सीआईडी के जिला मुख्यालयों पर भी इंस्पेक्टर तैनात हैं, लेकिन वे केवल मुख्यालय को आंकड़े भेजने का काम करते हैं। वाहन आदि संसाधनों के अभाव में उनका नेटवर्क भी खत्म हो गया है।
00ये होगा बदलाव!
सीआईडी में फिलहाल कुल स्टाफ की संख्या 300 है। एडीजी सीआईडी ने विभाग का काम बढ़ाने और मजबूती के लिए अतिरिक्त 1500 का स्टॉफ मांगा है। इसमें डीएसपी स्तर के अधिकारियों की संख्या ज्यादा है, जो क्राइम इंवेस्टीगेशन में माहिर होंगे। इसके अलावा विभाग को तकनीकि रूप से सक्षम बनाने के लिए उपकरण और हथियार भी योजना में शामिल हैं। सीआईडी के पास वाहन नहीं हैं। योजना में इंस्पेक्टर लेबल से लेकर उच्च अधिकारियों के लिए अच्छे वाहन उपलब्ध होंगे। फील्ड में काम करने पर अफसरों का मनोबल बढ़ेगा और सफलता मिलने पर सराहना भी मिलेगी।
00सीआईडी में बनेगी स्पेशल इंवेस्टीगेशन सेल
सीआईडी में अमला मिलने के बाद कई स्पेशल विंग बनेगी। इसमें स्पेशल इंस्वेस्टीगेशन विंग भी होगी, जिसमें चुनिंदा अधिकारी काम करेंगे। ये अंधे कत्ल से लेकर व्हाइट कालर क्रिमिनल और आर्थिक क्राइम पर नकेल कसने का काम करेंगे।
00अंधे कत्ल के लिए कोई विंग नहीं
फिलहाल प्रदेश में अंधे कत्लों को सुलझाने के लिए कोई स्पेशल सेल नहीं है। ऐसे में हर साल कई अंधे कत्लों के अपराधी पकड़े नहीं जाते हैं। थाने के पास सुरक्षा व्यवस्था का इतना बोझ होता है कि वे पुराने केस और अंधे कत्ल पर काम नहीं कर पाते हैं। ऐसे में सीआईडी में अंधे कत्लों को सुलझाने के लिए एक विंग बनाने की दिशा में कार्ययोजना बनाई गई है।
00वर्सन
विभाग की जरूरतों और संसाधनों के साथ क्राइम इंवेस्टीगेशन विंग की मजबूत करने के लिए काम शुरु हो गया है। सीआईडी को मजबूत बनाने के लिए योजना बनाकर डीजीपी और गृह विभाग को सौंपी गई है। उच्चाधिकारियों और गृह विभाग का रूख सकारात्मक है और हमारी योजना से सहमत होते हुए सभी सहयोग कर रहे हैं। पहले पदस्थ रहे अधिकारियों के योजना नहीं बनाने पर जबाब देना मुश्किल है। फिलहाल सीआईडी का नेटवर्क मजबूत करने और हर जिले में वाहन और स्टाफ तैनात करने की योजना बनाई गई है। हर बड़े अपराध पर सीआईडी अफसर भी स्वतंत्र रूप से जांच करेंगे। इससे थानों पर बोझ भी कम होगा और क्राइम कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। शीघ्र ही योजना पर काम शुरु होने की उम्मीद है।
एमआर कृष्णा, एडीजी, सीआईडी



00फैक्ट फाइल

  • सीआईडी में कुल अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या लगभग 300 है। सीआईडी को प्रदेश में सुदृढ़ बनाने के लिए कम से कम 1500 कर्मचारी-अधिकारियों का स्टाफ चाहिए।
  • वर्तमान में सीआईडी में पदस्थ इंस्पेक्टरों के पास विभाग का कोई वाहन नहीं है। इसके अलावा डीएसपी लेवल से लेकर उच्च अधिकारियों के पास भी सीमित संसाधन हैं। जबकि पुलिस विभाग की अन्य शाखाओं में समान कैडर के अधिकारियों के पास भरपूर सुविधा है। सीआईडी इंस्पेक्टर विवेचना के दौरान निजी वाहन का इस्तेमाल करते हैं।
  • 1976 में सीआईडी की शुरुआत से लेकर स्वीकृत बल में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। जबकि जनसंख्या से लेकर क्राइम में करीबन 400 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।
  • सीआईडी की शुरुआत से लेकर वर्तमान तक सीआईडी की शाखाओं में कोई वृद्धि नहीं हुई, बल्कि इसकी शाखाओं को काटकर अन्य शाखाएं बना दी गर्इं। सीआईडी की शाखाओं को स्वतंत्र रूप से तमाम संसाधन मुहैया कराए गए, लेकिन सीआईडी की हालत में कोई बदलाव नहीं आया।
  • शुरुआत में सीआईडी में आईजी विभाग प्रमुख थे। इसके बाद एडीजी को नियुक्त किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने सीआईडी को सुदृढ़ बनाने प्रभावी कदम नहीं उठाए। अधिकांश अधिकारी ने सीआईडी प्रमुख के पद को लूप लाइन समझा और नौकरी का समय निकाला। किसी भी अधिकारी ने लिखित तौर पर कोई योजना नहीं बनाई। योजना बनाने और डीजीपी से लेकर शासन को भेजने के कोई भी दस्तावेज सीआईडी के पास नहीं होना इस बात का प्रमाण है।
  • विधानसभा के सभी सत्रों में जानकारी का जिम्मा सीआईडी विभाग के पास होता है। विभाग का तमाम अमला विधानसभा के लिए जानकारी एकत्रित करने और भेजने में लग जाता है। इसमें हर साल सीआईडी विभाग के तकरीबन 9 माह लग जाते हैं। इस मान से केवल 3 महीने सीआईडी को क्राइम इंस्वेटीगेशन में मिलते हैं।
  • किसी भी अपराध की जानकारी मिलने पर थाना प्रभारी, उच्च अधिकारियों को जानकारी देता है लेकिन सीआईडी को तत्काल जानकारी देने का कोई नियम नहीं है। ऐसे में सीआईडी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच पाते और सीआईडी को जांच सौंपी जाती है तब तक सबूत मिट चुके होते हैं।
  • साइबर क्राइम विभाग, स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो, एसटीएफ, नारकोटिक्स सेल, आदिमजाति कल्याण पहले सीआईडी में शामिल थे। बाद में इनको सीआईडी से अलग करके स्वतंत्र विभाग बना दिए गए। इन तमाम विभागों की संरचना और संसाधन बहुत बेहतर हैं, जबकि सीआईडी की स्थिति नहीं बदली।

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