प्रमोद त्रिवेदी
भोपाल। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 2012 से पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों का प्रदेश सहित देश के बड़े अस्पतालों में किसी भी गंभीर बीमारी पर मुफ्त में इलाज हो सकेगा। इसके लिए प्रत्येक पुलिसकर्मी के वेतन से 50 रुपए मासिक काटे जाएंगें। यानि साल में 600 रुपए कटवाने पर एक साल में 8 लाख तक इलाज मिल सकेगा। इस योजना से सभी पुलिसकर्मियों को लाभ मिलेगा। खासकर सिपाही से लेकर एएसआई स्तर तक के कम वेतन वाले पुलिसकर्मियों के लिए ये योजना जीवनदायिनी साबित होगी।
प्रदेश के पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों का समय पर इलाज कराने और मेडिकल रिएम्बर्समेंट की परेशानियों से निजात दिलाने के मकसद से कर्नाटक और आंध्रप्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू की जाएगी। गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने योजना का प्रारूप शीघ्र बनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए प्रस्तावित योजना उनका मनोबल ब़ढ़ाने में सहायक होगी। गृहमंत्री ने कहा कि सभी प्रक्रियाएँ समय पर पूरी करें, जिससे एक नवम्बर से मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर योजना प्रारंभ की जा सके। योजना के क्रियान्वयन के लिए एक ट्रस्ट गठित किया जाएगा। ट्रस्ट की प्रबंध समिति के अध्यक्ष पुलिस महानिदेशक होंगे। समिति में एक उपाध्यक्ष, सचिव और 12 सदस्य होंगे।अंशदानयोजना में प्रत्येक पुलिस कर्मचारी को 50 रुपए प्रतिमाह अंशदान देना होगा। प्रदेश पुलिस में लगभग 80 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। योजना में प्रत्येक सदस्य, उसकी पत्नी और बच्चों को एक वित्तीय वर्ष में 8 लाख रुपए तक के इलाज की पात्रता रहेगी। शासन के नियमानुसार चिकित्सा प्रतिपूर्ति शासन सीधे ट्रस्ट को करेगी। प्रदेश के भीतर 30 तथा बाहर के 31 अस्पतालों में उनका इलाज हो सकेगा।
प्रदेश के बड़े अस्पताल
इंदौर का बाम्बे हॉस्पिटल, सिनर्जी हॉस्पिटल एवं हार्डिया नेत्र चिकित्सालय, भोपाल का चिरायु, पीपुल्स, भोपाल मेमोरियल, जवाहर लाल हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, जबलपुर का भण्डारी, जामदार, जबलपुर हॉस्पिटल, नेशनल हॉस्पिटल, ग्वालियर का सहारा हॉस्पिटल, बि़ड़ला हॉस्पिटल एवं कैंसर हॉस्पिटल, उज्जैन का आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज एवं बिरला हॉस्पिटल और एपेक्स हॉस्पिटल देवास, सीएचएल जैन दिवाकर हॉस्पिटल रतलाम, शारदा हॉस्पिटल खरगोन, कमला जैन हॉस्पिटल मंदसौर, गोमाबाई हॉस्पिटल नीमच, प्रकाश हॉस्पिटल खण्डवा, अरिहंत हॉस्पिटल इटारसी, नाहर नर्सिंग होम छिन्दवा़ड़ा, मिशन हॉस्पिटल पाढर बैतूल और बिरला हॉस्पिटल सतना शामिल हैं।
देश के नामचीन अस्पताल
नई दिल्ली के एम्स, जेपी पंत, एस्कार्ट एवं अपोलो, मुम्बई का जसलोक, टाटा मेमोरियल, नानावटी, बाम्बे एवं लीलावती, चेन्नाई का अपोलो, पनाडालिया कार्डियो फाउण्डेशन एवं शंकर नेत्रालय, हैदराबाद का निजाम इंस्टीट्यूट, मेडिसिन केयर एशियन इंस्टीट्यूट, लखनऊ का पीजीआई, हैदराबाद का अपोलो, ब़ड़ौदा का भाईलाल अमीन, अहमदाबाद का साल, गुड़गांव का मेदान्ता, जयपुर का महावीर और नागपुर का अनरेजा हॉस्पिटल, योकार्ड, अरिज, महात्मा आई, फरीदाबाद का फोर्टिस, मदुरई का अरविंद आई केयर और बैंगलुरू का जिमहेंस, नारायण एवं कोलम्बिया हॉस्पिटल शामिल है।
करीबन 5 करोड़ तो पुलिसकर्मियों से हो जाएगा इकट्ठा
पुलिसकर्मियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में हर साल प्रत्येक पुलिसकर्मी से 600 रुपए साल के मान से प्रदश्ो के 80 हजार पुलिसकर्मियों से 4 करोड़ 80 लाख रुपए इकट्ठा हो जाएगा। इस राशि का ब्याज मिलकर पुलिस विभाग के पास तकरीबन 6 करोड़ रुपए इकट्ठा हो जाएगा। प्रत्येक पुलिसकर्मी को एक वित्तीय वर्ष में 8 लाख रुपए के इलाज तक की पात्रता रहेगी। ऐसे में पुलिसकर्मियों को मिलने वाले मेडीकल क्लेम में कटौती होगी। इससे पुलिस विभाग को रुपए की बचत होगी और जो पुलिसकर्मियों से राशि इकत्रित होगी उसी से सालाना इलाज हो सकेगा। पुलिस विभाग एक बीमा कम्पनी से भी इस बारे में बात कर रही है। ऐसे में अंशदान, बीमाकम्पनी को देकर पुलिस विभाग वेफिक्र हो जाएगा। अंशदान की राशि से ज्यादा का इलाज होने पर बीमा कम्पनी भुगतान करेगी और इलाज कम को होगा तो बीमा कम्पनी को लाभ मिलेगा। बीमा कम्पनी इस रुपए को इन्वेस्ट करके अन्य स्त्रोतों से कमाई भी कर सकेगी।























