विशेष सम्पादकीय.....प्रमोद त्रिवेदी
हमारे देश की आजादी को 65 साल पूरे हो गए। यानि पूरी आवाम(बांग्लादेशी शरणार्थियों और आतंकवादियों सहित) 65 साल से आजादी की सांस ले रही है। इसी के साथ ही देश की आजादी और कर्णधारों के कर्मों को कोसने के भी इतने ही वर्ष हो चुके हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसा भी कोई दिन रहा हो, जब किसी दिन देश के हालात को लेकर नेताओं को न कोसा गया हो। सीधी सी बात है कि लोग आधा खाली गिलास कह रहे हैं। आधा भरा कह देंगे तो उन्हें लगता है कि देश के साथ गद्दारी होगी। खैर ये पुरानी बात हुई। अब हमें नई बात करनी है और वो ये है कि हमें ये देखना है कि तमाम बाधाओं के बाद भी हमारा देश ने क्या नया किया? इस देश में क्या अच्छा है जो विदेशियों के सामने अब भी विश्व गुरू मानने पर विवश करता है। सोचो, यदि चीन जैसे हालात हो जाएं। हमें बोलने के लिए भी इजाजत लेनी पड़े तो हम कहते हैं फिर कैसी आजादी। हमें ऐसे देश और उसके संविधान पर हमें गुमान होना चाहिए, जहां राष्ट्रपति चुनाव के बाद भी हम सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले के खिलाफ बोलते हैं और हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। किसी दूसरे देश में इतना बोलते ही एक ही सजा मुकर्रर होती और वो है फांसी। ये तो एक उदाहरण है। याद करो जेसीका लाल हत्याकांड या पूर्व डीजीपी राठौड़ का मामला। पूरा देश सर्वोच्च न्यायायिक शक्ति यानि कोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आता है। हमारे संविधान में न्यायालय के फैसले पर आम आदमी को टिप्पणी का अधिकार नहीं है, लेकिन ये भारत जैसे देश में ही हो सकता है कि लोगों ने कानून तोड़ा फिर भी उनकी बात सुनी गई। लोगों की भावनाओं को देखते हुए दोनों मामलों में देश की जनता की भावना को तरजीह देते हुए फैसले बदले गए। ये हैं स्वतंत्रता के मायने। रही भ्रष्टाचार, भुखमरी, अपराध या आतंकवाद की बात तो पूरे विश्व में एक देश का नाम बताओ जहां ये समस्याएं न हों। नहीं बता सकेंगे तो हमें फिर अहसान फरामोश की तरह अपने देश के उन सपूतों के बलिदान को व्यर्थ नहीं बताना चाहिए जो हमें ऐसी आजादी देने के लिए हंसते-हंसते शहीद हो गए। हमें ऐसा देश विरासत में मिला है जिसकी अच्छाई को गिरवाएं तो उम्र कम पड़ जाए। हम अपने देश को चलाने वाली सरकार को भी अर्श से फर्स पर पहुंचा सकते हैं। ये शक्ति हिंदुस्तान जैसे देश में ही आम आदमी के हाथ में हो सकती है। हम क्यों रोएं, जबकि सब हमारे हाथ में है। गलती कर भी देंगे तो हमारे देश का संविधान हमें बार-बार गलती सुधारने का मौका देता है। हमें नकारात्मक बातों को भुलाकर देश की सकारात्मक ताकत को पहचानना होगा। हमारा देश महान था, है और रहेगा। बस दिल से देश की अच्छाईयों को याद करो और शहीदों की याद सहेज लो। यही देश के प्रति वफादारी होगी और शहीदों को सच्ची श्रद्धांजली।
जय हिंद
vah...ye hai sachhi deshbhakti......trivedi ji ko badhayee.....ek din aap editor banoge
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